Saturday, June 22, 2024
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एक ऐसा सीरियल किलर जो माइंड गेम का है बेताज बादशाह! पढ़िए- उसकी ‘सत्यकथा’

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नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉट कॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है। आज हम आपको एक ऐसे सिरियल किलर की ‘सत्यकथा’ बताएंगे जिसे लोग बिकिनी किलर भी कहते हैं।

जी हां, हम बात कर रहे हैं माइंड गेम का बेताज बादशाह चार्ल्स शोभराज की। अभी हाल ही में 23 दिसंबर 2022 को नेपाल की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद काठमांडू की सेंट्रल जेल से रिहा किया गया है। लेकिन, कैद से आजाद होते ही चार्ल्स शोभराज ने जो कहा उसे सुनकर इंटरपोल से लेकर कई देशों की खुफिया पुलिस की निगाएं अब चार्ल्स शोभराज के अगले कदम पर टिकी हैं। फिलहाल हम जानते हैं कि चार्ल्स की उन तीन गर्ल्स फ्रैंड के बारे में जो बुरे वक्त में हमेशा शोभराज के साथ खड़ी रहीं।

जेल से छूटते ही चार्ल्स ने कहा- ‘अभी मुझे बहुत कुछ करना है। सबसे पहले नेपाल सरकार और बहुत से लोगों पर मुकदमा करूंगा।’

बिकिनी किलर के नाम से मशहूर चार्ल्स शोभराज पर 1975 से 1980 के बीच लूट-पाट के अलावा थाईलैंड, भारत, नेपाल, अफगानिस्तान, ईरान और हॉन्गकॉन्ग जैसे देशों में 20 से भी ज्यादा मर्डर करने के आरोप लगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने सबसे ज्यादा 14 मर्डर थाईलैंड में किए। सभी क्राइम और बुरे वक्त में तीन महिलाएं हमेशा उसके साथ खड़ी रहीं।

सबसे पहले बात करते हैं चार्ल्स की सबसे वफादार और कथित गर्लफ्रेंड मैरी आंद्री लेक्करी के बारे में। चार्ल्स और मैरी ने मिलकर थाईलैंड, भारत और नेपाल में 9 से भी ज्यादा मर्डर किए। मैरी मूल रूप से कनाडा की रहने वाली थी और पेशे से एक नर्स थी। अब आप सोच रहे होंगे ये दोनों एक-दूसरे से मिले कैसे?

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इन दोनों के मिलने की कहानी बहुत रोचक है। दरअसल, मैरी अपने रिलेशनशिप से परेशान होकर कुछ वक्त सुकून से गुजारने के लिए कनाडा से कश्मीर आई हुई थी। यहां उसकी मुलाकात एलन गेथियर नाम के एक फोटो जर्नलिस्ट से हुई।

इस फोटो जर्नलिस्ट को मैरी अपना दिल दे बैठी। प्यार इस कदर हावी हुआ कि मैरी कुछ ही दिनों में अपना सब कुछ छोड़-छाड़ कर इस फोटो जर्नलिस्ट के बुलावे पर जून 1975 को थाइलैंड पहुंच गई। यहां उसे पता चलता है कि कश्मीर की वादियों में हाथ में कैमरा लिए उसके पीछे घूम रहा व्यक्ति चार्ल्स था।

अभी प्यार को परवान चढ़े दो ही महीने हुए थे कि चार्ल्स ने पूरी तरह से मैरी को अपने माइंड गेम में फंसा लिया। इसके बाद चार्ल्स के हर स्कैम में मैरी उसका उसका साथ देने लगी। शुरुआत में दोनों थाईलैंड में आने वाले विजिटर्स को ड्रग्स सप्लाई किया करते थे।

इस कपल का काम अच्छा चल रहा था, साल 1975 भी बस खत्म होने को था। इस बीच 15 अक्टूबर को थाईलैंड पुलिस को पटाया सिटी में टेरेसा नोल्टन नाम की एक अमेरिकी महिला की लाश मिली। लाश फूलों से बनी बिकिनी से ढंकी हुई थी। पुलिस ने इसे सुसाइड माना, लेकिन बाद में पता चला ये एक मर्डर था।

