
वैसे तो हर दिन समाज, देश और धरती के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन छोटी नदियों पर ध्यान देना अधिक जरूरी है। गंगा, यमुना जैसी बड़ी नदियों को स्वच्छ रखने पर तो बहुत काम हो रहा है, पर ये नदियां बड़ी इसीलिए बनती है, क्योंकि इनमें बहुत सी छोटी नदियां आ कर मिलती हैं। यदि छोटी नदियों में पानी कम होगा तो बड़ी नदी भी सूखी रहेंगी। यदि छोटी नदी में गंदगी या प्रदूषण होगा तो वह बड़ी नदी को प्रभावित करेगा। छोटी नदियां अक्सर गांव, कस्बों में बहुत कम दूरी में बहती हैं। कई बार एक ही नदी के अलग-अलग गांव में अलग-अलग नाम होते हैं। बहुत नदियों का तो रिकार्ड भी नहीं है। एक मोटा अनुमान है कि आज भी देश में कोई 12 हजार छोटी ऐसी नदियां हैं, जो उपेक्षित हैं, उनके अस्तित्व पर खतरा है।