जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार गुलाब देवी ने मंगलवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग की 100 दिवसीय कार्य योजना को गिनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की प्रेरणा से माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा 100 दिवस और आगामी 6 माह, 1, 2 एवं 5 वर्ष की कार्ययोजना बनायी गयी है। कार्ययोजना का लक्ष्य सभी विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर की शिक्षा जारी रखने के लिए समान अवसर सुनिश्चित करते हुए ज्ञान, कौशल और राष्ट्र प्रेम की भावना विकसित करने वाली गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसमें असेवित बस्तियों में विद्यालय उपलब्ध कराने, शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता बढ़ाने और सम-सामयिक बनाने पर बल दिया गया है।
गुलाब देवी ने कहा कि कार्ययोजना को तैयार करने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संस्तुतियों को प्रदेश में लागू करने के लिए बनाये गये रोडमैप और लोक कल्याण संकल्प पत्र-2022 के माध्यमिक विद्यालय नवीनीकरण मिशन के अन्तर्गत उल्लेख की गयीं प्राथमिकताओं का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह सर्वविदित है कि तकनीक के प्रयोग से ही अल्प प्रयास व अल्प समय में विषय के संबंध में पूरक जानकारी प्राप्त हो सकती है।
प्रदेश के विद्यार्थी राष्ट्रीय व वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफलता प्राप्त करने के लिए सक्षम हो सकेंगे। समुचित ज्ञान और तकनीकी कौशल के समन्वय से कैरियर और रोजगार की व्यापक सम्भावनाएं बढ़ेगी। इसको ध्यान में रखते हुए शैक्षिक सुशासन की गुणवत्ता बढाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही लाने हेतु प्रत्येक क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा और शैक्षिक तकनीकी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रयास किये गये हैं।
माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में कौन से विद्यालय कहाँ स्थित है, किस बस्ती के नजदीक कितने विद्यालय हैं एवं नया विद्यालय बनाने के लिए उचित स्थान क्या है, इत्यादि की जानकारी-प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सभी विद्यालयों की मैंपिग कर दी गयी है और एक वेब पोर्टल विकसित किया गया है, जिसका नाम पहॅुच रखा गया है। उन्होंने बताया कि कक्षा-10 तथा कक्षा-12 की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद बच्चों को अपने भावी जीवन के लिए क्या-क्या विकल्प उपलब्ध है, के संबंध में बच्चों की सहायता के लिए कैरियर गाइडेंस पोर्टल पंख को विकसित किया गया है।
इस पोर्टल पर विद्यार्थियों को उनकी आकांक्षाओं, रूचि और रुझान से मेल खाने वाले विभिन्न करियर पथ का चयन करने और उन्हें कालेज, छात्रवृत्ति, कौशल विकास कार्यक्रम, इंटर्नशिप और शिक्षा के विषय में उपलब्ध विकल्पों के बारे में बेहतर सलाह मिल सकेगी।वॉछित करियर के विषय में विस्तृत जानकारी होने से चुनाव में सुगमता तथा सफलता के अवसर में वृद्धि होगी। सम्प्रति राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए निशुल्क व्यवस्था की गयी है।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश के असेवित क्षेत्रों में अच्छी गुणवत्ता की वहनीय शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 39 नवीन हाईस्कूल और 14 नवीन इण्टर कालेज का निर्माण प्रारम्भ किया जा रहा है। इन राजकीय हाईस्कूलों की स्थापना से प्रतिवर्ष लगभग 6,240 और राजकीय इंटर कॉलेजों की स्थापना से लगभग 2240 छात्र-छात्राओं को अध्ययन की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति का अनुश्रवण करने के लिए लक्षित सभी 2273 राजकीय विद्यालयों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस डिवाइस स्थापित की गयी है।
वहीं असेवित क्षेत्रों में माध्यमिक शिक्षा सुलभ कराने के लिए 84 नवीन राजकीय इण्टर कालेजों का निर्माण करके संचालन प्रारम्भ किया गया है। इन विद्यालयों के संचालन से प्रतिवर्ष लगभग 46,200 छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापरक वहनीय माध्यमिक स्तर की शिक्षा सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि शैक्षिक दृष्टि से पिछडे व सुदूरवर्ती क्षेत्र में रहने वाली वंचित समूह की लगभग 6500 छात्राओं को प्रतिवर्ष निःशुल्क आवासीय शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 65 बालिका छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है।
इससे बालिकाओं के ड्रॉप आउट में कमी होगी और उनकी माध्यमिक स्तर की शिक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। प्रेस वार्ता के समय अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला, विशेष सचिव वेदपति मिश्रा एवं शम्भू कुमार, निदेशक सरिता तिवारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

