Friday, December 9, 2022
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‘मदरसा सिंडिकेट’ पर हाथ डालने से कतरा रहा प्रशासन!

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  • जांच में सच्चाई सामने आने के बावजूद कार्रवाई से क्यों भाग रहा विभाग

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मान्यता प्राप्त मदरसों की सच्चाई सामने आने के बाद भी स्थानीय प्रशासन की चुप्पी अपने आप में कई सवाल खड़े कर रही है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का कार्यालय पहले ही कठघरे में है। आरोप है कि जांच के नाम पर खूब खेल हुआ।

हाल यह है कि जिन मदरसों की जांच 2017 में पूरी कर ली गई और उनमें अनियमितताओं का खुलासा तक हो गया तो फिर अब किस आधार पर विभागीय अधिकारी उक्त मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। इन मदरसों की जांच में सच्चाई उजागर होने के बावजूद इन्हे मोहलत किस आधार पर दी जा रही है। सत्यापन में भ्रष्टाचार की परतें खुलने के बाद भी इन्हें सरकारी मदद किस आधार पर दी जा रही है।

सरकार की मदरसा आधुनिकीकरण स्कीम के तहत जिन मदरसों की शिकायतों के आधार पर जांच की गई उनकी सच्चाई से हम आपको भी अवगत करा दें। परीक्षितगढ़ ब्लॉक के ललियाना गांव के मदरसा इंतजार उल उलूम की जब सरकारी जांच हुई तो इस नाम का कोई मदरसा स्थलीय निरीक्षण में नहीं मिला। यह मदरसा सिर्फ कागजों में चल रहा है।

सात अध्यापकों वाले किठौर के मदरसा स्टार अल फलाह की जब जांच की गई तो जांच के समय टीम को न तो किसी भी अध्यापक की शैक्षिक योग्यता से संबधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया और न ही जांच टीम को कुल पंजीकृत छात्रों की संख्या का कोई रिकॉर्ड मिल पाया। हाल यह था कि जब जांच टीम यहां पहुंची तो मदरसे में एक भी छात्र टीम को नहीं मिला।

इन सभी तथ्यों का जिक्र जांच रिपोर्ट में बाकायदा किया गया है। मेरठ के मजीद नगर स्थित मदरसा फैजुल कुरान की जांच के दौरान टीम को न तो कोई अध्यापक मिला और न ही टीम को अध्यापक उपस्थिति पंजिका उपलब्ध कराई गई। इस मदरसे पर आरोप है कि यहां सिर्फ दिखावे के लिए मदरसे के नाम का बोर्ड टांग दिया गया है।

बिल्कुल यही स्थिति जाकिर कॉलोनी के मदरसा नूरुल उलूम की मिली। मेरठ के तारापुरी स्थित मदरसा इस्लामिया में जब टीम पहुंची तो यहां भी उसे भी विभाग को प्राप्त कराई गई सूची में से कोई भी अध्यापक नहीं मिला और यहां तक कि अध्यापक उपस्थिति पंजिका तक में उक्त अध्यापकों के नाम दर्ज थे।

मेरठ के पुर्वा फैयाज अली स्थित मदरसा इस्लामिया मुफीद ए आम में जब टीम पहुंची तो उसे मदरसा बंद मिला। जब टीम ने आसपास मदरसे की सच्चाई मालूम की तो पता चला कि इस मदरसे के प्रबंधक शमशाद हैं। टीम जब उनके पास पहुंची तो वो टीम को मदरसे से संबधित कोई भी अभिलेख उपलब्ध नहीं करा पाए। इसके अलाव कई अन्य मदरसों की हकीकत से टीम रुबरु हुई, लेकिन सभी मदरसे हकीकत से कोसो दूर थे।

इन सबके बावजूद स्थानीय प्रशासन उक्त फर्जी मदरसों के खिलाफ कार्रवाई से क्यों कतरा रहा है यह तो वही जाने, लेकिन आरोप है कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय इस समय पूरी तरह से मदरसा माफियाओं के शिकंजे में आ चुका है और यही माफिया कार्रवाई में बाधक बन रहे हैं।

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