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पुलिस ने इसे बिकिनी मर्डर केस नाम दिया। केस की जांच चल ही रही थी कि पटाया शहर के रिसॉर्ट रोड पर दिसंबर महीने की शुरुआत में पुलिस को तुर्की मूल के एक आदमी विटाली हकीम की लाश मिलती है। बॉडी लगभग जल चुकी थी। इसके कुछ ही दिनों बाद 16 दिसंबर को पटाया शहर में डच कपल कॉर्नेलिया हेमके और उसकी गर्लफ्रेंड हेंक बिंटांजा की डेड बॉडी मिली।

विंटर का सीजन मर्डर के सीजन में बदल गया था। पुलिस परेशान थी, कातिलों का सुराग तक नहीं मिल रहा था। इस स्थिति में पुलिस को एक और बिकिनी वाली लाश मिलती है। तफ्तीश में पता चला कि ये लाश विटाली की गर्लफ्रेंड की है। पुलिस ने जांच के आधार पर चार्ल्स के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया, लेकिन इससे पहले चार्ल्स और मैरी डच कपल के पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हुए नेपाल पहुंच गए थे।

दोनों ने नेपाल पहुंचते ही फेक पासपोर्ट के लिए कनाडा के लौरेंट कैरियर और अमेरिकी कोनी ब्रोंजिक को अपने जाल में फंसाकर मार डाला। इन दोनों के पासपोर्ट से मैरी और चार्ल्स इंडिया पहुंचे। यहां एक इजराइली स्कॉलर अवोनी जैकब का मर्डर किया और मलेशिया निकल गए। कुछ दिन बाद दोनों वापस बॉम्बे लौटे और इसके बाद चार्ल्स ने ड्रग्स देकर एक फ्रेंच टूरिस्ट लुक सॉलोमन की हत्या कर दी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मैरी और चार्ल्स ने अलग-अलग देशों में कुल 9 से भी ज्यादा हत्याएं कीं। सॉलोमन मर्डर केस में चार्ल्स को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, लेकिन मैरी ने कोर्ट में इसका विरोध किया। वहीं जैकब मर्डर केस में भी चार्ल्स को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया।

जबकि इसी केस में मैरी को 12 साल की सजा सुनाई गई। बाद में उसे पैरोल पर रिहा कर दिया गया। इस बीच पता चला कि वो कैंसर से पीड़ित है। ट्रीटमेंट के लिए उसे वापस कनाडा जाने की अनुमति दे दी गई। यहां उसने अपना पक्ष बताते हुए ‘जे रेवियन्स’ नाम की किताब लिखी। इसमें उसने चार्ल्स से प्यार होने से इनकार किया और लिखा कि ‘मैं चार्ल्स की साजिश का शिकार बनी’।

मैरी से मिलने से पहले क्राइम करने में चार्ल्स का साथ उसकी पत्नी चन्टल कोम्पगन देती थी। चार्ल्स और चन्टल की शादी 1970 में हुई थी। इसके बाद दोनों फ्रांस से एशिया आ गए। यहां दिल्ली में होटल अशोका में एक ज्वेलरी शॉप लूटने के बाद चार्ल्स को जेल में डाल दिया गया।

इसके बाद 1 नवंबर 1971 को बिना पासपोर्ट ट्रैवल करने के अपराध में उसे फिर गिरफ्तार किया गया। इस दौरान पुलिस की गिरफ्त से भागने में उसकी पत्नी चन्टल ने चार्ल्स की मदद की थी।

किताब ‘द लाइफ एंड क्राइम्स ऑफ चार्ल्स’ के मुताबिक जेल दाखिल होने के बाद चार्ल्स ने अपेंडिक्स के दर्द का बहाना बनाया। इसके बाद उसे दिल्ली में ​​​​​​वेलिंगटन हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। चार्ल्स शातिर होने के साथ ही हिंदी, फ्रेंच, इंग्लिश और वियतनामी भाषा भी अच्छी बोल लेता था।

