- सुरंग की खुदाई के दौरान दरक रही जमीनों के बाद लोगों में थी चिंता
- मेरठ लो रिक्टर जोन में, पता भी नहीें चलते छोटे भूकंप
- यकीनन रैपिड सुरंग का बेस मजबूत होना चाहिए
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर में रैपिड और मेट्रो ट्रेनों के लिए हो रही सुरंगों की खुदाई को लेकर मन में शंका पाले यहां के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। विशेषज्ञों की दलीलों के आधार पर जो तथ्य उभर कर सामने आए हैं, वो रैपिड की सुरंगों की खुदाई के बाद लोगों के माथे पर पड़ी शिकन को दूर करने के लिए काफी हैं। विशेषज्ञों की मानें तो दिल्ली रोड पर रैपिड सुरंगों की खुदाई पूरी तरह से सुरक्षित है।
इस संबध में मेरठ कॉलेज की ज्योगरफी (भूगोल) की एसोसिएट प्रोेफेसर अनिता मलिक का मानना है कि मेरठ में रैपिड और मेट्रो के लिए हो रही सुरंगों की खुदाई ‘स्ट्रांग टेक्नोलॉजी’ के आधार पर है और जहां भी इस प्रकार की स्ट्रांग टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती है वहां दुश्वारियों की आशंका ‘शून्य’ हो जाती है।
दरअसल, मंगलवार को आए भूकम्प के बाद लोगों में इस बात को लेकर शंका पैदा हो गई थी कि जब सिर्फ खुदाई से ही जमीनें दरक रही हैं और इमारतों में क्रेक आ रहा है तो ऐसे में यदि खुदा न खास्ता तीव्रता वाला भूकम्प आता है तब क्या होगा। यह सवाल कई लोगों के दिलो दिमाग पर हावी था।
इस मामले में जब हमने प्रो. अनिता मलिक से बात की तो उन्होंने इन आशंकाओं को पूरी तरह से निर्मूल साबित करते हुए कहा कि दरअसल यह क्षेत्र ‘लो रिक्टर जोन’ में होने के कारण उन क्षेत्रों से अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित हैं जहां अधिक तीव्रता वाले भूकम्प आते हैं। अनिता मलिक के अनुसार स्ट्रांग टेक्नोलॉजी के दम पर हम शून्य से सात रिक्टर स्केल वाले भूकम्प को भी बियर (सहन) कर सकते हैं।
वो कहती हैं कि मेरठ में रैपिड और मेट्रो आधुनिक प्रोजेक्ट हैं, लोगों को इन्हे एपरिशियेट करना चाहिए। इस प्रकार के प्रोजेक्ट जब संचालित होते हैं तो इससे पहले हर पहलू पर बारीकी से जांच कर ही आगे की कार्रवाई की जाती है। प्रो.अनिता मलिक के अनुसार यकीनन रैपिड की सुरंगों का बेस कांक्रीट के प्रयोग के चलते बेहद मजबूत होगा।
वो यह भी कहती हैं कि भूकम्प की वेव (लहर) इस क्षेत्र में अमूमन कम इफेक्टेड है। वो यह भी कहती हैं कि जहां बड़े बड़े डैम हैं वहां भी भूकम्प आते हैं लेकिन स्ट्रांग टेक्नोलॉजी की वजह से वो पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

