Monday, March 1, 2021
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सिस्टम की लापरवाही, मरीजों को दे रही बड़ा दर्द

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  • मेडिकल इमरजेंसी तक पहुंचना मुश्किल, गेट नंबर-तीन पर लटका रहता है ताला, दो पर बेरिकेडिंग
  • नहीं गुजर पाते वाहन, मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर की दूरी, तय करना पड़ता दो किमी का सफर
  • इलाज में देरी की वजय से चली जाती है जान तक

ऋषिपाल सिंह |

मेरठ: प्रदेश सरकार मरीजों को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। मरीजों को अच्छी सुविधाएं मिले इसके लिये एक से एक योजनाएं चलाई जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को साधारण सुविधाएं मिल पाना भी मुश्किल है। इसका साफ उदाहरण मेडिकल कालेज में देखनों को मिला।

यहां इमरजेंसी सुविधाओं के लिये मरीजों को अपनी जान के साथ खिलवाड़ करना पड़ता है। मुख्य मार्ग से मात्र 100 मीटर की दूसरी पर स्थित इमरजेंसी वार्ड में मरीज को पहुंचने के लिये करीब एक से दो किमी का सफर तय करना पड़ रहा है इतने में चाहे उसकी जान क्यों न चली जाए।

हम बात कर रहे हैं शहर के मेडिकल कालेज की। जहां चिकित्सकों की ओर से मरीजों को इलाज देने की बड़ी बड़ी बाते की जाती हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ ओर ही है। मरीज अच्छा इलाज तो दूर इलाज पाने के लिये यहां तक पहुंचने में ही कड़ी मशक्कत करते हैं।

मेरठ मेडिकल कालेज में प्रवेश के लिये तीन मार्ग हैं। जिनमें गेट न. एक आवास की ओर जाता है। गेट नं.-दो मुख्य मार्ग है, जिससे मरीज ओपीडी के लिये और इमरजेंसी वार्ड की ओर भी जा सकता है, लेकिन यहां इमरजेंसी वार्ड की ओर जाने वाले मार्ग पर बेरिकेडिंग कर दी गई है, जिस कारण यहां से वाहन नहीं गुजर पाते और मरीजों को परेशान होना पड़ता है।

अब बात करते हैं गेट नं.-तीन की तो यह मार्ग सीधा इमरजेंसी वार्ड की ओर जाता है। यहां गेट नं.-तीन पर इमरजेंसी वार्ड मुख्य मार्ग से मात्र 100 मीटर की दूरी पर है, लेकिन इस गेट पर कालेज प्रशासन की ओर से ताला लगा दिया गया, जिस कारण यहां इलाज के लिये इमरजेंसी वार्ड में जाने वाले मरीज नहीं पहुंच पाते। यहां से वाहन नहीं गुजर पाते। हालात तो यहां तक खराब हैं कि गेट के दोनों साइड से गुजरने वाले मार्गों पर पाइप लगा है, जिस कारण यहां से मरीज नहीं प्रवेश कर पाते।

तय करना पड़ता लम्बा सफर

इमरजेंसी वार्ड में के सामने गेट पर ताला लगा होने के कारण मरीज को एक से दो किमी का सफर तय करना पड़ता है। मरीज गेट नं.-दो से प्रवेश कर मेडिकल थाने के सामने से घूमकर यहां से होते हुए पीछे की ओर से इमरजेंसी वार्ड पहुंचता है। इतने में मरीज की जान क्यों न चली जाए।

मरीज को जो इलाज पांच मिनटों में मिल सकता था उसके लिये उसे आधे घंटे से भी अधिक का समय लग जाता है। ऐसे में उन मरीजों की जान तक चली जाती है जिन्हें जल्द से जल्द उपचार देकर बचाया जा सकता था।

लोहे के पाइप कूदकर जाते लोग

मरीजों के साथ आने वाले तीमारदार यहां गेट पर लगी बेरिकेडिंग के ऊपर से कूदकर यहां से प्रवेश करते हैं और यहां से बाहर निकलते हैं। इससे यहां कभी भी हादसा हो सकता है। यहां तक कि महिलाएं भी बेरिकेडिंग के ऊपर से गुजर कर यहां पहुंचती हैं। यहां लोहे के पाइप लगे हुए हैं जिससे किसी को भी चोट पहुंच सकती है।

पार्किंग ठेकेदार करते हैं मनमानी

यहां दुकान चलाने वाले रमेश का कहना है कि पार्किंग ठेकेदारों की वजह से भी लोगों को परेशानी होती है। गेट नं.-दो पर जो बेरिकेडिंग की गई है। वह पार्किंग वालों ने की है जिससे वाहन चालक यहां अंदर न जा सके और पार्किंग वालों की कमाई होती रहे। उनका आरोप है कि पार्किंग वाले दुगनी रकम वसूलते हैं। जबकि पार्किंग संचालकों का कहना है कि बेरिकेडिंग मेडिकल कालेज प्रशासन ने ही कोराना काल के वक्त से कर रखी है।

कोविड, सुरक्षा को ध्यान में रखकर लगाया ताला

कालेज प्रशासन की ओर से कोविड और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर गेट नं.-तीन पर ताला लगाया गया है। यहां प्राइवेट एम्बुलेंस का जमावड़ा लग जाता था। मरीजों को बहलाकर इधर-उधर प्राइवेट नर्सिंग होम में ले जाया जा रहा था। मरीज भी कब बाहर निकल जाएं पता नहीं चल पाता था जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर तालाबंदी की गई। इसके अलावा कोविड मरीज भी बिना रजिस्ट्रेशन और चेकअप के प्रवेश कर रहे थे जिसके चलते बेरिकेडिंग की गई। अगर मरीज को किसी प्रकार की परेशानी हो रही है तो इस विषय पर ध्यान दिया गया है।
-डा. ज्ञानेन्द्र कुमार, प्राचार्य मेडिकल कालेज

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