- पिछले साल के मुताबिक इस साल स्टांप, रजिस्ट्री में देखी जा रही है बढ़ोतरी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देश में पिछले दो साल से कोरोना के कारण सिर्फ निजी व्यापार ही आहत नहीं हुआ है। बल्कि सरकारी आमदनी में भी भारी गिरावट देखने क ो मिली थी। देश में लॉकडाउन के कारण सरकार का खर्च तो हुआ है, लेकिन आमदनी का स्तर भी गिरता दिखाई दिया था। वहीं, रजिस्ट्री विभाग में भी कोरोना काल में कार्य ठप पड़ गया था।
कचहरी स्थित स्टांप आॅफिस में रजिस्ट्री कराने वाले लोगों की संख्या पिछले साल न के बराबर ही रही। कोरोना से लगे आघात से लोग अभी तक उभर नहीं सके हैं। वहीं, ऐसे में लोगों की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर थी। जिसके चलते कचहरी में रजिस्ट्री कराने वाले लोग भी नहीं पहुंच रहे थे, लेकिन इस साल रजिस्ट्री में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालांकि अभी वित्तीय वर्ष खत्म नहीं हुआ है।
बता दें कि पिछले साल कचहरी के रजिस्ट्री विभाग में 2020-21 में सेल डीड 28097 थी, जोकि पिछले साल नवंबर तक की हैं। इस साल नवंबर तक की सेल डीड 41850 हो चुकी हैं। वहीं, स्टांप भी पिछले साल नवंबर तक 263 करोड़ 28 लाख पहुंचा था। वहीं, इस साल नवंबर तक स्टांप 455 करोड़ 85 लाख हो चुका है। देखा जा रहा है कि इस बार वित्तीय वर्ष खत्म होने तक सरकार को अच्छा मुनाफा हो सकता है।
बता दें कि सेल डीड एक टॉक्यूमेंट होता है, जो नाम, अधिकार और मालिक के बदलने का एक सरकारी प्रमाण होता है। यह बेहद ही महत्वपूर्ण होता है जो कि संपत्ति बेचने और खरीदने वाले के बीच हुए सौदे को दर्शाता है। ऐसे में यदि यह कागजात मौजूद नहीं होते हैं सौदे को अमान्य ही माना जाएगा। कोई भी जमीन, घर या संपत्ति जब तक मान्य नहीं होती है जब तक सेल डीड के द्वारा न बेची गई हो। यह सिर्फ तब ही हस्ताक्षरित की जाती है, जब दोनों पक्ष नियम व शर्तों से मंजूर होते हैं।

