Sunday, May 16, 2021
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संविदा कर्मियों की हड़ताल से हाहाकार

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  • इलाज को धक्के खा रहे तीमारदार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: संविदा के 183 स्वास्थ्य कर्मियों के एकाएक हड़ताल पर चले जाने की वजह से मेडिकल में कोविड समेत तमाम वार्डों में हाहाकार मचा हुआ है। कोविड वार्ड तो पूरी तरह से अवनी परिधि के संविदा कर्मियों के कंधे पर था। उनकी हड़ताल से हालात नाजुक बने हैं।

वहीं, दूसरी ओर संक्रमित मरीजों की बात की जाए तो उनका आने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। मरीजों को लेकर आने वाली एम्बुलेंस के सायरनों से 24 घंटे मेडिकल परिसर गूंजता रहता है। कई बार तो कई कई घंटे वेटिंग की करनी पड़ती है। कोविड वार्ड के बाहर खडे तीमारदार इलाज को लेकर स्टाफ पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

उनका कहना है कि संक्रमितों को न तो समय पर दवाएं दी जा रही हैं न ही सीनियर डाक्टर वार्ड के भीतर जा रहे हैं। केवल वार्ड ब्वॉय दवा थमाकर निकल जाते हैं। 24 घंटे की दवाएं एक साथ थमा दी जाती हैं। कोई देखने सुनने वाला नहीं। तीमारदारों ने मरीजों को दिए जाने वाले खाने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।

यह हालात पूरे दिन बने रहते हैं। संक्रमितों की यदि बात की जाए तो शहर ही नहीं देहात में भी, पिछडे ही नहीं वीआईपी इलाकों से भी संक्रमण के केसों की खबर बादस्तूर जारी है। संक्रमित मरीजों की तेजी से बढ़ रही संख्या मुसीबत बनी है। मेडिकल का कोविड वार्ड पूरी तरह से फुल हो चुका है।

मंगलवार शाम तक कोविड के पुराने वाले में 250 से ज्यादा संक्रमित भर्ती हो चुके थे। वहां कोई बेड खाली नहीं था। वहीं, दूसरी ओर आर्थो बेड में बनाए गए कोविड आइसोलेशन वार्ड में भी फिलहाल 16 मरीज भर्ती हैं। यहां गंभीर मरीजों के लिए मेडिकल प्रशासन ने कुछ बेड पर आॅक्सीजन सिलेंडर की भी व्यवस्था करायी है। प्रयास है कि हालात काबू में रहे।

मेडिकल के कोविड वार्ड के लिए स्टाफ के संकट के आसार

मेडिकल के कोविड वार्ड में स्टाफ ड्यूटी को लेकर अब संकट के आसार नजर आने लगे हैं। संविदा के 183 कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद हालात बिगड़ रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर हड़ताली कर्मचारियों ने मंगलवार को प्राचार्य कार्यालय पर जमकर हंगामा किया।

बड़ी संख्या में धरना में शामिल हुए। संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ के महामंत्री रजनीश भारद्वाज ने बताया कि जो कुछ बीमारों के साथ हो रहा है उसका सभी को दुख है, लेकिन उसके लिए आउटसोर्स स्टाफ जिम्मेदार नहीं। इसके लिए मेडिकल प्रशासन की हठधर्मिता जिम्मेदार है। संविदा कर्मचारी जायज मांगों के लिए अरसे से आंदोलन कर रहे हैं।

पिछले दिनों भी आंदोलन के दौरान जिला प्रशासन व मेडिकल प्रशासन के वादे पर हड़ताल खत्म कर सभी ड्यूटी पर आ गए थे, लेकिन प्रशासन ने अपना वादा पूरा नहीं किया। संविदा कर्मियों के साथ धोखा किया। महामारी काल में दूसरी कंपनी को ठेका दिए जाने पर भी सवाल उठाए। रंजनीश भारद्वाज ने कहा कि मांगों को लेकर शीघ्र ही सीएम से मिलेंगे।

बगैर ज्वाइनिंग लेटर के ड्यूटी चाहता मेडिकल प्रशासन

इस बार आउट सोर्स के लिए डिग्लस नाम की जिस कंपनी को ठेका दिया गया है, वो काम तो कराना चाहती है, लेकिन संविदा के जो पुराने लोग काम कर रहे हैं उनको न तो कोई ज्वाइनिंग लेटर दिया गया है न ही उन्हें मर्ज किया जा रहा है। रजनीश भारद्वाज का आरोप है कि सबसे बडे फसाद की जड़ पहले 20 हजार सेलरी मिलती थी। उसको घटा कर अब करीब 16 हजार कर दिया गया। इसके अलावा कोई रिस्क अलाउंस भी नहीं दिया जा रहा है। धरने पर बैठने वालों में अध्यक्ष शिव गौतम व उपाध्यक्ष प्रीति सक्सेना भी शामिल रहीं।

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