- सैफपुर-कर्मचंदपुर में लगता है जोड़ मेला, देश-विदेश से आते हैं हजारों श्रद्धालु
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: हिंदू, जैन और सिख धर्म का समावेश संजाये ऐतिहासिक तीर्थ नगरी हस्तिनापुर सिख धर्म की प्रमुख तीर्थ स्थली में से एक है। सैकड़ों वर्ष पूर्व धर्म नगरी से चंद किमी की दूरी पर स्थित गांव के लाल भाई धर्म सिंह जी ने खालसा पंथ की सृजना के समय अपना शीश भेंटकर क्षेत्र का नाम देश विदेशों में भी रोशन कर दिया। उनके जन्म स्थान सैफपुर कर्मचंदपुर में बैसाखी व धार्मिक आयोजन आयोजित होने वाले जोड़ मेले में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु जन्म स्थली पर मत्था टेक धर्मलाभ अर्जित करते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि को भले ही दोपद्री ने शाप दिया हो, लेकिन प्रचीन नगरी में वीरता की कहानी उससे भी ज्यादा लिखी गई है। हस्तिनानुर से तीन किमी दक्षिण दिशा में स्थित सैफपुर-कर्मचंदपुर गांव आज भी विश्व प्रसिद्ध है। यूं तो देश की रक्षा के लिए हस्तिनापुर में कई शहीदों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये, लेकिन 13 अपै्रल 1699 में आनंदपुर साहिब में सजे कीर्तन दरबार में खालसा पंथ की रखी गयी नींव में चुने गये पंजप्यारों में सैफपुर निवासी भाई धर्म सिंह दूसरे पंजप्यारे के रूप में अपने प्राण न्यौछावर किये थे।

पंजप्यारों में सर्वप्रथम लाहौर निवासी दया सिंह जी उठे जिन्हें गुरु साहिब द्वारा कीर्तन दरबार में पीछे टेंट में ले जाया गया। उसके बाद गुरु साहिब जी ने दरबार में आकर एक और बहादुर को आवाज दी। इस पर सैफपुर निवासी भाई धर्म सिह जी ने गुरु साहिब के सामने शीश भेंटकर दिया। इसके बाद भाई मोहकम सिंह द्वारिका भाई हिम्मत सिंह कनटिका तथा साहिब सिंह जी विधर ने अपने शीश गुरु साहिब को न्यौछावर कर दिये।
लगभग दो दशक पूर्व की गई थी पवित्र स्थान की खोज
अमृतसर दरबार साहिब के मुख्य ग्रंथी व अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी पूर्ण सिंह ने नवम्बर 1998 में पंजप्यारे भाई धर्म सिंह जी के जन्म स्थान की खोज की थी। क्षेत्रवासियों के सहयोग से इस स्थान को विकसित करने के लिए दो फरवरी 2000 को यहां कारसेवा वाले बाबा हरवंश सिंह और पंजप्यारा भाई धर्म सिह जी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष बाबा जोगेन्द्र सिंह समेत समस्त कमेटी की देखरेख में यहां भव्य पंजप्यारा भाई धर्म सिंह जी का भव्य गुरुद्वारा साहिब निर्माण किया गया।
बैसाखी के दिन की गई थी सरोवर साहिब की स्थापना
2004 में 13 अपै्रल को बैसाखी वाले दिन हजारों श्रद्धालुओं के साथ निकली कीर्तन द्वारा पंजाब प्रांत के अमृतसर स्वर्ण मंदिर सरोवर छरहटा साहिब, गोविंद दयाल, तरन तारण रामसर साहिब दिल्ली व हरिद्वार से गंगा समेत कई धार्मिक स्थानों से जल लाकर यहां भव्य सरोवर साहिब की स्थापना की गयी।
बैसाखी के दिन आयोजित होता है भव्य जोड़ मेला
गुरुद्वारा और सरोवर साहिब की स्थापना के बाद पंजप्यारे भाई धर्मसिंह की जन्म स्थली सैफपुर कर्मचंदपुर में हर माह में पड़ने वाली अमावस्या के साथ बैसाखी के पावन पर्व पर आज भी ऐतिहासिक जोड़ मेले का आयोजन किया जाता है। जन्म स्थली पर आयोजित होने वाले इस मेले में देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालु पवित्र सरोवर साहिब में स्नान कर ग्रंथ साहिब पर मत्था टेकते हैं।
प्रगटिओ खालसा परमात्म की मौज सौ अमृत गुरु ते पाया
खालसा पंथ की सृजना बैसाखी की खुशी में और नवम गुरु श्री गुरुतेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व को समर्पित श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रचार सोसाइटी द्वारा गुरु पंथ एवं गुरु ग्रंथ सप्ताह के अन्तर्गत बुधवार को अलौकिक शबद कीर्तन फेरी निकाली गई। शबद-कीर्तन फेरी गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा थापरनगर से प्रारंभ हो कर सोती गंज गलियों, सोतीगंज बाजार, दिल्ली रोड, थापरनगर गली नंबर सात, गली नंबर दो से होती हुई उक्त गुरुद्वारे में वापस आई।

