Tuesday, March 24, 2026
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साजिशकर्ता गए जेल, शूटरों का पता नहीं

  • रिमांड पर लेगी तीनों आरोपियों को
  • राज्य के बाहर की फोरेंसिक लैब में जाएगी जांच

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम के पार्षद जुबैर अंसारी की हत्या के मामले में पुलिस को चकमा देकर तीन साजिशकर्ता नदीम, जब्बार और हाजी फतेहआब सीजेएम कोर्ट में सरेंडर करके जेल चले गए। अहम् सवाल यह है कि शूटरों का कौन पकड़ेगा? पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। वहीं हत्या में प्रयुक्त पिस्टल की राज्य के बाहर स्थित फोरेंसिक लैब में जांच कराई जाएगी।

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पुलिस छह महीने से शूटरों का पता लगाने का दावा कर रही है। कभी उसे शूटरों की लोकेशन हरियाणा मिलती है तो कभी उसे गाजियाबाद का बताया जाता है। पुलिस कई महीने तक दिलशाद को आरोपी बनाने और न बनाने के उधेड़बुन में लगी रही। मेडिकल पुलिस के अलावा इसमें सीओ कोतवाली को भी लगाया गया था। पुलिस अधिकारियों के तमाम दावों के बावजूद शूटर हाथ नहीं लगे हैं।

पार्षद जुबैर अंसारी की हत्या में नामजद किये गए हाजी फतेहाब, नदीम और जब्बार ने बुधवार को सीजेएम की कोर्ट में सरेंडर कर दिया जहाँ से अदालत ने तीनों आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। शास्त्रीनगर में एल ब्लॉक में संतोष नर्सिंग होम के पास पार्षद जुबैर अंसारी का मकान है। वैसे पार्षद ढबाई नगर में परिवार के साथ रहता था। 28 अगस्त को सुबह साढ़े 10 बजे के करीब जुबैर अपनी स्कार्पियो से ढबाई नगर से आया था।

उसे घर में गाड़ी खड़ी करके स्कूटी से जाना था। जुबैर के साथ उसका पार्टनर सादिक भी था। जैसे ही जुबैर स्कार्पियो खड़ी करके उतरा तभी एक बदमाश में मुंह में कपड़ा बांध कर आया और उसने पिस्टल निकाल कर फायरिंग कर दी। जुबैर को जैसे ही गोली लगी वो भागा तभी शूटर ने दो गोली और मार दी। इस मामले में हाजी फतेहआब, जब्बार और नदीम पर शक की सुई गहराई गई थी।

इस पूरे मामले में पुलिस को एक अहम् पहलू हाथ लग गया था। जुबैर की जिस पिस्टल से हत्या की गई थी, उसी तरह की पिस्टल से एक साल पहले भी जमीन को लेकर हत्या हुई थी। यही जुबैर हत्याकांड के आरोपी हाजी फतेहआब के बेटे सालिम ने भी उसी बोर की पिस्टल से सुसाइड किया था। पुलिस इसकी फोरेंसिक रिपोर्ट को लेकर उत्साही थी। निवाड़ी स्थित लैब में इसे जांच के लिये भेजा गया था।

सूत्रों ने बताया कि उस लैब में खेल हो गया और एक ही तरह की पिस्टल से निकली गोलियों का मिलान नहीं हो पाया। वहीं, पुलिस छह महीने से अदालत से आरोपियों के घर की कुर्की के आदेश मांग रही थी। पुलिस जब तक कुछ करती हत्या के आरोपियों ने सरेंडर कर दिया।

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