- खुद जिलाध्यक्ष और अन्य नेता भी घरों पर ही बैठकर देश में चल रहे सियासी हार-जीत के आंकड़े जोड़ते रहे
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अति उत्साह में मेरठ सीट गंवाने वाले समाजवादी पार्टी के नेता हार के अगले दिन समीक्षा बैठक में पहुंचने का भी वक्त नहीं निकाल सके। खुद जिलाध्यक्ष व अन्य नेता भी घरों पर ही बैठकर देश में चल रहे सियासी हार-जीत के आंकड़े जोड़ते रहे। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर इस बार जितनी फजीहत समाजवादी पार्टी ने कराई है, वैसी अब से पूर्व कभी नहीं हुई। दावेदारों की भारी भरकम फौज रही। पूरे 11 दावेदार, और दावों में एक से बढ़कर एक। पहले इस बात की घोषणा की गई कि इस बैठक में पूरे जिले के सभी आम व खास कार्यकर्ता शिरकत करें। फिर अहसास हुआ कि इससे तो और ज्यादा भारी फजीहत और भारी भीड़ होगी।
लिहाजा संशोधन जारी किया गया कि सरधना, सिवाल खास व हस्तिनापुर विधान सभा के पदाधिकारी व जिम्मेदार इसमें भागीदारी न करें। इसके लिए रमजान को आधार बनाया गया कि रमजान में रोजों की वजह से दिक्कत होगी। जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पूर्व में ही इस बात का ऐलान कर चुके थे कि वह मेरठ लोकसभा सीट से किसी मुस्लिम को टिकट नहीं देंगे। इसके बावजूद भी किठौर विधायक शाहिद मंजूर पिछले सप्ताह भर से लखनऊ में ही डेरा डाले हुए थे। उनके साथ ही शहर विधायक हाजी रफीक अंसारी भी इस उधेड़बुन में थे कि मेयर के चुनाव में उनकी बेगम को मौका नहीं मिला। लिहाजा इस बार उनको टिकट देकर उस खामी को पूरा किया जाये।
समाजवादी पार्टी की मेयर चुनाव में खासी फजीहत करा चुके सरधना विधायक अतुल प्रधान अब भी पार्टी से टिकट के दावेदार बने हुए थे। यह हालात तो तब हैं जब सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव साफ कर चुके हैं कि वह वर्तमान विधायकों को टिकट नहीं देंगे, लेकिन अपने दिल में लोकसभा चुनाव लड़ने की हसरत पाल रहे जिले के समाजवादी पार्टी के तीनो विधायक अपनी जिद पर अड़े हुए थे। उनके साथ-साथ पूर्व विधायक योगेश वर्मा, पूर्व विधायक प्रत्याशी मुखिया गुर्जर, पूर्व पार्षद संगीता राहुल, नीरज पाल, सनी गुप्ता तथा समाजवादी पार्टी के मेरठ जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी ने भी टिकट की दावेदारी की थी,
लेकिन अंतत: सुनीता वर्मा नामांकन के अंतिम दिन टिकट पाने में सफल रहीं। दलित और मुस्लिम गठजोड़ के सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की समाजवादी पार्टी ने जुगत लगाई थी। लेकिन समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता अति उत्साह में रहे। वह बाहर क्षेत्रों में तो मेहनत करते रहे। लेकिन वोट प्रतिशत बढ़वाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। इसी का यह नतीजा रहा कि शहर और हापुड़ में अपेक्षाकृत गठबंधन प्रत्याशी को उतने वोट नहीं मिल सके। अब चुनावी नतीजे आ चुके हैं। सब स्थिति साफ हो चुकी है कि कौन सा बूथ या कौन सा विधान सभा क्षेत्र कमजोर रहा।
इसी की समीक्षा करने के लिए बुधवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय पर समीक्षा बैठक बुलाई गई थी, लेकिन इस बैठक में पहुंचने के लिए कार्यकर्ता समय ही नहीं निकाल सके। न ही कार्यकर्ताओं को इस बात की फुर्सत रही कि वह हार के कारणों पर चर्चा करके आगे की रणनीति बना सके। उधर, सपा जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी कहते हैं कि गर्मी होने की वजह से कार्यकर्ता संभवत: बैठक में नहीं पहंचे। जल्द ही पार्टी प्रत्याशी के साथ समीक्षा बैठक की जायेगी।

