Saturday, March 7, 2026
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28% लेते हैं कमीशन, 18 जीएसटी भी नहीं करते जमा

  • प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टोरलेंस नीति को पलीता

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में निर्माण विभाग में ठेकेदारी करने वाले दो ठेकेदारों ने गंभीर आरोप, अधिकारियों पर लगाए हैं। जिसमें एक तो 28 प्रतिशत कमीशन व दूसरा 18 प्रतिशत जीएसटी ठेकेदार से काटने व उसे सरकारी रिकार्ड में नहीं दर्शाने का गंभीर आरोप गाया है। यह तो जांच के बाद पता चलेगा कि ठेकेदार निगम अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए आरोप लगा रहे हैं। या फिर वह वास्ताव में निगम के अधिकारियों के उत्पीड़न से त्रस्त होकर आरोप लगा रहे हैं।

प्रीत विहार नौचंदी ग्राउंड निवासी ठेकेदार सर्वेश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर नगर निगम के मुख्य निर्माण लिपिक समेत कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उधर शनिवार को सीएम से की निगम के निर्माण लिपिक प्रदीप जोशी की शिकायत के मामले में एक अन्य ठेकेदार संजय सिंह ने भी गंभीर आरोप निगम के अधिकारियों पर लगाए। जिसमें दोनो ठेकेदारों के द्वारा जो आरोप लगाए वह यदि वह जांच में सही साबित हुए तो प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टोरलेंस नीति को पलीता लगाने वाले हो सकते हैं।

उधर दूसरी तरफ सर्वेश ठेकेदार के द्वारा सोतीगंज में एक टायल्स वाली सड़क का निर्माण कराया था,जिसमें स्थानीय लोगों ने उसके द्वारा कराए गए निर्माण को लेकर भी उसकी शिकायत की थी। जिसमें बिना टेंडर के दूसरे मार्ग पर टायल्स लगवाने का आरोप लगाया गया था। जनवाणी ने उक्त ठेकेदार के नियम विरूध निर्माण का मामला प्रकाशित किया तो ठेकेदार उक्त निर्माण को पार्षद की सहमति पर कराने की बात कही, लेकिन ठेकेदार का आरोप है कि उसका पांच लाख रुपये का जो निर्माण कार्य था, उसमें पचास हजार रुपये कम करके उसका साढेÞ चार लाख रुपये का भुगतान किया गया।

ठेकेदार सर्वेश व उसके बेटे का आरोप है कि नगर निगम में खुलेआम निर्माण पर 28 प्रतिशत कमीशन लिया जा रहा है। जिसमें ठेकेदार ठेका लेने के चक्कर में गुपचुप तरीके से सेटिंग कर ठेका लेने के साथ 28 प्रतिशत कमीशन देने को मजबूर हो जाते हैं। सर्वेश ठेकेदार का आरोप है कि निगम में 28 प्रतिशत कमीशन निर्माण कार्य पर लिया जाता है तो ठेकेदार किस स्तर का कार्य करेगा वह सभी को मालूम हैं। उधर संजय ठेकेदार का आरोप है कि निर्माण का पेमेंट समय पर नहीं होने के चलते एक ठेकेदार के द्वारा पूर्व में सुसाइड कर लिया गया था,

कई ठेकेदार डिप्रेशन में आकर बीमार हो गए। लेकिन उसके बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। निर्माण विभाग में ज्यादा भ्रष्टाचार व्याप्त है। संजय ने बताया कि सामान्य तौर पर 28 प्रतिशत कमीशन लिया जाता है यदि किसी ठेकेदार की अच्छी पकड़ है तो उससे 25 प्रतिशत ले लिया जाता है। संजय ठेकेदार का आरोप है कि सपा विधायक अतुल प्रधान ने निगम के भ्रष्टाचार का मामला विधान सभा में भी उठाया,उसके बाद भी हालात जस के तस हैं। संजय का आरोप है कि निगम में 4 श्रेणी के पंजीकरण होते हैं, जिसमें ए-बी-सी-डी।

पूर्व में सभी पंजीकरण को रिनुअल कराने के नाम पर पांच-पांच हजार रुपये लिए जाते रहे हैं। जबकि केवल निर्माण कार्य का ठेका ए श्रेणी वाले ठेकेदार को दिया जाता है, जबकि बी-सी-डी वाले श्रेणी के ठेकेदारों को ठेका दिया ही नहीं जाता यदि ठेका नहीं दिया जाता तो फिर पंजीकरण क्यों कराया जाता है। ठेकेदार से ली जाती है 18 प्रतिशत जीएसटी-रिकार्ड में नहीं दशाई जाती। ठेकेदार संजय का आरोप है कि सभी ठेकेदारों से 28 प्रतिशत कमीशन

ओर 18 प्रतिशत जीएसटी काटी जाती है, वह रिकार्ड में दर्शाई नहीं जाती, यदि उसकी जांच हो जाये तो यह एक करोडों रुपये का घोटाला सामने आ जायेगा। फिलहाल निगम में कुछ ठेकेदारों द्वारा अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। वह तो जांच के बाद पता चल सकेगा कि ठेकेदार सही आरोप लगा रहे हैं,या वह झूंठे आरोप ठेका लेने व पेमेंट कराने के लिए निगम अधिकारियों पर दबाव बनाने को लगा रहे हैं। फिलहाल आरोप गंभीर हैं, जिसकी जांच होना बेहद जरूरी है।

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