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जब चन्टल हॉस्पिटल में चार्ल्स ने मिलने पहुंची, उसने कहा – “डार्लिंग आज रात तुम इन पुलिस वालों के साथ ताश खेलो, इन्हें बातों में उलझाए रखो। दोनों की बात सुनकर बगल के कमरे में बैठे हरे रंग की पगड़ी पहने सिख गार्ड ने चार्ल्स से कहा- अपनी पत्नी से फ्रेंच में बात मत करो। चार्ल्स ने इसका जवाब अंग्रेजी में दिया- “क्या मैं अपनी बीवी को गुड नाइट भी नहीं कह सकता?”

फिर उसने ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों से कहा- आज डॉक्टरों ने मुझे नींद की गोली नहीं दी है, क्या आप लाइट बुझा सकते हैं, जिससे मुझे नींद आ जाए? सिपाहियों ने उसकी बात मान ली। बगल के कमरे में चन्टल सिपाहियों के साथ ताश खेलने लगी। 20 मिनट बाद जब सिपाहियों ने कमरे की लाइट जलाई, तो चार्ल्स वहां नहीं था।

इसके बाद दोनों भागकर ग्रीस और वहां से काबुल चले गए। यहां चार्ल्स और उसकी पत्नी ने टूरिस्टों को खूब लूटा और एक बार फिर पकड़े गए। छूटने के बाद चार्ल्स ईरान भाग गया और चन्टल वापस फ्रांस लौट आई। इसके बाद दोनों कभी नहीं मिले। हालांकि, साल 2002 में चार्ल्स की गिरफ्तारी के बाद चन्टल ने उसकी सजा के खिलाफ अपील जरूर की थी।

बात आज से 14 साल पहले की है जब चार्ल्स, काठमांडू की सेंट्रल जेल में अपनी सजा काट रहा था। इस बीच साल 2008 में उसकी मुलाकात एक नेपाली लड़की निहिता बिस्वास से हुई। निहिता तब 21 साल की थी और चार्ल्स की उम्र 64 साल थी।

निहिता पेशे से ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट है। वो जेल में चार्ल्स के अनुवादक के तौर काम रही थी। इस बीच वो चार्ल्स की पर्सनालिटी से इतनी ज्यादा प्रभावित हुई कि उसे अपना दिल दे बैठी। दोनों ने जेल में ही शादी कर ली। बिस्वास के अनुसार चार्ल्स बेगुनाह है और उसे जांच एजेंसियों ने फंसाया है।

बिस्वास हाल ही में तब चर्चा में आई थी जब उन्होंने बिग बॉस सीजन 5 में हिस्सा लिया था। वो बिग बास के किसी भी सीजन में शामिल होने वाली पहली नेपाली महिला थी।

ये तो हो गई उन तीन लड़कियों की बात जिन्होंने क्राइम सीन से लेकर जेल की सलाखों तक चार्ल्स का साथ दिया। लेकिन, क्या आप जानते हैं चार्ल्स ने क्राइम की दुनिया में कैसे कदम रखा और क्यों वो एशियन कंट्रीज के टूरिस्टों को ही अपना शिकार बनाता था?

चार्ल्स शोभराज का पूरा नाम है- हथचंद भवनानी गुरमुख चार्ल्स। 6 अप्रैल 1944 को जब चार्ल्स का जन्म हुआ तो उसके मां-बाप की शादी नहीं हुई थी। चार्ल्स होश संभाल पाता उससे पहले ही उसके मां-बाप अलग हो गए। इसके बाद वो ट्रॉमा में चला गया। बाद में चार्ल्स की मां ने अपने एक फ्रैंच बॉयफ्रेंड से शादी कर ली। लेकिन चार्ल्स ट्रॉमा से उबर नहीं पाया और इस बीच उसने क्राइम की दुनिया में कदम रखा।

