- मार्च माह में मई-जून जैसी गर्मी का असर
- हवा का रुख शांत, भीषण गर्मी में हो रहा भारी इजाफा
- वेस्ट यूपी में गेहूं की खेती पर मौसम की मार, चढ़ा पारा, किसानों की उड़ी नींद
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है। मार्च के महीने में ही मई-जून जैसी गर्मी का असर दिखने लगा है। जिसके चलते दिन में तेज धूप के कारण गर्मी का असर बढ़ रहा है। हवाओं का रुख शांत होने के कारण गर्मी साफ दिखाई दे रही है। जिसके चलते लोगों को अभी से परेशानी महसूस होने लगी है।
जिस तरह से गर्मी पड़ रही है। उससे साफ जाहिर हो रहा है कि आने वाले दिनों में तापमान 40 पार पहुंचेगा और गर्मी इस बार लोगों को बेहाल कर देगी। मार्च के महीने में गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है। पहले हल्की हवाओं के चलते गर्मी कम हो गई थी, लेकिन अब हवाओं ने भी रफ्तार कम कर ली है।

जिसके चलते गर्मी का असर बढ़ गया है। राजकीय मौसम वैधशाला पर दिन का अधिकतम तापमान 33.0 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 16.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम आर्द्रता 88 एवं न्यूनतम आर्द्रता 48 प्रतिशत दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिक डा. उदय प्रताप शाही का कहना है कि गर्मी का रुख बढ़ेगा। जिसके चलते लोगों को परेशानी होगी।
गर्मी में बढ़ोतरी से जिले के किसान चिंतित
अभी मार्च का पहला पखवाड़ा ही चल रहा है, परंतु तेज धूप से तापमान बढ़कर अप्रैल, मई जैसी गर्मी का अहसास करा रहा है। गर्मी में अचानक हुई बढ़ोतरी का असर जिले में गेहूं की पैदावार पर पड़ेगा। कृषि विभाग भी इसकी पुष्टि कर रहा है। इस संभावना को देखते हुए जिले के एक लाख से अधिक किसान चिंता में पड़ गए हैं।
जिले के किसान गन्ने के अलावा मुख्यत: गेहूं और धान की फसल पैदा करते हैं। इस साल भी करीब एक लाख किसानों ने कई हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल बो रखी है, लेकिन इस बार समय से पहले बढ़े तापमान ने किसानों को चिंता में डाल दिया है। फिलहाल दिन के समय क्षेत्र में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। जबकि इतना तापमान आमतौर पर अप्रैल के अंत में या फिर मई के महीने में होता है।

किसान रकम सिंह, नकलीराम, जोगासिंह ने बताया कि अमूमन मार्च के अंतिम या अप्रैल के पहले सप्ताह में तापमान गर्म होता है। इसी गर्मी से गेहूं का दाना पकता है। इस बार तीन हफ्ते पहले ही गर्मी होने लगी है। किसान महक सिंह, गोरख सिंह, कुशलपाल, राजपाल सिंह ने बताया कि गर्मी के कारण गेहूं की फसल वक्त से पहले पक जाएगी, जिसका असर सीधे गेहूं की पैदावार पर पड़ेगा।
किसान राजसिंह, चंद्रपाल, जितेंद्र कुमार ने बताया कि समय से पहले गर्म हुए मौसम के कारण गेहूं की प्रति हेक्टेटर पैदावार में पचास प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इससे गेहूं के दाने की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि तापमान बढ़ना गेहूं के लिए नुकसानदायक है। इससे गेहूं की फसल समय से पहले पक सकती है। फसल पर इसका असर जरूर पड़ेगा, पर पैदावार किस हद तक प्रभावित होगी, इस बाबत अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है।
आसमान छूते तापमान में किसानों के फीके पड़ते अरमान
मौसम तेजी से गर्म हो रहा है। न्यूनतम तापमान 16.7 डिग्री और अधिकतम तापमान 33.0 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। वायुमंडल में नमी घटकर 40 फीसद रह गई है। मौसम का बदलाव गेहूं की फसल को प्रभावित कर सकता है। दुग्धावस्था में पहुंची बाली में दाना हल्का रह जाएगा। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। मौसम का परिवर्तन गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
वेस्ट यूपी में लगातार बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। तापमान के कारण गेहूं की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। सामान्य डिग्री से ऊपर पहुंचा तापमान फिलहाल राहत के मूंंड में न ही दिखाई दे रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह में जिस तरह से तापमान बढ़ा है। उससे गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के वैज्ञानिक डा. आरएस सेंगर का कहना है कि मार्च के महीने में जिस तरह से तापमान में तेजी के साथ बढ़ोतरी हो रही है। उससे गेहूं की फसल को बेहद नुकसान है। क्योकि बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए बेहद खतरनाक और खराब है। डा. सेंगर का कहना है कि वेस्ट यूपी में गेहूं की पैदावार बेहद अच्छी है, लेकिन मार्च के महीने में जिस तरह से गर्मी का रुख बढ़ रहा है।
उससे साफ जाहिर हो रहा है कि इस बार इस फसल को नुकसान होगी। जिसके चलते किसानों के चेहरे पर सिकन दिखाई दे रही है। इसलिए तापमान का गिरना बेहद जरूरी है। तापमान के गिरने से इस फसल की पैदावार में बढ़ोतरी होगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा।
फूल रही गेहूं की बाली
गेहूं की फसल 120 से 130 दिन में पक जाती है। फसल 100 दिन के करीब हो चुकी है। पौधों में बाली निकलने लगी है। दाना दुग्धावस्था में हैं। तापमान में अचानक बढ़ोतरी हो जाने से बाली में दाना हल्का रह जाएगा। पौधों की वृद्धि भी प्रभावित होगी। किसानों बताया कि गेहूं की बाली फूल रहीं हैं।
इन दिनों तापमान बढ़ता देख चिंता हो है। अगर ऐसे ही बना रहा तो इस बार गेहूं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर अमल किया जा रहा है। मार्च से तापमान बढ़ने लगा। यह चिंता का विषय है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह ली जाएगी।
बढ़ते तापमान से रुक जाती है गेहूं की बढ़वार
तापमान तेजी से बढ़ता है तो गेहंू की बढ़वार रुक जाती है। दाना छोटा हो जाता है गेहूं का उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस मौसम में हवा ज्यादा चलती है। इस कारण फसल गिर जाती है। बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए इसलिए नुकसान दायक होता है।
पिछले वर्ष 10 से 15 मार्च तक का तापमान
10 मार्च 23 डिग्री
11 मार्च 26 डिग्री
12 मार्च 28 डिग्री
13 मार्च 24 डिग्री
14 मार्च 26 डिग्री
15 मार्च 27.8 डिग्री
इस वर्ष का तापमान 10 से 15 मार्च का
10 29.5
11 29.0
12 30.1
13 31.6
14 32.1
15 33.0

