- किसी पर रहम तो किसी पर सितम, घंटाघर, जिला अस्पताल रोड के निकट नाले अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: महानगर में शनिवार को नगर निगम की टीम के द्वारा जिला अस्पताल से लेकर घंटाघर तक सड़क के एक तरफ नाले से अतिक्रमण हटवाया गया और चोक नाले से सिल्ट निकलवाकर उसे ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से दूसरी अन्य जगहों पर डलवाया गया। टीम के द्वारा कुछ जगहों से नाले से पक्के स्लेब व अन्य अतिक्रमण हटवाया गया, लेकिन घंटाघर के निकट कुछ दुकानदरों के द्वारा नाले पर स्लेब की जगह लिंटर डालकर पक्के निर्माण कर रखे हैं,
ऐसी जगहों से टीम ने अतिक्रमण हटवाने से दूरी बना ली और टीम पूरे नाले की पटरी से अतिक्रमण हटवाये बगैर ही लौट गई। लोगों को कहते सुना गया कि अतिक्रमण हटवाने को कहीं पर सितम तो कहीं पर रहम निगम की टीम करती है। उधर, घंटाघर के निकट नाला निर्माण कार्य भी चल रहा है।
नगर निगम की टीम के द्वारा नालों की साफ-सफाई व अतिक्रमण हटवाने के नाम पर महानगर में कहीं कार्रवाई तो कहीं खानापूर्ति की जा रही है। शनिवार को जिला अस्पताल घंटाघर रोड के निकट अभियान चलाया। जिसमें जिला अस्पताल से घंटाघर जाने वाले रास्ते पर सड़क किनारे नाले से अतिक्रण हटवाने और सिल्ट निकालकर सफाई अभियान चलाया। जिसमें कुछ जगहों पर टीम ने नाले को जिन दुकानदारों के द्वारा सलेब डालकर उसे कवर्ड करके अतिक्रमण कर दुकान आदि का सामान आदि रख लिया गया था।
टीम ने कई जगहों से सलेब आदि हटाकर अतिक्रमण हटवाया। इस दौरान कुछ दुकानदारों के द्वारा लकड़ी की बल्लियों के सहारे दुकान में अंदर तक जाने का रास्ता तैयार किया। वहीं टीम जैसे ही घंटाघर के पास पहुंची तो वहां पर नाले पर लिंटर डालकर कुछ दुकानदारों के द्वारा पक्का अतिक्रमण कर लिया गया, ऐसी जगह पर नाला दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा, लेकिन टीम वहां से अतिक्रमण हटवाए बगैर ही लोट गई।

कुछ लोगों को कहते सुना की नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटवाने एवं चोक नालों की साफ-सफाई के नाम पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करती वह केवल अपनी मनमानी ओर चहेते लोगों पर मेहरबानी, खानापूर्ति और गरीब एवं अनजान लोगों पर कार्रवाई का चाबुक चला देती हैं। शनिवार को ही नगर निगम की टीम के द्वारा कई जगहोें पर डेयरी में कार्रवाई की और जो डेयरी संचालक नाली व नालों में डेयरियों का गोबर बहाने को लेकर मनमानी कर रहे हैं, उन्हे टीम ने चेतावनी भी दी, लेकिन टीम कुछ डेयरियों में ही पहुंची और कुछ से दूरी बनाकर लौट गई। लोगों का कहना है कि निगम टीम कहीं कार्रवाई करती है तो कहीं पर खानापूर्ति कर मामलों में इतिश्री कर लेती है।
सीवर चोक होने से हरी लक्ष्मी लोक बिल्डिंग गिरी तो पार्षद जिम्मेदार
महानगर के ईव्ज चौराहा पर सीवर के चोक होने के कारण शनिवार को सड़क पर जलभराव हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते वर्ष तत्कालीन आयुक्त ने इस सीवर की सफाई के लिये साढे सात करोड़ रुपये पास किये थे, लेकिन सत्ताधारी पार्टी के दो सभासदों ने इस सीवर की सफाई के कार्य में अडंगा लगा दिया। जिसके बाद कोर्ट में मामला जा पहुंचा और सीवर के चोक होने से पुरानी बिल्डिंगों को खतरा पैदा हो गया है, यदि कोई भवन गिरता है तो उन सभासदों की सीधी जिम्मेदारी होगी।
महानगर में कई जगहों पर जहां एक तरफ नाले एवं नाली चोक होने की समस्या पैदा हो गई हैं, वहीं ईव्ज चौराहा पर सीवर के चोक होने से पुराने भवनों को भी खतरा पैदा हो गया हैं। सुधांशु महाराज के साथ ही स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते वर्ष तत्कालीन आयुक्त ने इस सीवर की सफाई के लिये करीब साढेÞ सात करोड़ रुपये स्वीकृत भी किये थे।
उनके वार्ड से हटकर दो सत्ताधारी पार्टी के ही सभासदों ने दूसरी जगह नये सीवर का निर्माण कराने का अडंगा लगाकर सीवर की साफ-सफाई के कार्य को अधर में लटका दिया। सीवर कभी भी चोक होने के कारण दूषित पानी सड़कों पर जलभराव के रूप में जमा हो जाता है। इसमें शनिवार को भी सीवर के चोक होने पर दूषित पानी सड़क पर जलभराव के रूप में जमा हो गया।
जिसको लेकर सुधांशु महाराज स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके वार्ड के लोगों के साथ महानगर के लोगों के अथक प्रयास से नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त मनीष बंसल के द्वारा सीवर की सफाई के लिये बीते वर्ष करीब साढेÞ सात करोड़ रुपये स्वीकृत कर पास किये थे, लेकिन सत्ताधारी पार्टी से जुड़े दो सभासदों ने जोकि उनके वार्ड के भी नहीं हैं,
इस सीवर की सफाई की जगह दूसरा अन्य सीवर निर्माण की बात का अडंगा लगाकर सीवर की सफाई नहीं होने दी। सुधांशु महाराज का कहना है कि करीब 20 वर्षों से इस सीवर की सफाई नहीं हुई ओर सीवर का पानी पुरानी बिल्डिंगों की नींव में भर रहा है। जिसमें किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। जिसमें इसकी जद में सबसे ज्यादा ईव्ज चौराहा स्थित हरी लक्ष्मी लोक की बिल्डिंग आ सकती है
और किसी भी समय बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता। यदि इस तरह का हादसा होता है तो उसके लिये सीधे-सीधे सत्ताधारी पार्टी के वहीं दोनो सभासद जिम्मेदार होंगे। जिन्होने साढेÞ सात करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बाद भी बंद सीवर की सफाई नहीं होने दी। उन्होंने बताया कि व्यापारी और सभासदों के बीच का यह विवाद अब कोर्ट तक भी जा पहुंचा है, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो सका है।

