- देनी होगी चुकता भुगतान पर बैंक की ब्याज दर भी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आवास विकास परिषद के खिलाफ उत्तर प्रदेश भू संपदा विनियामक प्राधिकरण लखनऊ में एक याचिका विकास कुमार ने दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि उन्हें जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित आवास पर कब्जा नहीं मिल रहा है, जिसको लेकर शिकायतकर्ता ने कहा था कि 24 लाख रुपये आवास विकास परिषद को चुकता भुगतान किया जा चुका हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें 20 सितंबर 2021 तक कब्जा मिल जाना चाहिए था, लेकिन नहीं मिला।
इसका आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने लिखित में उन्हें दिया भी था। हालांकि कागज पर कब्जा हस्तांतरण प्रमाण पत्र दे दिया गया, परंतु शिकायतकर्ता उसमें रह नहीं पा रहे हंै। उधर, रेरा ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आवास विकास परिषद पर एक लाख का जुर्माना लगा दिया हैं तथा कहा कि जब से आवंटी की पूरी धनराशि जमा हैं, तब से पूरी धनराशि पर ब्याज लगाकर बैंक के अनुसार आवंटी को रुपया दिया जाए। यह पूरा जुर्माना ही कहा जाएगा।
आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने कहा कि किसानों द्वारा मौके पर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। किसानों की समस्या का समाधान आवास विकास परिषद के अधिकारी नहीं कर पा रहे हैं। इसको लेकर अधिकारियों को भी शिकायतें की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसको लेकर विकास कुमार ने क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए रेरा में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता विकास कुमार का आरोप है कि केवल भवन का मौके पर ढांचा खड़ा हुआ है।
वास्तविक कब्जा अभी तक उन्हें नहीं दिया गया है और उसकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है। इसमें शिकायतकर्ता जब भवन पर शेष निर्माण कार्य कराने पहुंचा, तब किसानों ने उन्हें रोक दिया और उसका विरोध किया। किसान भूमि का प्रतिकार बढ़ाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए शिकायतकर्ता उक्त भवन पर वास्तविक कब्जा प्राप्त नहीं कर सके। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आवास विकास के अधिकारियों को पत्र भेजने के बाद भी उनको भौतिक कब्जा नहीं दिया गया।
लंबे समय से जागृति विहार एक्सटेंशन के किसानों की समस्या का कोई समाधान नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते मूल आवंटियों को मकानों पर और प्लाटों पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है। याचिका पर शिकायतकर्ता की सुनवाई करते हुएआवास विकास परिषद को यह आदेश दिया गया है कि 45 दिन के भीतर क्षतिपूर्ति के रूप में एक लाख की राशि अदा की जाए। आवास विकास परिषद को यह भी निर्देश दिया गया कि मात्र एक लाख पर पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने की तिथि 21 सितंबर 2021 से वास्तविक कब्जा प्रदान किए जाने तक के लिए भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज की धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में अदा की जाए।
उक्त ब्याज की धनराशि अतिरिक्त क्षतिपूर्ति की धनराशि होगी। आवास विकास परिषद द्वारा निर्धारित अवधि में भुगतान न करने पर अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत वसूली की कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित अवधि के बाद भी भुगतान न होने पर इसी ब्याज दर पर एक लाख पर शिकायतकर्ता वास्तविक भुगतान होने तक क्षतिपूर्ति धनराशि एक लाख पर ब्याज भी पाने का अधिकारी होगा। रेरा के इस आदेश से हड़कंप मच गया हैं। आवास विकास परिषद के अधिकारी इसमें कुछ भी नहीं बोल रहे हैं।
एमडीए वीसी ने इंजीनियरों की लगाई क्लास
मेरठ: अवैध निर्मार्णों को लेकर मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय पहले दिन से ही गंभीर है। उन्होंने इंजीनियरों की मीटिंग लेकर चेता दिया था कि अवैध निर्माण उनके कार्यकाल में नहीं होने चाहिए। बावजूद इसके निर्माण होने की शिकायत प्राधिकरण उपाध्यक्ष को मिल रही थी। इसी को लेकर प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने शुक्रवार को प्रवर्तन में तैनात इंजीनियरों की बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने साफ कर दिया कि अवैध निर्मार्णों पर लगाम लगाई जाए।
उनके कार्यकाल में जो अवैध निर्माण चल रहे हैं। उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। क्योंकि अवैध निर्माण से मेरठ विकास प्राधिकरण को किसी तरह का राजस्व नहीं मिल रहा है, जो अवैध निर्माण कर रहा है या तो उसकी बिल्डिंग कंपाउंडिंग की जाए या फिर ध्वस्तीकरण किया जाए। इसी को लेकर उन्होंने कहा कि जो मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए लोग पहुंचते हैं। उसमें जनता को किसी तरह का समस्या का सामना नहीं करना पड़े,
इसलिए मानचित्र में देरी नहीं लगनी चाहिए। आम जनता जैसे ही मानचित्र स्वीकृत के लिए फाइल प्राधिकरण में लगाए, तभी उसका 15 से 30 दिन के भीतर मानचित्र स्वीकृत हो जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने प्रत्येक जोन से कंपाउंडिंग के रूप में राजस्व प्राप्त करने की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कंपाउंडिंग का राजस्व बढ़ा, जिसके बाद ही प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

