
केंद्र सरकार के वन यथा पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत नेश्नलसेंतर फॉर कॉस्टल रिसर्च(एनसीसीआर) की एक ताजातरीन रिपोर्ट चेतावनी दे रही है कि देश की समुद्री सीमा कटाव और अन्य कारणों केचलते सिकुड़ रही है और यह कई गंभीर पर्यावरणीय, सामाजिक और आजीविका के संकटों की जननी है। अकेले तमिलनाडु के कुल समुद्र किनारों का कोई 42.7 हिस्सा संकुचन का शिकार हो चुका है। हालांकि कोई 235. 85 किलोमीटर की तट रेखा का विस्तार भी हुआ है। जब समुद्र के किनारे कटते हैं, तो उसके किनारे रहने वाले मछुआरों, किसानों और बस्तियों पर अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाता है। सबसे चिंता की बात यह है कि समुद्र से जहां नदियों का मिलन हो रहा है, वहां कटाव अधिक है और इससे नदियों की पहले से खराब सेहत और बिगड़ सकती है।