
लोकतंत्र का आशय है कि लोगों की सरकार हो। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई बार बहुमत की चुनाव प्रणाली में हर निर्वाचित जनप्रतिनिधि को लोगों का सच्चा जनादेश प्राप्त नहीं होता है। अगर लोगों को अपना जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार है, तो उन्हें जनप्रतिनिधियों के कर्तव्य पालन में विफल रहने पर हटाने का भी अधिकार मिलना चाहिए। जनप्रतिनिधित्व कानून-1951 केवल कुछ अपराधों के मामले में जनप्रतिनिधियों को हटाने की मंजूरी देता है और उनकी सामान्य अक्षमता और मतदाताओं की नाराजगी को उन्हें हटाने का कारण नहीं मानता, इसलिए राइट टू रिकॉल को अब पूरे देश में लागू करना बहुत जरूरी हो जाता है। राइट टू रिकॉल जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार की प्रक्रिया का प्रतिरूप है। यह ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए मतदाता चुने हुए प्रतिनिधियों को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले प्रत्यक्ष मतदान के जरिए हटा सकते हैं।