Tuesday, March 31, 2026
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ईश्वर की सेवा

Amritvani


एक बार कैलाश पर्वत पर भगवान शिव जी को ध्यान में भी मन्द-मन्द मुस्कुराते देख पार्वती जी ने पूछा, स्वामी, मैंने आपको पहली बार समाधि में मुस्कुराते हुए देखा है इसका क्या कारण है? शिव जी ने उन्हें बताया कि मृत्युलोक में मेरा एक अनन्य भक्त है जो कि मेरे ही एक मंदिर में पुजारी है और दिन रात मेरी सेवा में लगा रहता है। उसकी पत्नी ने आज उसे ताना मारते हुए कहा कि जिन भोले शंकर से तुम दिन रात मेरे लिए घर मांगते रहते हो, उनके पास तो खुद घर नहीं है वे तो खुद कैलाश पर्वत पर रहते हैं।

यही बात सुनकर मैं मुस्कुरा रहा था। पार्वती जी ने दुखी होकर कहा, स्वामी वह आपकी निंदा का रही है और आप मुस्करा रहे हैं? इस पर शिव जी ने कहा, ये सभी प्राणी पिछले जन्म के साथ ही इस जन्म के कार्मो का फल भोग रहे हैं। यह ब्राह्मण पिछले जन्म में एक सूदखोर साहुकार था, जिसने कई लोगों के घर जमीन को हड़पा था। उसी ब्याज के पैसे का उपयोग उसकी पत्नी भी किया करती थी।

इसी कारण आज इस जन्म में इन्हे घर नहीं मिल सकता और इसकी पत्नी भी उसके कर्मों में भागीदार रही है। यही विधि का विधान है। पार्वती जी ने कहा, यह तो ठीक है। पर उसकी पत्नी जो आपकी निंदा कर रही है उसका क्या? तब शिव जी ने कहा, संसार में जैसे-जैसे कलयुग का समय निकट आता जाएगा। मनुष्य भगवान की भक्ति करने के स्थान पर उनकी निन्दा करने लगेगा यह सृष्टि के आरम्भ में ही लिखा जा चुका है। जो व्यक्ति इस कठिन समय में मेरी सेवा करता रहेगा, उसको इस मृत्युलोक से मुक्ति मिल जाएगी।

प्रस्तुति: राजेंद्र कुमार शर्मा


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