Thursday, March 19, 2026
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रजिस्ट्रार का पत्र…सदस्यता पर सवाल?

  • गांधी आश्रम की करोड़ों की सम्पत्ति बेचने का है मामला

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक माह पहले डिप्टी रजिस्टार ने गांधी आश्रम की सम्पत्ति को खुर्द-बुर्द करने वालों की सदस्यता खत्म करने के आदेश दिये थे। इसका एक पत्र आयोग के निदेशक के पास पहुंचा था। इस पत्र के आधार पर समिति के सदस्यों की सदस्यता खत्म नहीं की जा रही हैं। करोड़ों की सम्पत्ति पर कुछ लोगों की निगाहें लगी हुई हैं।

इसको लेकर कभी नीलामी की जाती हैं, कभी लीज डीड कर दी जाती हैं। चार करोड़ रुपये गांधी आश्रम समिति के पक्ष में भी लीज करने पर ले लिये गए। आखिर इसकी अनुमति समिति को किसने दी? जो जमीन दान में गांधी आश्रम को मिली, उस जमीन को कैसे बेचा जा सकता हैं। सम्पत्ति को खुर्द-बुर्द करने वालों के नाम भी सामने आ चुके हैं, फिर भी उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं?

गांधी आश्रम की जमीन करोड़ों की हैं। शहर के बीच में स्थित हैं, जिसके चलते कुछ लोग जमीन को कब्जाने की फिराक में हैं। कुछ लोगों का प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को खादी ग्रामोद्योग आयोग के डायरेक्टर से मिला। डायरेक्टर को दिए ज्ञापन में कहा गया कि दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने व उनकी सदस्यता समाप्त करने की कारवाई करने की मांग की। कई वर्षों से संस्था क्षेत्रीय गांधी आश्रम अवैधानिक कार्य, संस्था की बहुमूल्य करोड़ों की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने में जुटा हुआ है।

गांधी आश्रम के कैंप कार्यालय की प्रबंध समिति की मीटिंग में आचार्य जीबी कृपलानी के नाम से कन्या विद्यालय निर्माण के संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करना, गलत तरीके से डीकेएस शिक्षा प्रसार समिति का गठन करके साधारण गस्ती प्रस्ताव बनाया गया। इस समिति का गठन 2014 में किया गया। उस समिति में गांधी आश्रम कैंप लखनऊ व क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम मेरठ के पदाधिकारी समिति के सदस्य व्यक्तिगत रूप से बने गांधी आश्रम का रंगाई विभाग 30 वर्ष 11 माह की लीज पर में मैसर्स रेणुका इंटरप्राइजेज असौड़ा हाउस वेस्टर्न कचहरी रोड को दिया गया।

इस मद में 5 करोड़ की धनराशि संस्था में जमा कराई गई, जिसकी लीज डीड और सप्लीमेंट्री लीज डीड पृथ्वी सिंह रावत व संजीव कुमार द्वारा कराई गई। यह कार्य पृथ्वी सिंह रावत के पत्र के आधार पर गांधी आश्रम मार्ग संस्था मेरठ कैंप लखनऊ में अपने 15 मार्च 2021 के मीटिंग प्रस्ताव द्वारा किया गया। ये अनाधिकृत लीज थी, विधिवत नहीं। इसमें विधिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इस मामले में 12 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 के तहत मुकदमा लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में दर्ज किया गया था।

यही नहीं, रंगाई विभाग की ध्वस्त की गई बिल्डिंग को भी प्रशासन ने रुकवाया था, लेकिन आज तक इनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई। संस्था की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के लिए प्रयासरत हैं। यह भी बता दे, कि तत्कालीन कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने लंबित मामले में कार्रवाई के आदेश दिए थे तथा जिन लोगों ने जमीन को संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास किया उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए भी लिखा था।

डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म सोसायटी ने भी सदस्यता समाप्त करने के लिए डायरेक्टर को लिखा। महेश चंद पंत ने डायरेक्टर को दिए पत्र में मांग की है कि दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा उनकी सदस्यता समाप्त की जाए। संस्था के फंड के दुरुपयोग की वसूली की भी मांग उन्होंने की है। इस प्रकरण में आयोग के निदेशक ने कार्रवाई करने का आश्वासन दिया हैं। जल्द इसमें रिजल्ट मिलेगा, ऐसा कहा हैं।

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