- अस्पतालों से निकल रहा कूड़ा-करकट और कचरा
- बिना जांच पड़ताल के विभाग द्वारा जारी कर दी जाती है एनओसी
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: महानगर में प्रदूषण पर रोकथाम आखिर क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय कब करेगा। महानगर में लगातार प्रदूषण का प्रकोप बढ़ रहा है और लोगों को बीमारी आगोश में ले रही है, लेकिन विभाग के अधिकारी अनदेखा करने में लगे हुए हैं। अस्पतालों से कूड़ा-करकट और कचरा बड़ी तादाद में निकलता है। बिना जांच पड़ताल के विभाग द्वारा इन्हे एनओसी जारी कर दी जाती है। आज तक किसी भी अस्पताल के विरुद्ध प्रदूषण विभाग द्वारा कोई भी कार्रवाई अमल में नही ला गई है। बार-बार इन अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए स्थानीय लोग मुखर हो चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी विभाग के अधिकारी अनजान बने हुए हैं।
इस पूरे प्रकरण से ऐसा लगता है कि प्रदूषण विभाग के ही नाक के नीचे प्रदूषण के प्रकोप को बढ़ाया जा रहा है। महानगर में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते प्रकोप के साथ-साथ प्रदूषण भी बढ़ रहा है। महानगर में बेगमपुल, कैंट हॉस्पिटल, गंगानगर, जयभीमनगर, थापरनगर के अलावा पल्लवपुरम में प्रदूषण को मापने के लिए विभाग द्वारा एक्यूमेंट लगाए जाते हैं। हालांकि विभाग द्वारा अधिकारिक तौर पर गंगानगर, जयभीमनगर और पल्लवपुरम में ही एक्यूमेंट लगा रखे है। इन स्थानों पर लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है।
महानगर में प्रदूषण बढ़ने के कई कारण प्रकाश में आए है। अंधाधुंध तरीके से चलने वाले हॉट मिक्स प्लांट, गन्ने के कोल्हू के साथ-साथ खटारा वाहनों का प्रकोप प्रदूषण में इजाफा करता है, लेकिन सबसे कारगार मुद्दा प्रकाश में आया है कि महानगर में एक हजार से अधिक अस्पताल है। इन अस्पतालों का कूड़ा-करकट एवं कचरा अस्पतालों का बाहर फेंक दिया जाता है। इसके कारण प्रदूषण में कई गुना इजाफा होता है। यह बढ़ता प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इस बढ़ते प्रदूषण से लोग मौत और जिंदगी के मुआयने पर जूझ रहे है, लेकिन प्रदूषण विभाग की उदासीनता ने इस प्रकोप को बढ़ा रखा है। आज तक ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध विभाग द्वारा कोई भी कार्रवाई नही हुई है। बल्कि विभाग द्वारा अस्पतालों को सिर्फ क्लीन चिट दे दी जाती है।
कागजों में आज तक दर्ज नही है कोई भी कार्रवाई
देहात क्षेत्र में प्रदूषण विभाग के अनुसार 100 से अधिक अस्पताल है। न्यू मेरठ के नाम से मशहूर मोदीपुरम में भी लगभग 20 से अधिक अस्पताल है। महानगर में अस्पतालों के अलावा पैथोलॉजी लैब मोहल्ले क्लीनिक और घरों में बैठे प्राइवेट चिकित्सक शामिल है, लेकिन आज तक भी प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने इनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की है। ना ही प्रदूषण विभाग के रिकार्ड में कोई भी कार्रवाई दर्ज है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि प्रदूषण को बढ़ावा देने में प्रदूषण विभाग के अधिकारी ही लगे हुए है।
आखिर कैसे जारी हो जाती है एनओसी?
अस्पतालों को चलाने के लिए प्रदूषण विभाग द्वारा एनओसी जारी की जाती है। यह एनओसी तभी जारी होगी। जब अस्पताल संचालक द्वारा मानक के अनुसार नियम पूरे किए जाएंगे, लेकिन आज तक भी विभाग ने एक भी ऐसे अस्पताल को एनओसी जारी करने से इंकार नही किया है। सभी अस्पतालों के मानक पूरे कागजों में दिखाकर एनओसी जारी कर दी जाती है।

