Sunday, May 3, 2026
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बारिश के सामने सड़कें बेदम, जिम्मेदार कौन?

मेरठ की सड़कों की सच्चाई आपको दिखाने के लिए ‘जनवाणी’ फोटो जर्नलिस्ट ने जो तस्वीर कैमरे में कैद की हैं, वो आपको दिखा रहे हैं। सड़कों की वीवीआईपी इलाके की सड़कों की हालत भी कितनी खराब हो गई हैं। सर्किट हाउस के मुख्य गेट से जैसे ही विक्टोरियां पार्क की तरफ को आप चलेंगे तो सड़क ऐसी किसी गांव में भी नहीं होगी। वहां सड़क इतनी खराब हो गई है कि पैदल भी निकलना मुश्किल हैं। यहां वाहन भी फंस रहे हैं। तस्वीर नगरायुक्त के आवास के पास बने गड्ढों की भी देखिये, जो नगरायुक्त को भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। इनको कब गड्ढा मुक्त किया जाएगा? क्या यहीं शहर का विकास मॉडल हैं? बात स्मार्ट सिटी के दावे की होती हैं, लेकिन धरातल पर सड़कों की हालत कैसे ही ये तस्वीर उजागर कर रही हैं। क्या इस तरह से शहर स्मार्ट बन पाएगा? जनप्रतिनिधियों को बात कम, बल्कि विकास पर फोकस करना होगा, तभी शहर की दशा सुधर सकती हैं।

  • ढाई करोड़ से तैयार हुई सड़क की चमक हुई खत्म, गहरे गड्ढे एमडीए की छवि कर रहे खराब

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने गंगानगर से अब्दुल्लापुर को जोड़ने वाली डिवाइडर रोड तैयार की थी। इस डिवाइडर रोड पर करीब ढाई करोड़ रुपये प्राधिकरण ने खर्च किए थे। तब तो यह रोड चमक गई थी, लेकिन अब यह रोड टूटकर चमक रही है तो ढाई करोड़ सड़क पर खर्च किए पहली बारिश में ही ये सड़क नहीं टिक पाई। इस तरह से मेरठ विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई रोड खराब दशा में पहुंच गई है।

सड़क में अब्दुल्लापुर से ठीक आधा किलोमीटर पहले गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिनको प्राधिकरण ने भरने तक की पहल नहीं की है। यदि इसी तरह से गड्ढों में वाहन दौड़ते रहे तो सड़क और भी ज्यादा खराब हो जाएगी, जिसके बाद धीरे-धीरे पूरी सड़क क्षतिग्रस्त हो सकती है। इस बात को मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारी भी जानते हैं, मगर फिर भी टूटी सड़क की तरफ से आंखें मूंदे हुए हैं।

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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह चुके हैं कि 15 नवंबर तक प्रदेशभर की टूटी सड़कों के गड्ढे भरे जाए, लेकिन अभी तक टूटी सड़कों के गड्ढों को भरने की पहल मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से नहीं की गई है। इस तरह से देखा जाए तो 2.50 करोड़ से तैयार की गई ये सड़क जिसकी गुणवत्ता की प्राधिकरण इंजीनियर दुहाई देते नहीं थकते थे, वह पहली बारिश भी ठीक से नहीं झेल पाई, जिसके चलते सड़क की जो चमक थी, वह खत्म हो गई। यही नहीं, डिवाइडर भी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गया है। उसकी भी मरम्मत करने की पहल प्राधिकरण की तरफ से नहीं की गई है।

नगरायुक्त कैंप आॅफिस के पास भी सड़कों में गड्ढे

कमिश्नरी आॅफिस चौराहे पर नगर आयुक्त का कैंप आॅफिस है। यहां से पांच कदम की दूरी पर सड़क क्षतिग्रस्त है। पांच कदम जब एसएसपी आॅफिस की तरफ चलते हैं तो फिर से सड़क में गहरे गड्ढे हो गए हैं। यह हालात तो वीवीआईपी रोड के हो गए हैं, जहां से प्रतिदिन कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे. और डीएम दीपक मीणा समेत तमाम अधिकारियों का यही से आवागमन होता हैं, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत तक नहीं कराई गई है।

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वैसे दावा नगर निगम सड़कों के गड्ढे भरने का कर रही है। बता दें कि कलक्ट्रेट और डीएम आवास के चारों तरफ जो सड़क डिवाइडर लगाकर तैयार की गई है, उस सड़क का निर्माण मेरठ विकास प्राधिकरण के द्वारा किया गया था। प्राधिकरण ने उस दौरान सड़क निर्माण पर करीब पांच से आठ करोड़ रुपये डिवाइडर और सड़क के निर्माण पर खर्च किए थे, लेकिन वर्तमान में नहीं तो प्राधिकरण खराब सड़क को देख रहा है और नहीं मरम्मत करा रहा है।

नगर निगम इस सड़क के लिए एमडीए को पत्र लिखता है तो एमडीए के अधिकारी नगर निगम को सड़क तैयार कर सुपुर्द करने की बात करते हैं। नगर निगम नगर आयुक्त का चंद कदम की दूरी पर आवास भी है। उनका भी आवागमन यहांसे होता है, लेकिन नगर आयुक्त भी वीवीआईपी रोड को भी गड्ढे मुक्त नहीं कर पा रहे हैं। बाकी शहर की आम गलियों के हालात कैसे होंगे, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता हैं।

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