19 साल की उम्र में एक बिल्डिंग में अवैध तरीके से घुसने के आरोप में पहली बार उसे जेल जाना पड़ा। यहां उसकी मुलाकात एक रईस नौजवान लड़के फेलिक्स डी’स्कोग्ने से हुई। कोर्ट से बेल मिलने के बाद फेलिक्स ने उसकी मुलाकात अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों से कराई और यहीं से चार्ल्स के क्रिमिनल बनने की कहानी शुरू हुई।

एशियन कंट्रीज में ट्रेवल करने आई लड़कियों को बनाता था शिकार

चार्ल्स यूरोप और दक्षिण एशिया के देशों में ट्रेवल कर रही महिलाओं को अपना शिकार बनाता था। उसका मानना था कि इन देशों में कानून सख्त नहीं हैं, जिसकी वजह से वो यहां की जेलों से आसानी से छूट जाएगा। चार्ल्स अपनी आकर्षक पर्सनालिटी और महंगी लाइफ स्टाइल दिखाकर लड़कियों को फंसाता, उन्हें लूटता और फिर उनका मर्डर कर देता।

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इस खूंखार शख्स के एक नहीं, 10 चेहरे रहे होंगे। उसकी अबतक की लाइफ देखें तो इन अलग-अलग चेहरों का खाका खींचा जा सकता है। इसमें कभी उसका मासूम बचपन दिखता है तो कभी किशोरावस्था की उसकी बदमाशियां। कभी उसकी इंटेलेक्चुअलिटी दिखती है तो कभी उसका शातिराना अंदाज। कभी शराब, शवाब और क्राइम से भरी जवानी दिखती है तो कभी जेल के आगे-पीछे का खेल।
आइए जानते हैं विस्तार से—

मासूम बचपन

वियतनाम मूल के चार्ल्स शोभराज का जन्म 1944 में वियतनाम के हो ची मिन्ह शहर में हुआ था। उसकी मां वियतनाम की और पिता भारतीय मूल के थे। उसके माता-पिता ने शादी नहीं की थी। उसका बचपन अच्छा नहीं बीता। उसके जन्म के कुछ ही दिनों बाद उसके पिता ने उसे छोड़ दिया। यह बात चार्ल्स को बहुत परेशान करती थी। कुछ इंटरव्यूज में यह बात सामने आई है कि कई बार वह अपने पिता को याद करते हुए चिल्लाता था और सड़कों पर निकल जाता था। ऐसा माना जाता है कि उसे अपराध की दुनिया में जाने के पीछे कहीं न कहीं बचपन के इस आघात का भी रोल था।

स्कूल का तेज छात्र

चार्ल्स बचपन से ही बहुत होशियार था। उसका दिमाग तेज था, लेकिन इस तेज दिमाग का इस्तेमाल उसने पढ़ाई की बजाय चोरी-चमारी और अन्य अपराधों में किया। इस वजह से चार्ल्स को स्कूल में उसके क्लासमेट्स या अन्य स्टूडेंट्स पसंद नहीं करते थे।

टीनएज का बदमाश                                    

किशोरावस्था में ही चार्ल्स की बदमाशियां शुरू हो चुकी थी। उसकी मां सोचती थी कि जैसे-जैसे वह बड़ा होगा, सही रास्ते पर आ जाएगा। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं उसका आपराधिक सफर किशोरावस्था में ही शुरू हो चुका था। फ्रांस की राजधानी पेरिस में उसने एक इमारत में अवैध तरीके से घुसने की कोशिश की थी। तब उसे पहली बार जेल की हवा खानी पड़ी थी। 19 साल की उम्र में उसने पेरिस के अंडरवर्ल्ड में घूमना शुरू कर दिया था।

दर्शन-मनोविज्ञान का अध्येता!                         