फेरी का संचालन मुख्य ग्रंथी ज्ञानी चरनप्रीत सिंह, सहायक ग्रंथी भाई किशनपाल सिंह, हरविन्द्र सिंह पुनीत और जसप्रीत सिंह कर रहे थे। अलौकिक शबद-कीर्तन फेरी में पंज निशान साहिब लिए गुरु के सिख चल रहे थे और ध्वनि यंत्र वाहन के पीछे सिख संगत, स्त्री संगत, अखंड निष्काम कीर्तनी जत्थे प्रगटिओ खालसा परमात्म की मौज सौ अमृत गुरु ते पाया, ऐसा सति गुरु जो मिले तिसनो सिर सओपिये, वाह-वाह गोबिंद सिंह आप गुरुचेला आदि शबदों का गायन विभिन्न वाद्यय यंत्रों के साथ करते चल रहे थे।

शब्द-कीर्तन फेरी से पूर्व सोसाइटी के प्रमुख सेवादार रणजीत सिंह जस्सल ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की सृजना कर हमें सिंह बना दिया जिसे आज ह्यसिंह इज किंग कहा जाता है।
हरजीत दिवाना के गीतों पर थिरके श्रोता
पंजाबी आर्य सभा थापरनगर द्वारा पंजाब का प्रमुख सांस्कृतिक पर्व बैसाखी हर्षोल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम का आरंभ आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ से हुआ। जिसके यजमान अपर्णा और अरविंद रहे। मंत्री भानु बत्रा ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए बैसाखी पर्व की शुभकामनाएं दी। प्रसिद्ध पंजाबी लोकगायक हरजीत दिवाना एवं उनके ग्रुप ने पंजाबी गीतों एवं टप्पों से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उनके द्वारा प्रस्तुत गुरुदास मान के मस्ती भरे गीतों ने सभी के परों को थिरकने पर मजबूत कर दिया। फसलां दी मुक गई राखी, जट्टा आई बैसाखी का श्रोताओं ने भरपूर आनन्द लिया। प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. कंचन मलिक ने अपनी मधुर आवाज में गीत सुना अपनी गायन विद्या से आश्चर्य चकित कर दिया। आर्य भजनोपदेशक कुलदीप आर्य ने मेरी मां शेरों वाली है। भारत मां शेरों वाली है सुनाकर वातावरण को देशभक्ति के भावों से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर नवनिर्वाचित विधायक अमित अग्रवाल का अभिनंदन किया गया।
विधायक ने कहा कि वह समाज की उन्नति एवं विकास कार्यों के लिए सदैव उपलब्ध रहेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने सभी को बैसाखी पर्व की बधाई दी। सभा के प्रधान राजेश सेठी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब की महान संस्कृति उल्लास और उमंगों से परिपूर्ण हैं साथ ही पंजाबी जीवन में पुरुषार्थ करने में अग्रणी है। वहीं वह अपने धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र रक्षा के क्षेत्र में सदैव अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। पंजाब की वीर भूमि पर ही। गुरु गोविंद सिंह, बंदा वैरागी, शहीद भगत सिंह स्वामी श्रद्धानंद, रक्त साक्षी, पंडित लेखराम जैसे बलिदानी उत्पन्न किए हैं। बैसाखी का यह पावन पर्व हमें अपनी महान संस्कृति का स्मरण कराता है।

