Tuesday, April 23, 2024
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पेयजल परियोजना को पूरा कराने को ‘पत्राचार का शिष्टाचार’

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  • परियोजना का खर्च भी 313 करोड़ से बढ़कर 400 करोड़ के पार जा चुका
  • गोलाकुआं में बने भूमिगत जलाशय के उपकरण चोरी के चर्चित मामले का आज तक नहीं हो सका खुलासा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना जेएनएनयूआरएम के जरिये मेरठ महानगर को शुद्ध पेयजल आपूर्ति करने का काम 15 सालों में भी पूरा नहीं हो सका है। इसमें बार-बार कोई न कोई व्यवधान आ रहा है और परियोजना का खर्च भी 313 करोड़ से बढ़कर 400 करोड़ के पार जा चुका है।

इस परियोजना को पूरा करने के लिए जल निगम की ओर से संबंधित फर्म के साथ अभी तक ‘पत्राचार का शिष्टाचार’ निभाया जा रहा है। गोलाकुआं में बने भूमिगत जलाशय के उपकरण चोरी के चर्चित मामले का आज तक खुलासा नहीं हो सका है, जिसको दुबारा चालू करने में 22 लाख से अधिक का खर्च बताया गया है।

मेरठ महानगर को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए 313 करोड़ की एक परियोजना को वर्ष 2007 में हरी झंडी मिली थी, जिसको पूरा करने के लिए जल निगम की देखरेख में कराने के लिए प्रतिभा कंस्ट्रेक्शन फर्म को ठेका दिया गया था। इसके अंतर्गत महानगर में पाइप लाइन बिछाने, ओवरहेड टैंक बनाने के साथ-साथ भोला झाल पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया गया।

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यह काम होते-होते 13 साल का समय गुजर गया, जिसके बाद वर्ष 2016 में अतिरिक्त धन की जरूरत पड़ी। केन्द्र से धन मिलने के बावजूद आज तक योजना का काम पूरा नहीं हो सका है। शहर के अधिकतर हिस्सों तक पानी पहुंचाने के लिए सर्किट हाउस, शर्मा स्मारक, टाउन हाल, विकासपुरी, नौचंदी ग्राउंड, शास्त्रीनगर, गोला कुआं, माधवपुरम और बच्चा पार्क में नौ भूमिगत जलाशय (जोनल पंपिंग स्टेशन) बनाए थे।

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इनमें से सर्किट हाउस, शर्मा स्मारक, टाउन हाल और विकासपुरी, शास्त्रीनगर, नौचंदी ग्राउंड, बच्चा पार्क, माधवपुरम में कुछ दिन पूर्व तक पानी भरने का काम किया जा चुका है। जबकि गोला कुआं पंपिंग स्टेशन के उपकरण चोरी हो जाने के कारण इसे आज तक चालू नहीं किया जा सका है। जिस कारण नगर के एक बड़े हिस्से तक गंगाजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

जहां की स्थिति यह है कि उसके एक हिस्से को डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया गया है। भूमिगत जलाशय परिसर को देखने और उसका रखरखाव कराने की व्यवस्था कराने को कोई भी विभाग आज भी तैयार नहीं है। ऐसे में यहां लगे बाकी सामान को असामाजिक तत्व फिर ले उडेंÞगे, इस आशंका को नकारा नहीं जा सकता। इस बारे में सहायक अभियंता जल निगम बलबीर सिंह का कहना है कि गोलाकुआं में सामान चोरी हो जाने के कारण प्रोजेक्ट चालू नहीं सका है।

यहां से चोरी गए सामान को दुबारा लगाने में 22 लाख से अधिक खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। यह धनराशि कौन देगा, अभी तक नगर निगम, जल निगम और संबंधित फर्म इसी सवाल का जवाब तलाश करने में लगे हैं। हालांकि सहायक अभियंता बलबीर सिंह का यह भी कहना है कि बंद पड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए संबंधित फर्म के साथ पत्राचार किया गया है।

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जिसके संबंध में कई बार अनुस्मारक भी भेजे जा चुके हैं। कंपनी की ओर से इस बारे में मिले जवाब के बारे में पूछने पर उनका कहना था कि कंपनी इस काम को पूरा कराने के लिए एक फर्म की तलाश कर रही है, जिसके माध्यम से यह कार्य कराया जा सके। इसके अलावा 2027 को ध्यान में रखकर 100 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है।

मांग के अनुसार ही प्लांट से गंगाजल की आपूर्ति बढ़ाई जानी है। लाइन से कनेक्ट होने से बचे जोनल पंपिंग स्टेशनों को फिलहाल नलकूप से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इन्हें जोड़ने के लिए बनाई गई डीपीआर शासन को भेजी गई है।

जलापूर्ति की ये है मौजूदा स्थिति

शहर में 157 नलकूप, 57 ओवर हेड टंकी, 10 एचपी के 500 छोटे सबमर्सिबल, वन एचपी के तीन हजार सबमर्सिबल, 10 हजार हैंडपंप और 10 हजार निजी सबमर्सिबल के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है।

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