क्राइम की दुनिया उसे आकर्षित करती थी, जोड़-तोड़ की तकनीक सीखने में उसकी दिलचस्पी थी। लेकिन, उसकी रुचि किताबों में भी खूब थी। वह इतिहास, मनोविज्ञान, कानून और दर्शन के लेखकों को खूब पढ़ता था। कार्ल गुस्टाफ जंंग उसके पसंदीदा लेखकों में से एक थे, जिन्हें अध्यात्म, मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा में महारत हासिल थी। उन्होंने ही एनालाइटिकल साइकोलॉजी की नींव डाली थी।

भरोसा जीतने में माहिर                                   

चार्ल्स लोगों का भरोसा हासिल करने में माहिर था। चार्ल्स की ऐसी शख्सियत थी कि उस पर कोई भी विश्वास कर सकता था। 19 साल की उम्र में उसे जेल हुई थी और वहीं से उसकी जिंदगी पलट गई। जेल में उसकी मुलाकात एक अमीर ‘जेल वॉलेंटियर’ फेलिक्स डी स्कोग्ने से हुई। मनोविज्ञान और अपनी जोड़-तोड़ की तकनीक से उसने फेलिक्स का भरोसा जीता और उसकी मदद से जेल से फरार हो गया।

हाई सोसाइटी का फेवरेट                                  

जेल से भागने के बाद में चार्ल्स उसी फेलिक्स का रूममेट बन गया था। फेलिक्स के ऊंचे ओहदे के कारण फेलिक्स की पहुंच हाई सोसाइटी में थी, सो चार्ल्स की भी पहुंच आसान हो गई। बाद में उसने अपनी भरोसे वाली शख्सियत का इस्तेमाल कर हाई सोसाइटी के बीच अपनी पहुंच बनाई और फिर कई लोगों को अपना शिकार बनाया। हाई क्लास पार्टीज में उसका जाना आसान हो गया था और यहीं से उसकी अंडरवर्ल्ड में एंट्री की राह आसान हो गई।

ट्रैवलर शोभराज                                                 

चार्ल्स ने अपने ज्यादातर शिकार अलग-अलग देशों में घूमते हुए किए। फ्रांस में रहते हुए उसने कई घोटाले किए और काफी सारा पैसा जमा किया। इसके बाद वो यूरोप छोड़कर इस्तांबुल आया और फिर भारत। इस बीच चार्ल्स सेंटाल नाम की महिला से शादी कर चुका था। दोनों मिलकर पर्यटकों को लूटते और उनके पासपोर्ट्स पर दुनिया घूमते।

द फैमिली मैन                                                     

चार्ल्स ने न जाने कितनी महिलाओं से संबंध बनाए होंगे! मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसने सैंटल डेस्नॉयर्स से शादी की थी, जिससे प्रैंक नाम का बेटा और मुरीएल अनौक नाम का बेटा हुआ था। बाद में उसने सेंटाल कॉम्पैग्नन से शादी की, जिसने मुंबई में रहते हुए अपने बेटी ऊषा शोभराज को जन्म दिया। बाद में नेपाल में निहिता बिस्वास नाम की उसकी गर्लफ्रेंड भी रही, जिसने बाद में उससे सगाई और शादी का दावा भी किया था।

बिकिनी किलर                                                      

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 70-80 के दशक में चार्ल्स ने 24 लोगों की हत्या की थी, जिनमें से अधिकतर फॉरेनर्स टूरिस्ट महिलाएं थी। इसके बाद भी उसने कई मर्डर किए। भारत में रहने के दौरान विदेशी महिला टूरिस्ट्स को चार्ल्स नशीली दवाएं देता था, उनसे प्रेम संबंध बनाता था और फिर उनकी हत्या कर देता था। खूबसूरत महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर उनकी हत्या करने के ट्रेंड के चलते उसे बिकिनी किलर बुलाया जाने लगा।

अब हुआ आजाद शोभराज                                      

दर्जनों हत्याओं का दोषी चार्ल्स शोभराज फ्रांस, थाइलैंड, भारत समेत 9 देशों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना था। भारत में वह 12 साल तक तिहाड़ जेल में रहा। हालांकि 1986 में एक बार यहां से भी भाग निकला था। फिर पकड़े जाने के बाद उसने सजा पूरी की। अंतिम बार 2003 में वो नेपाल में गिरफ्तार किया गया, जहां 19 साल से वो जेल में अपनी सजा काट रहा है। अब नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने उसकी रिहाई का आदेश दिया है।

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