- बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर संजीदा हैं चिकित्साधिकारी
जनवाणी ब्यूरो |
सहारनपुर: बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर स्वास्थ्य विभाग संजीदा है। खासकर इस मौसम में मिजल्स (खसरा) और रूबेला जैसी गंभीर बीमारी से निपटने को पूरी तैयारी की गई है। मीजल्स-रूबेला (एमआर) से निपटने के लिए सभी बच्चों को मुफ्त में एमआर का टीका लगया जा रहा है। इससे वायरस के दुष्परिणाम से बचा जा सकता है।
बता दें कि पोलियो मुक्त भारत की तरह अब खसरा मुक्त भारत के लिए भी कार्यक्रम चल रहा है। इसी को लेकर चिकित्सा अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें मीजल्स-रूबेला से बचाव, प्रबंधन, निगरानी व उपचार को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डा. सुनील वर्मा ने बताया-मीजल्स-रुबेला गंभीर और जानलेवा बीमारी होती है। इसका वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर में पाया जाता है, लेकिन इसकी रोकथाम टीकाकरण के जरिए की जा सकती है।
लगभग 95 फीसदी तक एमआर का टीकाकरण होने से खसरा मुक्त भारत का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। यह वैक्सीन बच्चों को खसरा,रूबेला रोग से बचाती है। खसरे का टीका देश में काफी सालों से उपलब्ध है। इसके बावजूद खसरा छोटे बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
यह सबसे अधिक संक्रामक बीमारियों में से एक है। खसरा पैरामायोक्सोवाइरस परिवार के एक वायरस के कारण तेजी से फैलने वाली एक घातक बीमारी है। खसरे के लक्षण कई बार इतने सामान्य होते हैं कि यह बीमारी पकड़ में ही नहीं आती है।
खासतौर पर बच्चों में इस बीमारी के लक्षणों की पहचान कर पाना कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है। इस बीमारी के लक्षण फौरन पकड़ में नहीं आते। वायरस के हमले के करीब दो से तीन हफ्ते बाद ही इस बीमारी की पहचान संभव हो पाती है। इसके लक्षण दो से तीन दिन तक रहते हैं।
कैसे करें खसरे की पहचान:
डा. सुनील वर्मा ने बताया -खसरा किसी भी परिवार में फैल सकता है। कफ, कोराईजा और कन्जक्टिवाइटिस मुख्य रूप से इसकी पहचान होते हैं। मुंह में तालु पर सफेद धब्बे भी नजर आते हैं। यह संक्रामक बीमारी है और संक्रमित व्यक्ति के मुंह और नाक से बहते द्रव के सीधे या व्यक्ति के संपर्क क्षेत्र में आने से होत है।
वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संजीव मांगलिक ने बताया-मीजिल्स-रूबेला की रोकथाम के लिए निगरानी,जांच, रिपोर्टिंग, उपचार व फॉलो अप सबसे महत्वपूर्ण है। खसरा अत्याधिक संक्रामक होता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से यह बीमारी फैलती है।
इसमें निमोनिया, डायरिया व दीमागी बुखार होने की आशंका होती है। चेहरे पर गुलाबी-लाल चकत्ते, तेज बुखार, खांसी,नाक बहना व आंखें लाल होना इस बीमारी के लक्षण हैं।
रूबेला का संक्रमण गर्भावस्था के दौरान होने पर संक्रमित माता से जन्मे शिशु को आंखों से संबंधित बीमारी, बहरापन, मंद बुद्धि व दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। रूबेला से गर्भपात समयपूर्व प्रसव व गर्भ में बच्चें की मौत होने की भी आशंका रहती है।

