जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर के गली-मोहल्लों में बिना मान्यता के उम्मीद से अधिक निजी स्कूल चल रहे हैं। इसके लिए स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग पहले ही अधिसूचना जारी कर चुका है। सरकार द्वारा बनाई गई नियमावली के अनुसार, पहले से चल रहे स्कूलों को मान्यता के लिए छह माह का समय दिया गया था।
जबकि मान्यता नहीं लेने वाले निजी स्कूलों पर जुर्माना और कार्रवाई की भी बात कही गई थी। जिले के गली-कूचों में दर्जनों ऐसे स्कूल है जो किसी भी बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है। इसलिए शिक्षा विभाग में भी इनका कोई अस्तित्व ही नहीं है।
इनमें से अधिकतर स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूल होने के मापदंडों पर भी खरे नहीं उतर रहे है। अंग्रेजी माध्यम के नाम पर ये स्कूल अभिभावकों को आकर्षित करके चांदी कूट रहे हैं तो नाममात्र का वेतन देकर ये बेरोजगारों का शोषण कर रहे हैं। शिक्षा विभाग स्कूल के नाम पर चल रही ऐसी दुकानों पर अंकुश लगाने में असफल साबित हो रहा है।
शिक्षा माफियों ने पूरे जनपद में अपना नेटवर्क फैला रखा है। इसका ही नतीजा है कि जनपद में सैकड़ों की संख्या में फर्जी विद्यालय चल रहे हैं। जिनकी कोई मान्यता नहीं है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य भी अंधकार में है।
ऐसे स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए शासन ने कमर कस ली है और शिक्षाविभाग के अधिकारियों को बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों को चिहिन्त करने के आदेश भी जारी किए है। जांच के लिए शिक्षा विभाग की ओर से टीम गठित करने की कवायद चल रही है।
टीम जनपद में चल रहे बिना मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जांच कर उनके कागज चेक करेगी। ताकि स्कूलों का फर्जीवाड़ा सामने आ सके। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जनपद में करीब 200 विद्यालय ऐसे हैं जो अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं।
कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे स्कूल
कुकुरमुत्तों की तरह गली-गली चलने वाले दुकाननुमा इन स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले खुद शिक्षक प्राय: जूनियर हाईस्कूल से लेकर इंटर तक ही पढ़े होते हैं और उन्हें ढंग से पढ़ाने का तरीका कौन कहे व्याकरण एवं शब्दों तक का ज्ञान ढंग से नहीं होता है। गांव गलियों कस्बों और बाजारों में बिना मान्यता स्कूलों के खुलने का एक सिलसिला लगातार चल रहा है।
गांव गली मोहल्लों में खुलने वाले कुछ स्कूल तो चलते हैं तो कुछ साल दो चार साल बाद हो जाते हैं। इन बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों में ऐसा कोई नहीं है जो कि चोरी से चलता हो बल्कि सभी खुलेआम विभागीय शह के बिना नहीं चलते हैं। इन फर्जी स्कूलों को बंद कराने की मुहिम सरकार हर साल शिक्षा सत्र शुरू होने पर मौके पर कम कागजों पर अधिक चलाती है।
गली मोहल्लों में चल रहे बगैर मान्यता वाले स्कूल
बच्चों के साथ गली मोहल्लों में चल रहे स्कूलों में शिक्षा के नाम पर मजाक किया जा रहा है। क्योंकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की माने तो शहर समेत देहात में भी सैकड़ों की संख्या में बगैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को कक्षा एक से आठ तक संचालित किया जा रहा है।
उसके बाद विद्यार्थी किसी अन्य स्कूल से प्रवेश दिखाकर बोर्ड परीक्षा में शामिल करा दिया जाता है। जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश कुमार चौधरी का कहना है कि जिले में चल रहे फर्जी विद्यालयों की गत वर्ष भी जांच कराई गई थी,शासन की ओर से जारी किए गए निर्देश अभी प्राप्त नहीं हुए है। यदि ऐसा है तो जांच की जाएगी।

