
विजेन्द्र कोहली गुरदासपुरी |
समय की कद्र करना बच्चे बचपन में सीख जाएं। समय हमारे ऊपर से उड़ जाता है और अपनी छाया पीछे छोड़ जाता है। अत: वक्त को पकड़ कर उसे कर्म रूप में ढाल लेना चाहिए। आज की सुबह नहीं जानती कि शाम को क्या होगा, अत: सुबह ही सब काम निपटा लें। सुअवसर अक्सर दूसरी बार कम ही आता है क्योंकि आने वाला कल, बीते हुए कल से कभी ज्यादा अच्छा नहीं होता।
बच्चों को जीना सिखाना माता पिता का कर्तव्य है। मां-बच्चे की प्रथम गुरु है। सौ शिक्षकों से पिता को श्रेष्ठ माना गया है जो बच्चे की हर जिज्ञासा को शांत करता है। पहले तो उनका अपना नैतिक-जीवन और सामाजिक- जीवन पवित्र एवं उच्च होना चाहिए। बच्चों के भावी जीवन के सुख दुख को बनाने वाले वही हैं। बच्चे की गलत आदतों पर अंकुश लगाना और सही बात की प्रेरणा देना बच्चे का जीवन बना देता है।
एक बच्चे को चोर या श्रेष्ठ बनाना मां की जिम्मेदारी है। एक चोर को जब जेल हुई तो उसने माँ के कान में कुछ कहना चाहा-उसने मां के कान पर जोर से काटते हुए कहा कि मां-यदि मुझे बचपन में तूने चोरी करने से रोका होता तो मैं आज चोर न होता। कुछ बातें बचपन से ही बच्चों को सिखा देनी चाहिए ताकि वे संसार में जीना सीख जाएं।
हर व्यक्ति अपने अच्छे कामों से ही समाज में शोभा पाता है। बुरे कामों का नतीजा सदा बुरा ही निकलता है। हमारे काम बोलते हैं। जो जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है।
बच्चों को ऐतिहासिक पुरुषों की जीवनियों से प्रेरणा दें जैसे नेपोलियन जैसे लोग अपने सभी कार्य स्वयं करते थे। उनकी विचारधारा थी कि यदि आप कोई भी कार्य अच्छा एवं सफल करना चाहते हैं तो उसे स्वयं सम्पन्न करें। दूसरों पर निर्भर न करें। दूसरों से कभी ऐसा व्यवहार न करें जो आपको नागवार है।
अपने बच्चों को बताएं कि वे सदा वर्तमान और आज, अभी इसी वक्त में विश्वास रखें। अपने कार्य तुरन्त कर डालें। कल का भरोसा मत करें क्योंकि भविष्य कभी वर्तमान से सुन्दर नहीं होता वर्तमान को पकड़े बिना जीवन सुन्दर नहीं बन सकता।
आपका सुन्दरतम-सफलतम वर्तमान आपका सुखद भूतकाल बन जाता है। कर्मनिष्ठ लोग आज का काम कल पर कभी नहीं छोड़ते। आशा एवं फल की इच्छा के बिना निष्काम कर्म करो। इस विचारधारा की प्रतिध्वनि गीता ज्ञान की
ज्ञानगंगा है।
हर व्यक्ति की कथनी और करनी में जितना ज्यादा सामंजस्य एवं समन्वय होगा, उसका व्यक्तित्व उतना ही प्रभावशाली होगा। बिना कर्म के कोरे सिद्धांत-अंधे कुएं की भांति होते हैं। जिस कार्य को छिपाने की जरूरत पड़े उनसे बचें क्योंकि कर्मों की आवाज शब्दों की आवाज से ज्यादा होती है क्योंकि हर व्यक्ति अपने शुभ एवं अशुभ कर्मों का प्रतिफल अवश्य भोगता है। य: कुरूते स: मुक्ते का कथन हर युग में चरितार्थ होता है। जिन्दगी में वही शख्स है जीने के काबिल है जिस शख्स ने हालात का मुंह मोड़ दिया। आज का काम आज करें क्योंकि कल-कल करना आलसियों का गीत है। आज ही विवेक सहित अपना कार्य करें। कल कभी नहीं आता। कल भी आज के रूप में हमारे जीवन में आता है।
कई लोग कल्पनाओं के आलोक में घूमते रहते हैं। वे यथार्थ से सदा दूर रहते हैं। हम कल्पना लोक से हट जाएं, हवा के महल न बनाएं और व्यस्त रहें क्योंकि व्यस्त मनुष्य को फिजूल की बातों का समय नहीं होता। भावनाएं आसमान को छुएं परंतु पांव जमीन पर टिके हों। इस संसार में आलसी व्यक्ति कभी सुखी एवं समृद्ध नहीं हो सकता क्योंकि जो सोएगा सो खोएगा, जो जागेगा वह पाएगा। लक्ष्मी की कृपा जागने वाले पर ही होती है। बकरी के मेमने सोए हुए भेड़िए के मुंह में अपने आप नहीं आ जाते। मेहनत करनी पड़ती है। गिरी खाने के लिए बादाम को तोड़ना ही पड़ेगा। नदी टूट जाने पर बांध का क्या फायदा, नदी सूख जाने पर नाव किस काम की और दूध बिखर जाने पर चिल्लाने का क्या लाभ।
समय की कद्र करना बच्चे बचपन में सीख जाएं। समय हमारे ऊपर से उड़ जाता है और अपनी छाया पीछे छोड़ जाता है। अत: वक्त को पकड़ कर उसे कर्म रूप में ढाल लेना चाहिए। आज की सुबह नहीं जानती कि शाम को क्या होगा, अत: सुबह ही सब काम निपटा लें। सुअवसर अक्सर दूसरी बार कम ही आता है क्योंकि आने वाला कल, बीते हुए कल से कभी ज्यादा अच्छा नहीं होता।


