Saturday, March 14, 2026
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…ताकि खिलखिलाता रहे नौनिहालों का बचपन

  • सरकार की एचबीएनसी योजना के तहत बच रही जच्चा बच्चा की जान
  • प्रदेश में नवजात शिशु मृत्यु दर का ग्राफ भी आया नीच

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकार इस समय जहां गर्भवती महिलाओं की सेहत पर खास ध्यान दे रही है। वहीं वो जज्चा बच्चा की भी पूरी निगरानी में लगी है। सरकार चाहती है कि पूरे देश में नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी आनी चाहिए। इसी को मद्देनजर रखते हुए सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जज्चा बच्चा की देखभाल कर रही है।

उत्तर प्रदेश में भी नवजात शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से सरकार प्रयासरत है। यहां चलाए जा रहे एचबीएनसी (होम बेस्ड न्यू बोर्न केयर) कार्यक्रम के द्वारा स्वास्थ्य विभाग की आशा बहनें जच्चा बच्चा की देखभाल के उद्देश्य से उनके घरों पर भ्रमण कर मां व बच्चे के स्वास्थ्य पर पैनी निगाह रखे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान में जहां सरकार पूरी तत्परता बरत रही है।

वहीं, बाकायदा इस कार्यक्रम के लिए मॉनिटिरिंग एजेंसियां भी अपने स्तर से कार्यक्रम की मॉनिटिरिंग कर अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज रही हैं। इस मामले में बच्चों के लिए काम करने वली अन्तर्राष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ खुद भी कार्यक्रम में सपोर्टिंग सुपरविजन कर रही है। जिले के डीसीपीएम (डिस्ट्रिक्ट कम्यूनिटी प्रोेसेस मैनेजर) हरपाल सिंह के अनुसार एनबीएनसी विजिट के दौरान अशा बहनें बच्चे के जन्म के बाद कुल छह से सात विजिट संबधित घरों पर कर जच्चा और बच्चा की पूरी देखभाल करती हैं।

सात बार होने वाला आशाओं का यह भ्रमण पहले दिन से लेकर 42वें दिन तक जारी रहता है। इस दौरान आशा बहन बच्चे का वजन व तापमन से लेकर उसमें दिखाई दे सकने वाले गंभीर लक्षणों पर फोकस करती है और यदि किसी भी बच्चे या मां में इस दौरान किसी भी प्रकार का कोई गंभीर लक्षण देखती है तो उसे फौरन सरकारी अस्पताल के लिए रैफर करवाती है। बच्चा यदि सही से दूध नहीं पी पा रहा, उसकी छाती में धंसाव हो रहा है या फिर सही ढंग से रो नहीं पा रहा है तो इन सब पॉइंटस पर फोकस करते हुए आशा संबधित परिवार को उचित निर्देश देते हुए उन्हें सरकारी अस्पतालों के लिए रेफर कर रही हैं।

एलबीडब्ल्यू बच्चों पर विशेष फोकस

इस दौरान पैदा होने वाले एलबीडब्ल्यू (लो बर्थ वेट) बच्चों पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। 1800 ग्राम से कम वजन के बच्चों को सीधे एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) के लिए रैफर किया जा रहा है ताकि उनका आवश्यक उपचार किया जा सके। कम वजन के बच्चों को केएमसी (कंगारु मदर केयर) विधि के माध्यम से भी उनका वजन बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है।

शिशु मृत्यु दर घटी

अब इसे सरकार की कोशिशों का परिणाम कहें या फिर इस अभियान में लगी विभिन्न एजेंसियों की मेहनत कि शिशुओं की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। अगर साल 2015-16 में ग्रामीण एंव शहरी क्षेत्रों में नवजात मृत्यु दर (एनएनएमआर) की बात करें तो यह 45.1 प्रतिशत थी जो कि वर्ष 2020-21 में घटकर 35.7 प्रतिशत तक आ गई। यानि कि पिछले पांच से छह सालों में इसमें लगभग 10 प्रतिशत की अच्छी खासी कमी दर्ज की गई। यूपी में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) जो पहले 63.5 प्रतिशत थी वो अब घटकर 50.4 प्रतिशत पर आ गई है।

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