जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों को तुरंत हटाने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता ने दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों को हटाने के लिए शाहीन बाग मामले का उल्लेख किया।
इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा, कानून-व्यवस्था के मामले में कोई मिसाल नहीं दी जा सकती है। वहीं, सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र और पंजाब-हरियाणा की राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। इस मामले पर अगली सुनवाई कल होगी।
After the counsel appearing for petitioner mentions Shaheen Bagh case to remove farmers from Delhi borders, Chief Justice of India says, there cannot be a precedent in law and order matter https://t.co/J51ZcIQVeq
— ANI (@ANI) December 16, 2020
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की खंडपीठ ने किसान संगठनों को पक्षकार बनाने की अनुमति दी।
A Bench of Chief Justice SA Bobde and Justices AS Bopanna and V Ramasubramanian grants permission to implead farmer organisations. The matter will be heard in the Supreme Court tomorrow. https://t.co/eWtZjY9rjd
— ANI (@ANI) December 16, 2020
अदालत ने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कहा है कि वह इस मुद्दे को हल करने के लिए भारत में किसान यूनियनों के प्रतिनिधि, सरकार और अन्य हितधारकों सहित एक समिति गठित करें। साथ ही कहा कि यह जल्द ही एक राष्ट्रीय मुद्दा बन जाएगा और सरकार के जरिए यह सुलझता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

