Tuesday, April 21, 2026
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बच्चों के संग गुजारें प्यार भरे पल

BALWANI


अक्सर देखा गया है कि जो बच्चे पूरे दिन घर में बंद रहते हैं वे दब्बू हो जाते हैं। ऐसे बच्चे बड़े होकर हताशा का शिकार भी बनने लगते हैं। जो बच्चे मां-बाप की देख-रेख के बगैर अपनी मर्जी से समय गुजारते हैं, वे अपराधों की तरफ उन्मुख हो जाते हैं। इन सब बातों को नजर में रखते हुए जरूरी है कि बच्चों को क्वालिटी टाइम जरूर दिया जाए।

महानगरों में ऐसे परिवार जहां माता-पिता दोनों काम पर जाते हैं, बच्चों का पालन और विकास एक बड़ी समस्या है। ऐसे घरों में छोटे बच्चे, आॅफिस टाइम में क्र ेच में पलते हैं, जहां वे मां के भावनात्मक प्यार से वंचित रहते हैं।

पढ़ने-लिखने लायक बच्चे या तो डे बोर्डिंग में कैद रहते हैं या घर आकर अपनी मर्जी के मालिक बन जाते हैं। ये दोनों ही स्थितियां बच्चे के स्वाभाविक विकास के लिए खतरनाक हैं। खासकर वे बच्चे अपराधों की ओर उन्मुख होते हैं जो अभिभावकों की अनुपस्थिति में अकेले घर में मनमर्जी से टीवी चैनल घुमाया करते हैं। दरअसल, इन बच्चों की समस्या है माँ-बाप से अपने हिस्से का समय न मिलना।

अक्सर मां-बाप अपनी रुचियों को बच्चों पर थोपने की कोशिश करते हैं। बच्चों में ऐसी जबर्दस्ती के खिलाफ एक स्वाभाविक विद्रोह जन्म ले लेता है। जहां अभिभावक बच्चों की दिलचस्पी पर ध्यान नहीं देते, वहां बच्चे भी उनकी अनसुनी करने लगते हैं। ऐसे में अगर उनकी रूचियों को जानकर रूचियों अनुसार रचनात्मक दिशा दे सकते हैं तो बच्चों के साथ बेहतर सामंजस्य बैठ सकता है।

यदि उनकी रुचियां आपको ठीक न भी लगें तो भी उन्हें धीरे-धीरे बेहतर चीजों की तरफ मोड़ा जा सकता है। बच्चों को ऐसे खिलौने दिये जा सकते हैं जो उनमें जिज्ञासा पैदा करें। धीरे-धीरे ऐसे रचनात्मक और ज्ञानवर्धक खिलौने उनकी रूचि का हिस्सा बन सकते हैं।

बच्चों की रुचि बेहतर बनाने के लिए आप स्वयं उदाहरण बन कर काम करें तो बेहतर होगा। याद रखिये बाल मन को किसी भी साचे में ढाला जा सकता है लेकिन किसी खांचे में उन्हें जबर्दस्ती ठूंसा नहीं जा सकता। बाल भावनाएं कोमल होती हैं और कोई रूप तभी दिया जा सकता है जब उन्हें पूरी तरह समझ लिया जाए।

यथासंभव उनकी इच्छाएं भी पूरी की जानी चाहिए। खासकर ऐसे बच्चों की जिनके मित्रों को बेहतर सुविधाएं मिल जाती हैं। ऐसे में उनके मन में कुंठा नहीं आएगी जो मित्रों से खुद की तुलना से पैदा होने लगती है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे जो सुविधाएं चाहते हैं, उन्हें पूरा पाने, न पाने की मजबूरी से उनका कोई खास वास्ता नहीं। हां, इतना ध्यान रखा जा सकता है कि उसका अधिकांश समय अपने जैसे परिवेश वाले बच्चों और संबंधियों के साथ बीते।

बेशक आप दिन भर बच्चों के साथ ना रह पाएं। मगर, रात को सोने से पहले बच्चों से पूछना ना भूलें कि उनका दिन कैसा गया। वहीं बच्चों की दिन भर की परेशानी को सुलझाने में भी उनकी मदद करें। इससे बच्चे खुद को पैरेंट्स के क्लोज महसूस करेंगे।

हर रोज अपनी बिजी दिनचर्या में से थोड़ा सा समय निकाल कर बच्चों को स्पेशल फील कराने की कोशिश करें। इसके लिए आप बच्चों को प्यारा सा नोट लिखकर भी दे सकते हैं। साथ ही हर रोज बच्चों को ढेर सारा प्यार करना भी ना भूलें।

बच्चों को खुद के करीब रखने के लिए समय मिलने पर बच्चों का दुलार जरूर करें। जानकारी के अनुसार बच्चों को भरपूर प्यार और दुलार देने से ना सिर्फ बच्चे खुश रहते हैं बल्कि उनके बीमार पड़ने की संभावना कम रहती है।

घर पर बच्चों के साथ समय निकाल कर थोड़ी देर जरूर खेलें। बच्चों से दोस्ती करने का ये सबसे बेस्ट तरीका है। बच्चों के साथ खेलने के अलावा आप उनके साथ कुकिंग भी एंज्वॉय कर सकते हैं। इससे बच्चे आपसे काफी जुड़ाव महसूस करने लगेंगे।

मनोचिकित्सकों का मानना है कि जिद या अवज्ञा बच्चों में तभी पनपती है जब निराशा और असफलता कुंठा के रूप में उनके नाजुक मन-मस्तिष्क पर प्रहार करती है लेकिन इन सारी समस्याओं का जो सीधा और सरल नुस्खा है, वह है बच्चों के साथ प्यार भरे पल बिताना। रासुका लगाएं, आंशिक बुलडोजर चलाएं या पैर धोएं, जो होना था, वह हो चुका।

इशरत परवीन


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