- आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम और एसपी सिटी आॅफिस बनाने के लिए पुलिस विभाग ने यहां मांगी है जमीन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: किराये की शर्तों का पालन न करने को आधार बनाते हुए जिला पंचायत अधिकारियों ने बुधवार को अधिकारियों की टीम और भारी संख्या में पुलिस बल के साथ तिरंगा गेट पहुंचकर मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर बस यूनियन को किराये पर दी गई भूमि पर कब्जा ले लिया है। इसी के साथ तिरंगा गेट के पास एसपी सिटी कार्यालय और मॉडर्न पुलिस कंट्रोल रूम की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी में बताया कि तिरंगा गेट के पास जिला पंचायत की खसरा नंबर 4227 और 4228 रकबा 1068.23 वर्ग मीटर भूमि को मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर बस आॅपरेटर यूनियन ने किराये पर लिया हुआ था। गौरव चौधरी के मुताबिक यूनियन ने किरायेदारी की शर्तों का पालन नहीं किया। जिसके आधार पर जिला पंचायत ने किरायेदारी का अनुबंध रद कर दिया। बुधवार दोपहर बाद अपर नगर मजिस्ट्रेट संजय सक्सेना और थाना प्रभारी सुबोध कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल और जिला पंचायत के अभियंता एसके गुप्ता और टीम ने मौके पर पहुंचकर उपरोक्त भूमि पर कब्जा ले लिया है।
गौरतलब है कि नौचंदी मैदान में तिरंगा गेट के पास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम और एसपी सिटी कार्यालय बनाने के लिए 4000 वर्ग मीटर भूमि की जिला पंचायत से मांग की हुई है इस सिलसिले में 14 मार्च को हुई जिला पंचायत बोर्ड बैठक में पुलिस कंट्रोल रूम एसपी सिटी कार्यालय बनाने के लिए पुलिस विभाग को भूमि देने के संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है बुधवार को हुई इस कार्रवाई के बाद करीना गेट के पास आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम और एसपी कार्यालय बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
कोर्ट में विचाराधीन वाद के बीच जिपं की कार्रवाई अनुचित: यूनियन
मेरठ-हापुड़-बुलन्दशहर आॅपरेटर यूनियन के पदाधिकारियों ने जिला पंचायत की कार्रवाई को गलत करार देते हुए कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है। जिसके संबंध में आज जजमेंट की तारीख भी लगी हुई है। यूनियन के पदाधिकारी हाजी इमरान का कहना है कि बस स्टैंड के लिए करीब दो दशक से प्रयुक्त की जा रही जिला पंचायत की इस भूमि का किराया 26 हजार रुपये महीना निर्धारित रहा है। कोरोना काल के दौरान बसें बंद हो जाने के चलते किरायेदारी का अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

इस अवधि में विभिन्न मार्गो पर चलने वाली 65 बसें खड़ी रहीं, लेकिन जिला पंचायत ने इस अवधि का भी किराया देने के लिए यूनियन से मांग रखी। यूनियन की ओर से इस संबंध में एक वाद कोर्ट में दायर किया हुआ है। जिसका निर्णय गुरुवार यानी 27 अप्रैल को आना है। इससे एक दिन पहले ही जिला पंचायत ने कार्रवाई करते हुए उनके स्टाफ को मौके से हटाकर कब्जा ले लिया है। जिला पंचायत की इस कार्रवाई से 65 बसों से जुड़े सैकड़ों परिवार एकदम से बेरोजगारी के कगार पर आ गए हैं।
छह मार्गों पर होता है बसों का संचालन
मेरठ-हापुड़-बुलंदशहर बस आॅपरेटर यूनियन के माध्यम से चलने वाली 65 बसों के जरिये छह मार्गों पर संचालन किया जाता है। इनमें मेरठ- बुलंदशहर, मेरठ-धौलाना, मेरठ-स्याना, मेरठ-दनकौर, मेरठ-हरोड़ा और मेरठ-पिलखुवा मार्ग शामिल हैं।

