- गंगानगर इलाके में कोरोना विस्फोट, 17 संक्रमण मिलने से हड़कंप
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना की रफ्तार में एकाएक तेजी आ गयी है। रविवार को संक्रमण के 91 नए केस मिले हैं। कोरोना अपडेट जारी करते हुए सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जिला सर्विलांस टीमों ने शहर के अलग-अलग इलाकों से लेकर सैंपल टेस्ट के लिए मेडिकल की माइक्रोबॉयलोजी लैब भेजे गए, इनमें से 91 सैंपल संक्रमित पाए गए हैं। जो संक्रमित मिले हैं उन्हें कोविड-19 आइसोलेशन व कुछ को होम क्वारंटाइन किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की सविलांस टीमें लगातार संक्रमितों की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग में लगी हैं। संक्रमितों में बड़ी संख्या कामकाजी घरेलू महिलाओं, शिक्षक, छात्र, कैदी, मजदूर, किसान, कारोबारी आदि की भी है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे भी केस मिले हैं, जो नए हैं पूर्व के किसी कॉन्टेक्ट में नहीं हैं।
नए केसों का मिलना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गंभीर मानकर चल रहे हैं। इसके अलावा एक बार फिर से एक ही परिवारों में एक से ज्यादा केसों का मिलना भी शुरू हो गया है। कई परिवारों में संक्रमण की चेन बननी शुरू हो गयी है।
विवि कुलसचिव हुए कोरोना पॉजिटिव
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलसचिव डीके वर्मा कोरोना पॉजिटिव पाए गए। जिसके बाद विवि में अफरा-तफरी मच गई है। यह जानकारी देते हुए कंट्रोल रूम प्रभारी डा. मेघराज सिंह ने बताया कि सोमवार को विश्वविद्यालय में कोविड-19 के टेस्ट कराए जाएंगे। चौधरी चरण सिंह विवि व संबंधित कॉलेजों में 10 अप्रैल से यूजी में पीजी की वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं।
विवि कुलसचिव के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद परिसर में तो अफरा-तफरी का माहौल है। वहीं, दूसरी ओर परीक्षाओं को लेकर भी छात्र-छात्राएं परेशान हो गए हैं। मेरठ कॉलेज और केवी पंजाब लाइन में भी शिक्षिका पॉजिटिव पाई गई है।
बेखौफ आयोजित किए जा रहे बड़े कार्यक्रम
कोरोना के खिलाफ मोदी और योगी सरकार की कोशिशों को पलीता लगाने वालों में होड़ मची है। स्वास्थ्य विभाग सीएमओ व प्रशासन के कमिश्नर व डीएम सरीखे अफसर चींख-चींखकर सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क पर जोर दे रहे हैं, ताकि शहर को कोरोना के खूनी पंजे से बचाया जा सके, लेकिन जो खुद को सोसाइटी में समझदार व जिम्मेदार साबित करते नहीं अघाते, कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सबसे ज्यादा पलीता ऐसे ही लोग लगा रहे हैं।
केस-1
मेरठ कॉलेज के चुनावों को लेकर अजय अग्रवाल व रामकुमार गुप्ता पैनल की मीडिया मीट में चुनाव में उतरने वाले तमाम प्रत्याशी व समर्थक मौजूद थे। इनमें से कई सत्ताधारी भाजपा में पदाधिकारी व दूसरे पदों पर हैं, लेकिन ये सभी सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क को लेकर पूरी तरह लापरवाह नजर आए। इतना ही नहीं इस मौके पर जो अन्य पहुंचे थे वो भी कोरोना के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करते नजर आए।
केस-2
श्रीरामलीला कमेटी छावनी की आमसभा जिसमें पवन गर्ग अध्यक्ष, गणेश अग्रवाल महामंत्री, विजय कोषाध्यक्ष व राजीव मित्तल मुख्य संयोजक बनाए में, भी कोरोना के खिलाफ चल रही मोदी योगी सरकार की कोशिशों को पलीता लगाने में कोई भी पीछे नहीं था। यहां भी न तो सोशल डिस्टेंसिंग थी और न ही मास्क।
केस-3
हापुड़ रोड बुद्धा गार्डन कालोनी में सपा के शहर विधायक रफीक अंसारी, निगम कार्यकारिणी के पूर्व उपाध्यक्ष कुंवर इकरामुद्दीन बालियान व कई अन्य पार्षद तथा सपा के पदाधिकारी चुनाव की तैयारियों पर चर्चा को जमा हुए थे, लेकिन यहां भी किसी भी एक ने न तो मास्क लगाया था और सोशल डिस्टेंसिंग की बात तो भूल ही जाओ।
केस-4
अन्य दलों के नेताओं के संगठन में शामिल होने के मौके पर कांग्रेस की ओर से मंगल पांडे नगर में आयोजन किया गया था, लेकिन यहां भी सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार नजर आयी। कुछ ने मास्क लगाए थे, लेकिन मुंह व नाक को ढकने के बजाय ये मास्क गले में हार की तरह पहना हुआ था।
ये कहना है सीएमओ का
सीएमओ डा. अखिलेश मोहन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कोई कमी नहीं रख रहा है, लेकिन कोरोना से जंग तभी जीती जा सकती है जब सभी लोग साथ दें। लड़ाई को कमजोर न किया जाए।
ये कहना है प्राचार्य का
मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि कोरोना की सेकेंड वेव की गंभीरता को लेकर जो लापरवाही यहां नजर आ रही है, वह बेहद डराने वाली है। जब सोसाइटी के समझदार लोग ही लापरवाही बरतेंगे तो फिर कैसे कोरोना हारेगा।

