जनवाणी ब्यूरो |
बलरामपुर: रबी फसल की बोआई जल्द ही शुरू होने वाली फसल है। भूमि व बीज जनित रोगों से फसल प्रभावित न हो, इसके लिए भूमि शोधन व बीज शोधन किया जाना जरूरी है। किसान ये प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही खेत में रबी फसल की बोआई करें।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. इंद्रेश कुमार गौतम ने बताया कि किसान बीज शोधन के लिए पांच ग्राम ट्राइको डर्मा या कार्बेंडाजिम दो ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीज में मिलाकर बोआई करें। गेहूं की फसल में स्मट रोग, मटर, मसूर, चना व मिर्च में उकठा रोग तथा सरसों व राई में पाउडरी मिलडिव रोग फैलता है। इन रोगों से बचाव के लिए पहले बीज को तीन ग्राम थीरम या दो ग्राम कार्बेंडाजिम प्रति किलोग्राम की दर से बीज शोधन करके ही बोआई करनी चाहिए।
इस समय गन्ने की फसल में लाल सड़न रोग बढ़ रहा है। इसकी रोकथाम के लिए स्यूडोमोनास फ्लोरासेंस से बीज शोधन करके ही बोआई करनी चाहिए। उन्होंने भूमि शोधन के लिए बताया कि ट्राइकोडर्मा हारजेनियम दो प्रति डब्ल्यूपी एक किलोग्राम 30 किलोग्राम गोबर में मिलाकर एक सप्ताह तक छाया में रख दें।
बोआई से पहले आखिरी जुताई पर खेत में मिला देें। यदि खेत दीमक से प्रभावित है तो व्यूवेरिया बैसियाना से भूमि शोधन करना लाभदायक होता है। खेत में किसी भी प्रकार के कीट अथवा रोग की स्थिति में व्हाट्एप नंबर 9452247111 व 9452257111 पर इसकी फोटो भेजकर अपनी समस्या का समाधान करा सकते हैं।

