Sunday, March 15, 2026
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…तो नेशनल हाइवे पर भी ट्रैफिक पुलिस की लूट

  • वाहन चालकों का चेकिंग के नाम पर किया जा रहा उत्पीड़न, आक्रोश

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: ट्रैफिक पुलिस के लिए नियम कायदे कानून कोई मायने नहीं रखते। सिर्फ उनका एक ही अभियान है सिर्फ वसूली, जिस पर पूरा दिन ट्रैफिक पुलिस कर्मियों का फोकस रहता है। जाम लग रहा है लगने दो, उनकी सेहत पर इसका असर पड़ने वाला नहीं है। ‘जनवाणी’ फोटो जर्नलिस्ट ने एनएच-58 पर ट्रैफिक पुलिस कर्मी की ऐसी तस्वीर कैमरे में कैद की हैं, जिसमें हाइवे पर वाहनों को चेकिंग के नाम पर रोक कर उत्पीड़न किया जा रहा था।

कई तस्वीर ऐसी है, जिसमें ट्रैफिक पुलिस कर्मी हाइवे पर चेकिंग के नाम पर रौब गालिब करते दिखाई दिये। आखिर इन्हें हाइवे पर चेकिंग करने की अनुमति किसने दी? शहर में यदि क्राइम होता है तो थाना पुलिस चेकिंग करती हैं, लेकिन ट्रैफिक पुलिस का हाइवे पर चेकिंग करने का क्या मतलब हैं? महत्वपूर्ण बात यह है कि नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को वाहनों की चेकिंग करने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन फिर भी चेकिंग के नाम पर वसूली करने का दुस्साहस इन ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के पास है।

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बेलगाम हो चुके ट्रैफिक पुलिस कर्मियों पर अधिकारियों का कोई अंकुश नहीं है। बेलगाम हो चुके इन पुलिस कर्मियों पर क्या लगाम कस पाएंगे? यही वजह है कि ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को नेशनल हाईवे पर वाहनों को चेकिंग के नाम पर रोकने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस कर्मी अपनी गाड़ी हाईवे के किनारे लगाकर वाहनों को रोक पाते हैं, फिर वाहनों को साइड में ले जाकर चेकिंग के नाम पर उनका उत्पीड़न चलता है।

यह एक दिन नहीं हर रोज चल रहा है। मेरठ से दिल्ली जाने वाले हाईवे पर कई जगह चोरी-छिपे ट्रैफिक पुलिसकर्मी खड़े हो जाते हैं, जिनकी तस्वीरों को ‘जनवाणी’ ने कैमरे में कैद भी किया है। बड़ा सवाल यह है कि ट्रैफिक में जो चेकिंग के नाम पर छीछालदर जिलेभर में हो रही है, उसको लेकर आला पुलिस अधिकारी किसी तरह के एक्शन में दिखाई नहीं दे रहे हैं। अधिकारी इस भ्रष्टाचार को रोकने की बजाय मौन है।

यह भ्रष्टाचार शहर के हाईवे पर ही नहीं, बल्कि शहर के चौराहों पर चल रहा है। इसको रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। दरअसल, तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी के कार्यकाल में एक भी चौराहे पर चेकिंग के नाम पर किसी का उत्पीड़न नहीं हुआ। ट्रैफिक पुलिसकर्मी उस दौरान ट्रैफिक व्यवस्था ही संभालते थे। क्योंकि प्रभाकर चौधरी बेहद ईमानदार थे और शिकायत मिलने पर सीधे पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने तक की कार्रवाई उनके कार्यकाल में की जा रही थी।

अब पुलिसकर्मी ट्रैफिक पुलिसकर्मी बेलगाम है। ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने शहर को छोड़कर अब हाइवे को पकड़ लिया है। शहर में तो वसूली की जा रही है ,लेकिन अब वसूली का केंद्र नेशनल हाईवे एनएच-58 भी बन गया है। उस पर जगह-जगह पुलिसकर्मी खड़े होकर वाहनों को रोकते हैं, फिर कागज देखते हैं। यहीं से शुरू हो जाता है उत्पीड़न का सिलसिला। क्या यह उत्पीड़न का सिलसिला खत्म हो पाएगा या फिर इसी तरह से आला पुलिस अधिकारी से मौन स्वीकृति देते रहेंगे।

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