मैं हफ्ते में एक दिन आफिस जाने वाला हर महीने कोई न कोई खोज करता रहता हूं। मेरी खोजों के पेटेंटों की लिस्ट देखकर आप मुझे वैज्ञानिक भी कह सकते हैं। अपनी खोजों की लिस्ट बढ़ाते हुए कल मैंने गैस महंगी होने पर बिन गैस जलाए रोटी बनाने की सफल खोज की तो मेरा खाली गैस सिलेंडर वाह! वाह! कर उठा। मैं अपनी खोज पर इतराता मंडराता एकबार फिर फूल कर कुप्पा हुआ। मेरे पांव थे कि किचन में टिक ही नहीं रहे थे। अभी मैं अपनी इस अभूतपूर्व खोज की सफलता का जश्न मना ही रहा था कि सामने खोजों के देवता! पता नहीं मेरे साथ हरबार ऐसा क्यों होता है कि जब जब मैं अपनी खोज की सफलता का जश्न मना रहा होता हूं कि अचानक कोई न कोई बीच में आकर रंग में भंग डाल देता है। अजीब बात है इस जमाने की भी! यहां पर पता नहीं क्यों किसीको किसीके जश्न सहन नहीं होते? पेटेंट देवता ने मुझसे मुस्कुराते पूछा, ‘वत्स! आज तुम्हारे जश्न का कारण?’
‘हे पेटेंट देवता! आज मैंने बिन गैस जलाए रोटी बनाने की सफल विधि की खोज कर ली है। अब होती रहे जितना महंगा गैस को होना हो। चलाते रहें अब जब तक उन्हें युद्ध चलाना हो ,’ कहते कहते मुझे खुद पर गर्व हुआ। बाद में सबकी तरह मेरा गर्व भी अहंकार में बदल जाए तो बदल जाए। वैसे भी गर्व की पराकाष्ठा अहंकार होता है।
‘वैरी गुड! बधाइयां!’ पेटेंट देवता ने कहा और मंद मंद मुस्कुराने लगे। फिर कुछ देर तक मंद मंद मुस्कुराने के बाद बोले,‘और?’
‘और तुम्हें तो पता ही है कि मैंने राहु पर पानी का पता भी लगा लिया है।’
‘और?’
‘केतु पर मैंने दस कनाल का प्लॉट भी बुक करा लिया है।’
‘गुड! और?’
‘और मुझे पता चल गया है कि शुक्र पर भी जीवन है।’
‘गुड! और?’
‘और बृहस्पति पर वायु भी मैंने खोज ली है।’
‘और?’
‘और बुध पर घने जंगल भी मैंने खोज लिए हैं। अब देखना पेटेंट देवता! वह दिन दूर नहीं जब मैं ….जब मैं….’ कह मैंने दम घोटू हवा में सांस लेने की पूरी कोशिश की तो वे मृदु मृदु बोले,‘अच्छा किया तुमने वहां पानी खोज लिया। पर क्या कभी तुमने अपने यहां के पानी के बारे में भी सोचा? वहां पानी ढूंढ रहे हो और जो पानी तुम्हारे यहां युगों से है उसे दूषित करने पर तुले हो डियर! बेहतर हो वहां पानी ढंूढने से पहले अपने यहां के पानी के बारे में सोचो तो तुम्हारा जीवन चलता रहे।
अच्छा किया तुमने वहां भी जमीन खोज ली। पर क्या कभी तुमने अपने यहां की जमीन के बारे में भी सोचा? उस जमीन के बारे में जो तुम्हारे खड़ै रहने का आधार है। कल को जो तुम्हारे पांव के तले से वह सरक जाए तो तुम कहीं के न रहो। अरे पगले, वहां जमीन ढूंढने से पहले बेहतर हो कि जो जमीन तुम्हारे पास है, पहले उसे सुंदर बनाओ। उसके बाद नई जमीनें ढूंढो।
अच्छा किया तुमने वहां भी जंगल खोज लिए। पर क्या कभी तुमने अपने यहां के जंगलों के बारे में भी कभी सोचा? डियर! वहां जंगल ढूंढने से पहले जो जंगल तुम्हारे पास हैं उन्हें बचाओ तो बात बने।
अच्छा किया तुमने वहां भी वायु खोज ली। पर क्या कभी तुमने अपने यहां की वायु के बारे में भी कभी सोचा जिसे तुम अपने कारनामों से दिन पर दिन दूषित करते जा रहे हो? जो वायु अब सांस लेने लायक भी नहीं बची है। कल को ये वायु जो सांस लेने कहीं और चली गई तो तुम कहीं के न रहो डियर! वहां वायु ढूंढो! जरूर ढूंढो! पर वहां वायु ढूंढने से पहले बेहतर हो जो वायु तुम्हारे पास है पहले उसे सांस लेने योग्य बनाए रखो।
वैरी गुड! ग्रेट अचीवमेंट ! तुमने वहां भी जीवन खोज लिया। पर क्या कभी तुमने अपने यहां के जीवन के बारे में भी सोचा? उस जीवन के बारे में जो बड़ी मुश्किल से मिलता है। तुम मानो या न, पर नरक बन गया है यहां का जीवन तुम्हारे कारनामों से। तुम्हारी हरकतों से जो कल को ये जीवन न रहा तो तुम्हारे वहां के जीवन की खोज किस काम की डियर!
पर नहीं, तुम्हें तो लगता है जीने का अधिकार यहां पर केवल और केवल तुम्हारा है। यहां के जीवन को बचाने के बाद नई जगहों पर जीवन ढूंढो। खुशी से ढूंढो। तब मैं भी तुम्हारे साथ नए ग्रहों पर नया जीवन ढूंढने चलूंगा, पर पहले अपने यहां के जीवन के बारे में सोचो जो तुम्हें उपहार में मिला है,’आदमी तो आदमी , पता नहीं ये देवता भी आदमी की उपलब्धियों से क्यों ईर्ष्या करते होंगे? बंधुओ! ईर्ष्या कहीं हर लोक का सतोगुण तो नहीं।

