- बिना कामकाज तनख्वाह की ख्वाहिश
जनवाणी संवाददाता |
फलावदा: स्थानीय नगर पंचायत में वैसे तो कर्मचारियों को फौज है लेकिन काम करने वाले कर्मचारियों का अभाव बन रह है।सत्ता का दबाव बनाकर कर्मचारी बिना ड्यूटी तनख्वाह पाने के गुणाभाग में ऊर्जा लगा रहे है।सियासी सरपरस्ती से कर्मचारीयों में कामचोर होने की आदत नगर पंचायत के लिए चुनौती बनती जा रही है।
सन 1885 में अपने अस्तित्व में आई नगर पंचायत फलावदा में जरूरत के हिसाब से पर्याप्त संख्या में कर्मचारी नियुक्त है।जन्म मृत्यु पंजीकरण, टैक्स संग्रह, कंप्यूटर आपरेटर, ड्राईवर, डाक ,सेलरी,बिजली व्यवस्था, पंप आपरेटर, चपरासी, समर्सेबल चलाने के अलावा कस्बे में सड़को नालियों की सफाई हेतु नगर पंचायत कार्यालय में कर्मचारी नियुक्त है।
कर्मचारियों की इस फौज में 23 स्थाई कर्मचारी तैनात है, जबकि 24 संविदाकर्मीयों के साथ 31 लोगों को ऑउट सोर्सिंग पर भी रखा गया है। उनके वेतन वगैरा पर ही प्रतिमाह लाखो रुपए खर्च हो रहे है।अच्छे वेतन के बावजूद कुछ कर्मचारीयों को काम करना बिलकुल पसंद नहीं।
बताया गया है कि कई कर्मचारी अपने सियासी आकाओं से दबाव बनवाकर काम के बदले आराम की सहूलत तलब कर रहे हैं।कस्बे के कई छुट भैय्या भी पीछे नहीं है, वे अपने चेहतो की सिफारिश करके उनमें निकम्मेपन की प्रवृति को जन्म दे रहे है। आलम यह है कि एक कर्मचारी ने कई महीनों से नगर पंचायत कार्यालय के दर्शन तक नहीं किए, फिर भी वह अपने रसूख से नियमित वेतन प्राप्त कर रहा है।
सियासी संरक्षण के चलते बेखौफ गैर हाजिर होने तथा मनमाने तरीके से कामकाज कर्मचारियों में एक लाइलाज बीमारी बन रही है।कर्मचारी काम करने को तैयार नहीं है।इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।इन कर्मचारियों से काम लेना नगर पंचायत के लिए चुनौती बन रहा है।
इन्होंने कहा
सभी कर्मचारियों से निर्धारित कार्य कराया जा रहा है,बिना काम किसी को वेतन नहीं दिया जाएगा। लापरवाही तथा दायित्व हीनता सामने आने पर कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्यवाही बिना किसी भेदभाव की जाएगी।काम को लेकर कोई सियासी दबाव प्रभावी नहीं होगा। -नीतू सिंह, ईओ नगर पंचायत फलावदा (मेरठ)
कर्मचारियों को ड्यूटी पर मुस्तैदी से कम करने के निर्देश है।लापरवाह कर्मचारी के खिलाफ जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।राजनैतिक दबाव से किसी को रियायत नहीं मिलेगी।
-अब्दुस समद चेयरमैन, नगर पंचायत फलावदा (मेरठ)

