बच्चों का अपना-अपना स्वभाव होता है। कुछ बच्चे संकोची प्रवृत्ति के होते हैं। यानि उन्हें लोगों से घुलने-मिलने में परेशानी आती है। ऐसे में यदि आपका बच्चा भी संकोच करता है तो चलिए हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं कुछ खास टिप्स। जिससे बच्चे को संकोच दूर होगा। साथ वह आसानी से दूसरों से मिलनसार बनेगा।
आरती रानी
आपको बता दें यदि बच्चा संकोची है। मिलनसार नहीं है। तो ऐसे में आपको उसे डांटना नहीं है। क्योंकि आपके ये तो बच्चे का स्वभाव है। यानि ये उसकी प्रकृति है। जिसे आपको सामंजस्य बिठाने में समय लगेगा। अगर आप ज्यादा बच्चे को डांटते हैं तो ये पैनिक हो सकता है। चलिए जानते हैं कि बच्चो को सोशल बनाने के लिए क्या करना चाहिए।
सवाल पूछने के लिए प्रेरित करें
अगर आपका बच्चा संकोची है तो इसके लिए तो आपको सबसे पहले अपने बच्चों में सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना है। यानि उसे इस बात के लिए मोटिवेट करना है कि वह अपने माइंड को एक्टिवेट करने के लिए सवाल पूछने की आदत डाले। इससे उसके मन की झिझक दूर होगी। साथ ही किसी सवाल को लेकर उसका डाउट भी क्लीयर होगा।
कम उम्र से ही बनाएं सोशल
आपको बच्चों को कम उम्र से ही सोशल बनना सिखाना होगा। आज के समय में सिंगल फैमिली का चलन बढ़ने से बच्चे वैसे भी दूसरों से दूर होते जा रहे हैं। साथ ही वर्किंग कल्चर बढ़ने से भी माता—पिता बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। इसलिए आप जहां भी जाएं वहां उसके लिए साथ ले जाएं। कोशिश करें कि महीने में एक बार परिवार रिश्तेदारों से जरूर मिलवाएं। इससे ये फायदा होगा कि जब वो लोगों से मिलेंगा जुलेगा, तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
केवल हां या न वाले सवालों से करें शुरुआत
बच्चों को सोशल बनाने के लिए उसके लिए एक प्रश्वानवली तैयार करें। इसमें ऐसे सवालों को रखें जिसका जवाब वह हां या न में दे। ताकि बच्चा स्टेप वाई स्टेप आगे बढ़े। ऐसा करने से वो बातचीत करना शुरू करेगा। साथ ही उसे बोलने का मौका भी मिलेगा।
टोकने की आदत से बचें
अक्सर ऐसा होता है कि बच्चा कुछ बोलना चाहता है तो पेरेंट्स उसे टोक देते हैं। ऐसे में सबसे पहले अपनी इस आदत को सुधारना होगा। आपको बच्चों को बोलने का मौका देना होगा। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि बच्चों के मन से सोशल होने या नए लोगों से मिलने का डर छूटे तो इसका सबसे अच्छा तरीका है कि आप उन्हें उन लोगों से मिलाएं और उन्हें अन्य बच्चों की संगत दें। इससे बच्चा इंट्रेक्ट करना सीखेगा।
बच्चे के रुचि वाले विषयों को चुनें
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा सोशल हो, दूसरे से इंट्रेक्ट करना सीखे तो इसके लिए सबसे पहले उसके रुचि वाले विषयों का चयन करें। जिस पर उससे बातचीत की जा सके।
थियेटर ज्वाइन कराएं
बच्चों में पब्लिक स्पीकिंग बढ़ाने के लिए रंग मंच यानि थियेटर सबसे अच्छा विकल्प होता है। इससे बच्चे में बोलने की क्षमता का विकास होता है। इसी के साथ उसके मन से स्टेच फीयर भी निकलता है।
शर्म की अनुपस्थिति व्यक्ति की सामाजिक चेतना को क्षतिग्रस्त कर देती है परंतु इसका आधिक्य विकृत व्यक्तित्व को जन्म देता है जो मानसिक विकृति का रूप धारण कर लेता है। शर्मीलापन संवेगात्मक तनाव और मानसिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न करता है जो व्यक्ति को असामान्य बना देता है। इसके कारण शर्मीले व्यक्तित्व का व्यक्ति अपनी जन्मजात क्षमताओं जैसे- बुद्धि एवं विशिष्ट गुणों का सही उपयोग उपने उद्देश्य की प्राप्ति में नहीं कर पाता है। वह आत्मकुंठित होकर सामाजिक माहौल से दूर एक नये वातावरण में रहने लगता है जहां वह आनन्द के किसी भी साधन का सही उपयोग नहीं कर पाता।
शर्मीलेपन की प्रारंभिक अवस्था में अभिभावक बहुत संतोष की अनुभूति करते हैं पर जहां वह मित्र मंडली को छोड़कर अपने आप में लीन रहने लगता है, वहां अभिभावक को सतर्क होने की आवश्यकता होती है। बाहरी जगत से संबंध विच्छेद के बाद शर्मीला व्यक्ति कुंठा पालते हुए शारीरिक एवं मानसिक रोगों से ग्रस्त होने लगता है।

