- साक्षर भारत योजना बंद होने के बाद कोविड-19 कोआॅर्डिनेटर के रूप में काम कर रहे कार्यालय प्रभारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: 15 वर्ष से ऊपर आयु वर्ग को शिक्षा के लिए प्रेरित करने और उन्हें साक्षर करने के लिए बनाए गए लोक शिक्षा समिति विभाग ने इस दिशा में मार्च 2018 तक साक्षर भारत योजना के अंतर्गत काम किया है। उस समय से इस विभाग के पास करने के लिए कोई काम नहीं रह गया है।
ऐसे में प्रशासन ने समिति के कार्यालय प्रभारी को कोविड-19 कोआॅर्डिनेटर की भूमिका सौंपी हुई है। इसके अलावा वे प्रेरकों की ओर से अपने मानदेय के लिए दायर किए गए वाद की पैरवी में अपना अधिकतर समय हाईकोर्ट आने-जाने में व्यतीत कर रहे हैं।
लोक शिक्षा समिति और इसका इतिहास दो दशक से अधिक पुराना है। 21वीं सदी के आरंभ से विभाग स्वयं सेवकों की मदद से 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के शिक्षा से वंचित लोगों को साक्षर करने और प्रेरित करने में अपनी भूमिका निभाता चला आया है। वर्ष 2013 में साक्षर भारत योजना इसी विभाग के माध्यम से चलाई गई। जिसमें दो-दो हजार रुपये के मानदेय पर हर गांव में एक महिला और एक पुरुष को प्रेरक के रूप में नियुक्त किया गया।

ग्राम प्रधान और स्कूल के प्रधानाध्यापक की देखरेख में इन प्रेरकों को 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को शिक्षा का महत्व बताने, उन्हें प्रेरित करने साथ ही साक्षर करने का काम सौंपा गया। इस अभियान का लाभ मुख्य रूप से निरक्षर महिलाओं को मिला, जो साक्षर होकर अपना नाम लिखने और थोड़ा बहुत पढ़ने के काबिल हो गर्इं। इस दौरान स्थिति यह बनती चली गई कि विभाग के पास प्रेरकों को देने के लिए दो-दो हजार रुपये तक की व्यवस्था नहीं हो सकी।
जिसको लेकर एक संगठन बनाते हुए प्रेरकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। वहीं विभाग ने 2018 में साक्षर भारत योजना को बंद कर दिया। जिसके बाद लोक शिक्षा समिति विभाग के पास कोई काम नहीं रह गया। ऐसे में जिला स्तर पर तैनात कार्यालय प्रभारी के जिम्मे मुख्य काम यही रह गया कि वे हाईकोर्ट में विभाग के खिलाफ प्रेरकों की ओर से दायर याचिका में पैरवी करते रहें।
इसी बीच वैश्विक महामारी कोविड-19 का प्रकोप हर तरफ शुरू हुआ। जिसको देखते हुए उच्चाधिकारियों ने लोक शिक्षा समिति के कार्यालय प्रभारी को कोविड-19 कोआॅर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंप दी। तब से लेकर आज तक कार्यालय प्रभारी स्वास्थ्य विभाग और कोविड-19 से प्रभावित रोगियों के बीच समन्वयक की भूमिका निभाते आ रहे हैं। इस संबंध में लोक शिक्षा समिति के कार्यालय प्रभारी लक्ष्मण सिंह का कहना है कि 2018 के बाद से मेरठ जनपद के प्रेरक प्रशासन के लिए स्वयं सेवक की भूमिका में रहकर काम करते रहे हैं।
स्वच्छता, जागरूकता से लेकर सर्वे के काम में उनका योगदान रहा है। जिसकी एवज में संबंधित विभाग से मानदेय भी मिलता रहा है। विभाग के लिए प्रेरक के रूप में काम करने की एवज में मानदेय संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी करके उनकी ओर से मुख्यालय को भेजी जा चुकी हैं।
आठ सितंबर से चलेगा नव साक्षर भारत अभियान!
लोक शिक्षा समिति के कार्यालय प्रभारी लक्ष्मण सिंह का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस आठ सितंबर से नव साक्षर भात अभियान चलाया जा सकता है। इस संबंध में विभाग के स्तर से मिले संकेत के आधार पर तैयारियां की जा रही हैं। मेरठ जनपद में 2018 तक कार्य करने वाले प्रेरकों के नामों की सूची और उनके मोबाइल नंबर भी सूचीबद्ध करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नव साक्षर भारत योजना लागू होने के बाद विभाग अपने काम बेहतर ढंग से अंजाम देने में लगा जाएगा।

