
जनसंख्या विस्फोट का जिक्र और इसके जिक्र में फिक्र, बचपन से हमने ही नहीं, देश के हर उम्र के थोड़ी भी सामान्य जानकारी रखने वाले हर नागरिक ने देखी सुनी है। सुनने में आ रहा है कि हमने इस मोर्चे पर चीन को पीछे छोड़ दिया है या जल्दी ही पछाड़ने वाले हैं। भीड़भाड़, प्रदूषण, ट्रैफिक जाम, बेरोजगारी, बीमारी, अपराध, संसाधनों पर दबाव से लेकर देश की हर समस्या का ठीकरा हम भारी जनसंख्या पर फोड़ सकते हैं या फोड़ते है। अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ यह ठीकरा फोड़ने की सुविधा आमजन और बुद्धिजीवियों से लेकर शासन प्रशासन तक देश में हर किसी को है। हमें यह भीड़ पसंद नहीं आती और यह भीड़ हम ही हैं, हम से है। इन समस्याओं के लिए जनसंख्या दोषी है, पर इस भारी भरकम जनसंख्या के लिए कौन दोषी है? वह भी इस परम्परा और संस्कारों पर गर्व करने वाले संयमी देश में!