- बादल फटने से था जल प्रलय का भयंकर नजारा, मेरठ के कई लोग केदारनाथ में लापता
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: केदारनाथ में बादल फटने के बाद जल प्रलय का नजारा था। जो चपेट में आ गए वो कागज की नाव की मानिंद बहते चले गए। भारी बारिश और पहाड़ी से गिरते बडेÞ-बडेÞ पत्थरों के बीच वहां चीख-पुकार मची थी। बारिश ऐसी कि सब कुछ दिखाई देना बंद हो गया। कदम-कदम पर मौत से सामना। कई लोग शनिवार को लौटकर मेरठ में घर पहुंचे। उन्होंने जो कुछ बताया वो वाकई डरावना है। सबसे हैरान और परेशान करने वाली बात जो बच्चों युवाओं को लेकर पता चली है वो यह कि घर से तो निकले हरिद्वार से कांवड़ लेने जाने की बात कहकर और जा पहुंचे केदारनाथ जहां बादल फटने का हादसा हुआ। ऐसा करने वालों में दवा कारोबारी यश गुप्ता का बेटा व उसके दोस्त भी शामिल हैं।
संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता यश के सगे मामा हैं। उन्होंने बतायाकि शनिवार तड़के करीब चार बजे यश व उसके साथ गए कुछ अन्य घर पहुंचे। ये सभी हरिद्वार से कांवड़ लेकर आने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन ये केदारनाथ जा पहुंचेंगे, यह बात कभी परिजनों ने सोची तक नहीं थी। लगातार जब मोबाइल स्वीच आॅफ जाता रहा तो परिजनों को चिंता हुई। उसी दौरान यश की कॉल आयी और उसने बताया कि वो लोग केदारनाथ पहुंच गए थे। उनके साथी कुछ अभी भी वहीं फंसे हैं। वहां बादल फटा है। यह बात जब परिजनों को पता चली तो उनका दम खुशक हो गया। दो दिन उन पर दो सदी की तरह बीते। ये कहानी अकेले यश गुप्ता की नहीं है। उनके साथ गए मेरठ नमकीन वालों के परिवार के युवकों की भी ऐसी ही कहानी है।
यश ने बताया कि 31 जुलाई को रात करीब आठ बजे जिस समय बादल फटा वह उससे सात किलोमीटर दूर थे। पुलिस ने आगे जाने से रोक दिया। रात वहीं पर टेंट में बिताई। इसके बाद एक दिन में करीब 35 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए रस्से की सहायता से पर्वत और खाई पार कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे। इनके अलावा माधवपुरम का बंसल परिवार हालांकि वो भी लौट आए हैं। उन्हें भी रेस्क्यू किया गया। जयदेवी नगर के चार युवक केदारनाथ में सुरक्षित हैं। खरखौदा पांची के तीन युवक समेत मेरठ के करीब तीन दर्जन लोग पहाड़ी पर अलग-अलग जगह फंसे हुए हैं। ज्यादा की लोकेशन गौरीकुंड में मिल रही है।
ब्रह्मपुरी निवासी मोनू तो बादल फटने की घटना के बाद दहशत में वो मंजर याद कर अभी भी सिहर उठते हैं। खरखौदा थाना क्षेत्र के गांव पांची के सूरज साथी रोहित और गौरव, जयदेवी नगर के ही अंकित, जोनी और अज्जो हैं। ब्रह्मपुरी की सुधा तो बेहद डरी हुई हैं। उन्होंने बताया कि हमने भयावह मंजर देखा है, अभी पहाड़ों पर जाने का समय नहीं है। उन्हें भी रेस्क्यू टीम ने हमें रस्सियों से बचाकर निकाला। यहीं के मोनू शर्मा, पत्नी सुधा, बच्चे परी और पलक, रिठानी के तनुज शर्मा और उसका मित्र दीपक शर्मा भी फंस गए थे, लेकिन किसी तरह मेरठ पहुंच गए हैं। सभी की अपनी-अपनी कहानी हैं।

