- अफसर बेखबर, गढ़ रोड को अतिक्रमण को लेकर भी अफसरों पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप
- कोर्ट के आदेशों से ज्यादा पुलिस और नगर निगम के लिए भाजपा नेताओं की अहमियत
- अफसरों के झूठ पर सोमवार को फिर खटखटाएंगे हाईकोर्ट का दरवाजा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोतवाली के भगत सिंह मार्केट इलाके में एक बार फिर से हालात बिगड़ने लगे हैं और पुलिस प्रशासन तथा नगर निगम के अफसर इससे पूरी तरह से बेखबर हैं। अफसरों की यदि की जाए तो हाईकोर्ट से ज्यादा उन्हें भाजपा नेताओं का खौफ दिखता है। वहीं, दूसरी ओर जितने भी बडे अवैध कब्जे व निर्माण हैं।
उनके आरोपियों के तार सत्ताधारी दल के किसी मंत्री, सांसद या फिर विधायक अथवा बडे व्यापारी नेता से जुडे हैं। यही कारण है कि जब भी ध्वस्तीकरण दस्ता भगत सिंह मार्केट में कार्रवाई को पहुंचता है और इससे पहले कि वहां कार्रवाई शुरू की जाए, दबंग प्रवृत्ति के नेता वहां आ धमकते हैं। कार्रवाई के नाम पर अफसर लीपापोती से ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाते हैं।
दोबारा से सज गए ठेले
भगत सिंह मार्केट के अवैध कब्जे व जाम तथा अवैध निर्माण मामलों को लेकर हाईकोर्ट में फरियाद करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना के आग्रह पर रविवार को जनवाणी संवाददाता भगत सिंह मार्केट पहुंचे तो वहां बाइक से निकलना तो दूर की बात ठेलों की वजह से जाम की हालत ऐसी थी कि पैदल भी नहीं निकल सकते थे। बाजार में जबरदस्त भीड़ थी। सड़कों पर ठेले वालों का कब्जा था।
…तो अफसरों ने दिया झूठा शपथ-पत्र
भगत सिंह मार्केट में सड़क पर लगे ठेलों को लेकर जो स्थिति रविवार को नजर आयी उसके बाद सवाल उठता है कि क्या अफसरों की ओर से हाइकोर्ट में दिया गया शपथ पत्र झूठा था। जिसमें करीब 50 ठेले सीज किए जाने का दावा करते हुए इस इलाके को जाम मुक्त बताया गया है।
आईजी को गलत सूचना का आरोप
इसके अलावा भगत सिंह मार्केट को लेकर स्थानीय पुलिस की ओर से आईजी कार्यालय को जो सूचना दी गयी है। उसके अनुसार भगत सिंह मार्केट में कही कोई जाम नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि आईजी के पोर्टल पर जो शिकायत की गयी है वह भी असत्य है। जो थोड़ी बहुत कार्रवाई की जानी है वह नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में है।
एक-दूसरे के पाले में डाल रहे गेंद
अधिकारियों का रवैया बजाय ठोस कार्रवाई के एक-दूसरे के पाले में गेंद डालने का नजर आता है। नगर निगम के अधिकारी पुलिस पर ठीकरा फोड़ते हैं कि फोर्स नहीं मिल रहा है। हालांकि उनका यह तर्क बेबुनियाद है। फोर्स की जहां तक बात है तो निगम पर तो अपना प्रवर्तन दल है।
जिस पर हर माह 90 लाख का खर्चा वेतन के तौर पर किया जाता है। फिर पुलिस प्रशासन के पाले में क्यों गेंद डाली जा रही है। कमोवेश यही स्थित पुलिस की भी है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई निगम को ही करनी है।
कोर्ट में आज अपील
आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस नहीं बैठे थे। अब आज कोर्ट खुलेगी तो भगत सिंह मार्केट मामले की शीघ्र सुनवाई व वीडियोग्राफी की फरियाद कोर्ट से की जाएगी ताकि प्रभावी कार्रवाई करायी जा सके।
गढ़ रोड को लेकर भी गलत सूचना का आरोप
वहीं, दूसरी ओर गढ़ रोड के अवैध कब्जों खासतौर से सड़क पर लगने वाली सब्जी मंडी को लेकर भी कोर्ट में प्रशासन की ओर से जो सूचना दी गयी है। उसको आरटीआई एक्टिविस्ट ने झूठ का पुलिंदा करार दिया है। उनका कहना है कि व्यापारी नेताओं के विरोध के आगे अफसरों की एक नहीं चली और लौट आए थे। जबकि आज भी वहां सड़क पर कब्जे हैं। सब्जी मंडी भी लग रही है।

