- सूर्य की तल्ख किरणों और भीषण गर्मी से डालियों से टूटकर नीचे गिर रहा छोटा कच्चा आम, प्रभावित होगा उत्पादन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सूर्य की तल्ख किरणों और भीषण गर्मी के चलते आम की फसल को इस बार मोटा नुकसान पहुंच रहा है। अचानक बढ़े पारे ने बौर झुलसा दिया है। पेड़ की डालियों से कच्चे आम टूटकर जमीन पर गिरने लगा है। इससे आम उत्पादकों के चहरे से खुशी गायब है। उद्यान और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश नहीं हुई, तो इस बार आम उत्पादन में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट आएगी।
उद्यान विभाग ने अलर्ट जारी कर आम उत्पादकों को बागों की जल्द सिंचाई करने की सलाह दी है। जिले में कई हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर आम की बागवानी की जाती है। सबसे अधिक गांवों में आम की बागवानी की जा रही है। हर साल बड़े पैमाने पर कई देशों को आम का निर्यात किया जाता है। वहीं, लंगड़े और दशहरी आम का भी लोगों में खासा क्रेज है।
इस बार बौर को देखते हुए उम्मीद की जा रही थी कि आम उत्पादन बीते वर्षों से बेहतर होगा, लेकिन समय से पहले आई गर्मी ने आम उत्पादकों की मुश्किल बढ़ा दी है। अचानक पारा बढ़ने से आम का बौर झुलसने लगा है। आम सूख कर पेड़ की डाली से नीचे गिरने लगा है।
आम उत्पादक किसान हमीद ने बताया कि इस बार जिले में आम की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन बढ़ते तापमान ने आम उत्पादकों को चिंता में डाल दिया है। यदि बारिश नहीं होती है, तो आम उत्पादन में 15 से 15 फीसदी तक की गिरावट आएगी। इससे आम कारोबार को भी झटका लगेगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार समय से पहले ही भीषण गर्मी पड़ रही है।
भीषण गर्मी के चलते आम का बौर झुलस रहा है। जिसके चलते डालियो से छोटा कच्चा आम टूटकर गिर रहा है। इससे बचाव के लिए सिंचाई करें और उद्यान विभाग के विशेषज्ञों से सुझाव लें। वहीं, आम के उत्पादन में गिरावट आने से करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित होगा।
फिलहाल सूरज की तल्खी को देख आम उत्पादकों के चेहरे से खुशी गायब है। इस बीच अचानक बढ़ते पारे के चलते उद्यान विभाग ने अलर्ट जारी कर आम उत्पादकों को बागों की जल्द सिंचाई करने के प्रति जागरूक किया है। बागों में नमी का स्तर बने रहने से सूरज की तल्खी का असर आम उत्पादन पर कम पड़ेगा। जिला उद्यान अधिकारी गमपाल सिंह का कहना है कि किसान को अपने बाग में 15-15 दिन पर सिंचाई करनी चाहिए। इससे सूरज की गर्मी का असर आम उत्पादन पर कम पड़ेगा।
पानी की कमी से गिरने लगा फल
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बौर के बाद अब छोटे-छोटे आम बनने लगे हैं। सूरज की तल्खी और गर्म हवा के कारण आम के पौधे में पानी की मात्रा कम होने से फल गिरना शुरू हो गया है। इससे उत्पादन में गिरावट आ सकती है। आम को गिरने से बचाने व उसके विकास में सहयोग के लिए किसानों का समय समय पर सिंचाई जरूरी है। जिला उद्यान के अधिकारी भी मानते हैं कि गर्मी के चलते चैंपा बनने से गूदा कम बनेगा। लिहाजा आम का साइज छोटा रहेगा। वहीं, बाग की जल्द-जल्द सिंचाई करके आम की फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
मौसम में बदलाव का दौर शुरू, जल्द होगी बारिश
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि मंगलवार से मौसम की चाल बदली नजर आ रही है। हवा का रुख बदला है। पछुआ हवा के स्थान पर पुरवाई हवा शुरू हो गई है। आने वाले कुछ दिनों में हल्की बारिश की संभावना जताई जा रही है। इस समय बारिश होती है तो आम उत्पादन के लिए अच्छा रहेगा।
क्या कहते हैं एक्सपोर्टर
इस बार जिले में आम की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन बढ़ते तापमान ने आम उत्पादकों को चिंता में डाल दिया है। यदि बारिश नहीं होती है, तो आम उत्पादन में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट आएगी। इससे आम कारोबार को भी झटका लगेगा।

