जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान ने इस हत्या के बाद अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और न्याय दिलाने का वादा किया। हालांकि, उन्होंने ये भी साफ किया कि ऐसा तभी हो सकता है, जब उनकी पार्टी 2026 में होने वाले आम चुनाव में जीत हासिल करेगी।
17 साल बाद लंदन से लौटे तारिक रहमान के बांग्लादेश आते ही देश में सियासी तापमान बढ़ गया है। बीएनपी के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान शुक्रवार को जियाउर्रहमान की कब्र पर जाएंगे। इसी के साथ जुमे की नमाज में भी शामिल होंगे। इसके बाद रहमान आज राष्ट्रीय शहीद स्मारक का दौरा भी करेंगे।
दीपू दास की हत्या के बाद ढाका में प्रदर्शन
दीपू दास की हत्या के बाद ढाका और बांग्लादेश के अन्य हिस्सों में कारखाने के श्रमिकों, छात्रों और मानवाधिकार समूहों की ओर से व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। भारत ने भी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।
आज मतदाता के तौर पर पंजीयन कराएंगे तारिक रहमान
बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान शुक्रवार को मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराएंगे। उन्हें आज ही पहचान पत्र दिए जाने की संभावना है। रहमान शनिवार को बोगुरा-6 निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन पत्र लेंगे। यह आगामी संसदीय चुनावों में उनके सियासी मैदान में उतरने की ओर बड़ा इशारा है।
दीपू दास की हत्या के बाद ढाका और बांग्लादेश के अन्य हिस्सों में भारी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इस घटना के बाद कारखाने के श्रमिकों, छात्रों और मानवाधिकार समूहों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने दीपू दास की हत्या की निंदा की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
आज मतदाता के तौर पर पंजीयन कराएंगे तारिक रहमान
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान आज शुक्रवार को मतदाता के रूप में पंजीकरण कराएंगे। उनके पंजीकरण के साथ ही उन्हें पहचान पत्र दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह कदम आगामी संसदीय चुनावों में उनके सक्रिय रूप से भाग लेने की ओर एक महत्वपूर्ण संकेत है।
मुख्य सलाहकार के विशेष सहायक खुदा बख्श चौधरी ने दिया इस्तीफा
बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था के बिगड़ते हालात के बीच अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के विशेष सहायक, खुदा बख्श चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने बताया कि 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले सरकार को कानून और व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो रही थीं, जिसके चलते खुदा बख्श चौधरी का इस्तीफा आया।
सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि खुदा बख्श चौधरी को जुलाई में हुए विद्रोह के बाद 10 नवंबर, 2024 को विशेष सहायक नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति का उद्देश्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों, विशेष रूप से पुलिस बल में अनुशासन बहाल करना और उनके मनोबल को मजबूत करना था।

