Saturday, February 7, 2026
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दयानंद के सपनों के गुरुकुल फिर से होंगे गुलजार

  • वेदो में समाहित है समस्त विद्याओं का मूल, ब्राह्मण जन्म से नहीं कर्म से होता है: डा. देवपाल आर्य
  • छोटे से तिनके से लेकर ईश्वर के आधीन समस्त ज्ञान वेद में निहीत है: स्वामी आर्यवेश

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बुढ़ाना गेट के निकट स्थित महाराणा प्रताप प्रांगण में चल रहे चार दिवसीय महर्षि दयानंद द्विजन्म शताब्दी समारोह के तीसरे दिन शनिवार को विभिन्न धार्मिक, शैक्षिणक एवं अध्यात्म कार्यक्रम आयोजित किये गये। तीसरे दिन समारोह में प्रात:कालीन सत्र में हवन यज्ञ के बाद आर्य युवा सम्मेलन, नारी सशक्तिकरण सम्मेलन के साथ वेद एवं अध्यात्म सम्मेलन आयोजित किए गये।

इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में स्वामी आर्यवेश एवं स्वामी डा. देवपाल आर्य ने सम्मेलन में आर्य समाज के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती के सपनों के गुरुकुलों में फिर से बहार आयेगी और गुलजार होंगे। इस दौरान गुरुकुल में पढ़ने वाली ब्रह्मचारिणी (छात्राओं) ने बताया कि देश में मैकाले की शिक्षा पद्धति से पूर्व देश में 7 लाख 32 हजार गुरुकुल थे।

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इस मौके पर एशियाई खेलों में जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक विजेता अन्नू रानी का प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मान भी किया गया। इस दौरान यूट्यूबर गौतम खट्टर एवं सत्यपाल ने भी मंच से आर्य समाज के बारे में विस्तार से बताया। समारोह के तीसरे दिन प्रात: आठ बजे से 9 बजे तक हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। 9 बजे से 12 बजे के बीच युवा सम्मेलन ओर 2 बजे से सांय 5 बजे तक नारी सशक्तिकरण सम्मेलन के साथ रात्रि में 7 से 10 बजे तक वेद एवं अध्यात्म सम्मेलन आयोजित किया गया।

युवाओं को वैदिक धर्म के प्रति कैसे किया जाये आकृषित

आर्य युवा सम्मेलन में युवा विद्वान आर्य डा. कपिल मलिक ने कहा कि युवा किसी भी देश की रीढ़ माना जाता है। जिसमें युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, किसी भी अभियान या कार्य की सफलता के लिये खासकर युवाओं की भागीदारी बेहद जरूरी होती है। उसके लिए युवाओं को आर्य समाज के कार्यक्रमों में शामिल होकर जागरूक होना बेहद जरूरी है।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को वैदिक धर्म के प्रति जागरूक होना चाहिए। बताया कि आर्यजनों को वैदिक सिद्धांतों की गहनता से अध्यन करने के पश्चात परिवार व समाज के युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने की जरूरत है। मुख्य संवादों में युवा निर्माण संवाद, संस्कृति संवाद, आध्यात्मिक संवाद, मातृ-पितृ संवाद, एवं राष्टÑ भक्ति संवाद शामिल हैं।

देश में फिर से गुलजार होंगे गुरूकुल

आयोजित सम्मेलन में कहा कि देश में एक समय 7 लाख 32 हजार से अधिक गुरुकुल हुआ करते थे, लेकिन मैकाले की शिक्षा पद्धत्ति के बाद गुरुकुलों की संख्या कम होती चली गई। लेकिन वर्तमान में गुरुकुल शिक्षा ही भारत देश को विश्व गुरु बना सकती है। जिसमें अब गुरुकुलों को बढावा दिया जाने लगा है। अब लगता है कि महर्षि दयानंद सरस्वती के सपनों के गुरुकुल फिर से गुलजार होंगे।

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इस दौरान बताया कि इस सृष्टि पर एक तिनके से लेकर ईश्वर परयंत्र जो भी है,वह सब समस्त ज्ञान वेदों में समाहित है। इस दौरान बताया गया कि ब्राह्मण जन्म से नहीं बल्कि कर्म से होता है वहीं जनेऊ के बारे में बताया कि जनेऊ से पथ भ्रष्ट होने से बचा जा सकता है। इस मौके पर सत्यपाल सिंह ने बताया कि 2075 तक आर्य समाज की देश में संकल्प शक्ति बढेÞगी ओर नई ऊर्जा के साथ देश के नहीं अपितु विश्व के प्रत्येक व्यक्ति तक आर्य समाज की जानकारी पहुंच सके।

नारी सशक्तिकरण सम्मेलन में नाटिका का मंचन

आयोजित सम्मेलन में नारी सशक्तिकरण पर भी विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर एशियाई खेलों में जैवलिन थ्रो में गोल्ड जीतकर देश व क्षेत्र का नाम रोशन करने वाली खिलाड़ी अन्नू रानी बहादरपुर को प्रतीक चिंह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान छात्राओं के द्वारा दीपदान नाटिका के माध्यम से पन्नाधाय के चरित्र का वर्णन किया और बताया कि नारी किसी से कमजोर नहीं होती यदि वह ठान लेती है तो वह कदम पीछे नहीं हटाती, नारी में यदि प्रेम है तो उसमें त्याग ओर तपस्या की भावना कूट-कूट कर भरी होती है।

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