Thursday, April 30, 2026
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जनाब! कलेजा पत्थर का कर लीजिए, बदनसीब बाप-बेटी की ऐसी रीयल स्टोरी जिसे पढ़कर आंसू नहीं रोक पाएंगे

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है। आज सरकारें चाहे जितना दावा कर लें मगर, गरीबी तो गरीबी है जनाब! उसे कोई नहीं मिटा रहा। देश को आजाद होने का दंभ 1947 भरने वाले नेता गरीबी मिटा रहे हैं मगर, गरीबी तो नहीं मिट रही अलबत्ता गरीब जरूर मिटते जा रहे हैं।

देने वाले किसी को गरीबी न दे मौत दे दे मगर बदनसीबी न दे… ये गाना तो फिलहाल साल 1960 में बनी फिल्म पतंग का है। इस गाने में आवाज स्वर कोकिला लता मंगेशकर की है। ये तो रही रील स्टोरी की जानकारी।

अब हम बात कर रहे हैं एक ऐसे रीयल स्टोरी की जिसे पढ़कर आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ेगा। यकीन नहीं आ रहा तो पूरी रीयल स्टोरी को ध्यान से पढ़कर सोचिएगा। यह घटना आखिर कहती क्या है। एक लाचार बेबस बाप जहर लाकर खुद भी खा लेता है और पढ़ने लिखने वाली होनहार बेटी को भी माहुर खिलाकर जिंदगी खत्म कर लेता है। यह फैसला कितना कठिन रहा होगा।

कहते हैं कि देने वाले किसी को गरीबी न दे मौत दे दे मगर बदनसीबी न दे… यह गाना आज गरीबों पर सटीक बैठ रहा है। मगर, शासन हो प्रशासन नेता हों या समाजसेवी उनके सिर पर जूं भी नहीं रेंगेगी। कोई फर्क नहीं पड़ता।

मामला वेस्ट उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का है। बताया जा रहा है कि आर्थिक तंगी के चलते एक बाप इतना अधिक लाचार हो गया कि अपनी लाड़ली बेटी की पढ़ाई जब पूरी नहीं कर पाया तो बेबस पिता ने बेटी के साथ मिलकर माैत का सफर तय कर लिया।

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दोनों को गंभीर हालत में उपचार के लिए मोदीपुरम के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान पिता पुत्री की मौत हो गई। सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंची पुलिस ने घटना की पूरी जानकारी ली और फिर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। इस घटना से जहां परिजनों की आंखों से आंसू नहीं थम रहे तो वहीं पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार भी गरम है।

जानकारी के मुताबिक दाैराला थानाक्षेत्र के चिरौड़ी गांव निवासी 50 वर्षीय जोगेंद्र प्रजापति ने 16 वर्षीय बेटी खुशी के साथ कोई जहरीला पदार्थ खा लिया और दोनों ने जिंदगी खत्म कर ली।

बताया जा रहा है कि जोगेंद्र प्रजापति के पांच बच्चे हैं। तीन बेटियां व दो बेटे धीरे-धीरे बड़े हो रहे थे। सबसे बड़ी बेटी खुशी पढ़ने में अच्छी थी। वह सपना देख रही थी जीवन में कुछ बड़ा करने की। लेकिन, परिवार की गरीबी सपने के आड़े आ रही थी।

बिटिया जब अपने पिता से रोज दाखिले की जिद करती तो बेचारा बाप दाखिला दिलाने की बजाए केवल झूठी दिलासा देकर अपने दिल पर पत्थर रख लेता रहा। आखिर गुरूवार को जोगेंद्र प्रजापति के सब्र का बांध टूट गया और फिर दोनों बाप-बेटी ने मौत का घूंट पीकर गरीबी से छुटकारा पा लिए।

बता दें कि चिरौड़ी गांव निवासी जोगेंद्र प्रजापति मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। घर का खर्च बढ़ने पर जोगेंद्र की पत्नी ने भी मजदूरी करनी शुरू कर दी। बेटी खुशी ने इस बार गांव स्थित स्कूल से 10वीं की परीक्षा 75 प्रतिशत नंबर लेकर पास की। खुशी जोगेंद्र से आगे की पढ़ाई करने के लिए जिद कर रही थी। पहले तो जोगेंद्र ने खुशी को दिलासा दिया, लेकिन स्कूल-कॉलेज खुलने के बाद वह दाखिले के लिए रुपयों का इंतजाम नहीं कर सका। बेटी से झूठ बोल-बोलकर जोगेंद्र थक चुका था।

गुरुवार के दिन जब जोगेंद्र खाना खाने घर पहुंचा तो बेटी ने दाखिले की जिद की, लेकिन पिता के पास बेटी के सवाल का कोई जवाब नहीं था। जोगेंद्र पहले से ही जहरीला पदार्थ लेकर घर पहुंचा था। खुशी के बाकी बहन-भाई गांव में खेल रहे थे। इस दौरान जोगेंद्र ने बेटी को जहरीला पदार्थ दिया और खुद भी सेवन कर लिया।

पत्नी लता के पहुंचने पर जोगेंद्र ने बताया कि उन्होंने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया है। गंभीर हालत में जोगेंद्र ने पत्नी से कहा कि वह अपनी बेटी की ख्वाहिश पूरी नहीं कर सका, इसलिए उसने जहरीला पदार्थ खा लिया है।

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