- 20 लाख की आबादी को मच्छरों से बचाने को मात्र चार आईएफडब्लू, कैसे निपटेंगे
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बरसात का सीजन ऐसे में मच्छरों का पनपना सभी को पता है। महानगर का हर क्षेत्र जलमग्न हुआ। कुछ क्षेत्रों में गलियों में अब भी जल जमाव है। गड्ढों में पानी भरा है। अब नगर में डेंगू और मलेरिया के मच्छरों की फौज तैयार होने का खतरा खड़ा हो गया है। महानगर की करीब 20 लाख की आबादी में मच्छर मारने का जिम्मा नगर मलेरिया विभाग के मात्र चार आईएफडब्लू कर्मचारियों के कंधे पर है।
विभाग के पास मच्छर मारने की दवाइयां तो पर्याप्त मात्रा में हैं, कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में कितने मच्छर मारे जाएंगे इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। हालांकि नगर निगम भी मच्छर मार दवाइयों की फॉगिंग कराता है, लेकिन नगर निगम के कर्मचारी कितनी गंभीरता से यह कार्य करते हैं, जग जाहिर है। इसलिए लोगों को खुद ही मच्छर मारने के इंतजाम करने पड़ेंगे।
पिछले एक सप्ताह से यहां बारिश हो रही है। रोजाना कभी रिमझिम बारिश होती है। बारिश से नगर के अधिकांश क्षेत्रों में जलभराव की समस्या गंभीर हो रही है, इसके अलावा जगह-जगह गंदगी और कीचड़ ने नगर में नरक जैसी स्थिति कर दी है। गंदगी और गड्ढों व खाली पड़े प्लॉटों में जलभराव है। पुराने शहर के गली मोहल्लों से लेकर बाहरी क्षेत्र की बस्तियों और कालोनियों में भी जगह जगह पानी इकट्ठा होने के कारण मच्छर पनपने लगे हैं। ऐसे में महानगर में डेंगू और मलेरिया समेत अनेक संचारी रोग फैलने का खतरा खड़ा हो गया है।
नगर मलेरिया विभाग में मच्छर मार दवा का छिड़काव और फॉगिंग करने के लिए कर्मचारियों का टोटा है। 25 लाख से अधिक की आबादी में मच्छर मार दवाई का स्प्रे और फॉगिंग करने का जिम्मा मात्र चार आईएफडब्लू कर्मचारियों पर है। इनमें भी एक आईएफडब्लू अक्सर सीएमओ आफिस में ड्यूटी देता है और एक कर्मचारी अक्सर एडी हेल्थ के कार्यालय में सेवाएं देता है। इमरजेंसी में ही इन कर्मचारियों को बुलाया जाता है।
मलेरिया विभाग में दवाइयां तो पर्याप्त मात्रा में आ गई हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल करने वाले कर्मचारी का टोटा है। इन हालात में मच्छर कैसे मारे जाएंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। नगर निगम अपने स्तर से फॉगिंग कराता है, लेकिन यह विभाग इस कार्य में कितनी गंभीरता दिखाता है, यह सबको पता है। लोगों को मच्छर मारने के लिए खुद की व्यवस्था करनी पड़ेगी।
वर्षांे से चली आ रही स्टाफ की कमी: डा. जितेन्द्र
मलेरिया विभाग में वर्षाें से स्टाफ की कमी है। चार आईएफडब्लू हैं। अब नगर निगम पर निर्भर हैं। मलेरिया विभाग कहीं से मच्छर पनपने की या डेंगू व मलेरिया फैलने की सूचना पर ही उनकी टीम पहुंचकर उक्त क्षेत्र में एंटी लार्वा का छिड़काव करती है और फॉगिंग करती है। विभाग से आउट सोर्सेस से कर्मचारियों की मांग की गई। शीघ्र मिलने की उम्मीद है।
ये दवा है उपलब्ध
- फॉगिंग के लिए टैमीफोस 700 लीटर
- फॉगिंग के लिए मैलाथाइनोल 200 किलो
- एंटी लार्वा स्प्रे के लिए वैक्टीसाइड 700 लीटर

