
आने वाले एक दो सालों में चैट जीपीटी की हकीकत सामने आ जाएगी। इसके पीछे 2016 की वह तकनीकी मंदी भी है, जहां सभी 10 बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई थी और स्टार्टअप के नाम पर जो पैसा बाजार में गया था, वह लौटने की कोई उम्मीद अब दिखाई नहीं दे रही है। तकनीक का बाजार जिस तरह से अब कमजोर पड़ने लगा है। इसमें आखिरकार आम इंसान की बलि चढ़ना लाजिमी है। आखिर, मुद्रा उत्पादन और मुद्रा पर कब्जे में कमजोर का दुष्चक्र से निकलना मुश्किल होता है। तकनीक की राजनीति को करीब से जानने, देखने, समझने और दुनिया पर उसके असर का आकलन करते हुए हमें कुछ जरूरी बातें ध्यान रखना चाहिए। इनमें सबसे बड़ी बात तो यही है कि मौजूदा तकनीकी दुनिया महज चंद लोगों की मुट्ठी में कैद है।