- एंटी करप्शन टीम ने 7500 रुपये की नकदी लेते रंगेहाथ दबोचा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एंटी करप्शन की टीम ने मंगलवार की सुबह आरटीओ आॅफिस में छापेमारी की। यहां एंटी करप्शन की टीम सीनियर क्लर्क मुंशीलाल को 7500 रुपये नकद लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि मोहम्मद अफजाल नामक व्यक्ति से ई-रिक्शा पंजीकरण करने के नाम पर रिश्वत की मांग की जा रही थी। इस दौरान एंटी करप्शन की टीम में इंस्पेक्टर अशोक शर्मा और एसआई अमृतपाल ने कार्रवाई शुरू की।
सबसे पहले एंटी करप्शन की टीम डीएम दीपक मीणा के पास पहुंची और वहां से दो मजिस्ट्रेट की मौजूद में अपनी कार्रवाई की। रिश्वत नहीं देने पर ई-रिक्शा का पंजीकरण नहीं किया तो था परेशान किया जा रहा था। ई-रिक्शा का पंजीकरण भी नहीं किया। एंटी करप्शन की टीम आरटीओ के क्लर्क मुंशीलाल को गिरफ्तार कर नौचंदी थाने ले गई, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया हैं।
उधर, एंटी करप्शन की इस कार्रवाई के बाद आरटीओ में हड़कंप मच गया। आरटीओ कार्यालय सुनसान हो गया। बताया गया कि नौ सितंबर को मोहम्मद अफजाल नामक व्यक्ति ने डीएम को लिखित शिकायत की थी, जिसमें कहा था कि आरटीओ के क्लर्क मुंशीलाल ई-रिक्शा पंजीकरण करने के लिए पैसों की मांग कर रहे हैं, इसलिए यह मामला डीएम से एंटी करप्शन को भेजने की भी मांग की गई थी।
इसी बीच मंगलवार को पूरी तैयारी के साथ एंटी करप्शन की टीम आरटीओ आॅफिस में पहुंच गई थी तथा कार्रवाई को अंजाम दिया। जब सीनियर क्लर्क मुंशीलाल अपने केबिन में बैठे हुए थे, तभी एंटी करप्शन की टीम जैसे ही वहां पहुंची तभी अफजाल नामक व्यक्ति ने 7500 रुपये मुंशीलाल के हाथ में थमा दिये।

मुंशीलाल कुछ समझ पाते इससे पहले ही एंटी करप्शन की टीम ने उसे दबोच लिया और हाथ में थामे गए रुपयों को वहीं पर सील कर दिया। यह कार्रवाई करीब आधे घंटे तक चली। इसके बाद एंटी करप्शन की टीम आरोपी क्लार्क को हिरासत में लेकर नौचंदी थाने पहुंच गई। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान इंस्पेक्टर नौचंदी मय टीम के मौजूद रहे।
शिकायतकर्ता मोहम्मद अफजाल पुत्र अहमद फतेहउल्लापुर रोड अहमदनगर लिसाड़ी गेट का रहने वाला है। उसका आरोप है कि ई-रिक्शा हिंद सर्विस पर फाइनेंस किए गए तीन ई-रिक्शा के पंजीकरण करने के बदले में 7500 सौ रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। इसी सूचना पर एंटी करप्शन की टीम ने मुंशीलाल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
आरटीओ आॅफिस में भ्रष्टाचार पर उठ रही अंगुलियां
आरटीओ में क्लर्क मुंशीलाल के घूसखोरी में पकड़े जाने के बाद यह तो साफ हो गया है कि आरटीओ आॅफिस में भ्रष्टाचार चरम पर है। कई सरकार आई और चली गई, लेकिन आरटीओ आॅफिस में भ्रष्टाचार बंद नहीं हुआ। दलाल राज भी चल रहा है और आॅफिस में भ्रष्टाचार पर बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार खत्म करने के नारे के साथ ही प्रदेश की सत्ता तक पहुंची और जनता ने उन्हें भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश देने के वादे के अनुसार दूसरी बार सत्ता तक पहुंचाया, लेकिन भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
सीनियर क्लर्क मुंशीलाल के भ्रष्टाचार में पकड़े जाने के बाद आरटीओ में क्या हो रहा है। इसकी स्पष्ट कलई खुल गई है, जिस समय आरटीओ में एंटी करप्शन की रेड हुई उस दौरान आरटीओ और एआरटीओ भी मौजूद थे। हालांकि पिछले दिनों एआरटीओ बीमार हो गए थे, जिसके चलते कुछ व्यवस्थाएं आरटीओ आफिस में बिगड़ी है।
भ्रष्टाचार पर कैसे लगाम लगेगी? इसको लेकर आरटीओ को कदम उठाने होंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि आरटीओ में सब कुछ आॅनलाइन हो गया है, फिर भ्रष्टाचार को कैसे बढ़ावा मिल रहा है? यह भी बड़ा सवाल है आखिर इस पर कैसे अंकुश लगेगा?
पंजीकरण की शिकायत, काम दूसरी सीट का
शिकायतकर्ता अफजाल का कहना है कि क्लर्क मुंशीलाल से ई-रिक्शा के पंजीकरण कराने के लिए पहुंचे थे, मगर महत्वपूर्ण बात यह है कि मुंशीलाल जिस सीट पर तैनात है, वहां पर ई-रिक्शा का पंजीकरण ही नहीं होता। ई-रिक्शा का पंजीकरण क्लर्क सुभाष की सीट पर होता है, लेकिन पिछले एक माह से सुभाष छुट्टी पर चल रहे हैं।
फिर मुंशीलाल की घेराबंदी ही करने के लिए ई-रिक्शा पंजीकरण का ही नाम शिकायतकर्ता ने क्यों लिया? यह भी जांच का विषय है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि मुंशीलाल और शिकायतकर्ता अफजाल के बीच कोई विवाद हुआ और उसके बाद यह शिकायत की गई ।
अफजाल भी करता है आरटीओ की दलाली
शिकायतकर्ता अफजाल भ्रष्टाचार से तंग था। ऐसा कहा जा रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अफजाल की आरटीओ आॅफिस के पास एक दुकान है, जिसमें अफजाल का आॅफिस है। यह आॅफिस आरटीओ के पास क्यों बनाया गया है? इस आॅफिस से क्या काम किए जाते हैं? यह सब जग जाहिर है। क्योंकि अफजाल के आॅफिस में भी वही सब काम होते हैं जो बाकी दलाल आरटीओ आॅफिस के काम करते हैं।

यह आज आरटीओ आफिस में इस पर हर व्यक्ति के मुंह पर चर्चा थी। कहा जा रहा है कि अफजाल भी आरटीओ आफिस में दलाली का काम करता है। आरटीओ के अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए अफजाल ने क्लर्क मुंशीलाल को अपना निशाना बनाया। इसके बाद आरटीओ के अफसरों पर दबाव आसानी से बनाया जा सकता है।

