Monday, March 16, 2026
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स्टेडियम के ट्रैक पर उड़ रही लापरवाही की धूल

इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि जिस स्टेडियम से निकलकर कई खिलाड़ी अपनी पहचान बना चुके हैं और अन्य खिलाड़ियों ने प्रतियोगिताओं में तमाम पुरस्कार जीतकर शोहरत की बुलंदी हासिल की। उसी कैलाश प्रकाश स्टेडियम में न मानक के अनुरूप ग्राउंड है और न ही एथलेटिक्स ट्रैक और न ही जिम। ये तो खिलाड़ियों की जिजीविषा और हिम्मत है जो उन्हें आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रेरित कर रही है। संसाधनों की जिस स्तर से बढ़ोतरी होनी चाहिए वो लाख कोशिशों के बावजूद नहीं हो पा रही है। लालफीताशाही के चलते सबकुछ कछुवा गति से चल रहा है। ये तो सौभाग्य है कि अब जिले के सरधना क्षेत्र के सलावा गांव में खेल विश्वविद्यालय की सौगात मिल चुके हैं। जिले को खेल विभाग की ओर से खेल विश्वविद्यालय नसीब हो गया। तरक्की के तमाम पैमाने यूं तो खेल जगत में गढ़ने में क्रांतिधरा भी पीछे नहीं रही है, लेकिन खिलाड़ियों की शोहरत और बुलंदियों को देखते हुए उनके उत्साहवर्धन के लिए सरकारी तौर पर कभी भी खुले दिल से प्रयास नहीं किए गए हैं। नतीजा आपके सामने हैं।

  • कैलाश प्रकाश स्टेडियम में नहीं है सिंथेटिक ट्रैक, उड़ती धूल पर दौड़ लगाने को विवश है खिलाड़ी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: क्रांतिधरा का नाम अब खिलाड़ियों के शहर के रूप में भी जाना जाने लगा है, लेकिन यहां रहने वाले खिलाड़ियों को आज भी आधुनिक खेल सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है। खिलाड़ी लंबे समय से स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक लगाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग पर शासन ध्यान नहीं दे रहा है। अब एक नया प्रकरण सामने आया है। जिसमें ट्रैक पर दौड़ लगाने वाले खिलाड़ियों के धूल से बीमार होने की खबर है।

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स्टेडियम में प्रैक्टिस करने वाले काजीपुर के रहने वाले एथलीट सुमित ने बताया वह 100-200 मीटर टैÑक इवेंट का धावक है। वह पिछले लंबे समय से स्टेडियम में प्रैक्टिस करने आ रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है। खिलाड़ी ने बताया कि शुक्रवार शाम वह स्टेडियम में प्रैक्टिस करने के बाद घर के लिए निकला था। तभी उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी।

किसी तरह वह घर पहुंचा और परिजनों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिवार के सदस्य उसे पास में ही प्रैक्टिस करने वाले डाक्टर जैदी के पास लेकर पहुंचे। डाक्टर ने सुमित की जांच की तो उसके गले में इंन्फेक्शन बताया। साथ ही उसे कुछ दिनों तक घर में रहकर आराम करने की सलाह दी, लेकिन सुमित को आज स्टेडियम में होने वाली मंडलीय इवेंट प्रतियोगिता में शामिल होना है ऐसे में वह आराम नहीं कर सकता।

सुमित का कहना है कि स्टेडियम में दौड़ लगाते समय ट्रैक से उड़ने वाली धूल उसकी सांस के साथ गले में जम जाती है। काफी दिनों से उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है। वहीं कुछ दिन पहले भी वह जमीन पर दौड़ लगाते समय घायल हो गया था। जिसके बाद उसे 15 दिन तक पै्रक्टिस से दूर होना पड़ा था। इस दौरान उसने घर पर रहकर अपना इलाज कराया जिसमें उसके करीब 15 हजार रुपये खर्च हुए।

सिंथेटिक ट्रैक न होना भी एक बड़ा कारण

खिलाड़ी सुमित ने बताया कि उसके साथ होने वाली यह घटनाएं अकेली नहीं है और भी कई खिलाड़ी सिंथेटिक ट्रैक न होने के कारण चोटिल व बीमार हो रहे हैं, लेकिन वह अपने खेल में किसी तरह की बाधा न आए इसको देखते हुए खामोश है।

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सिंथेटिक ट्रैक मेरठ स्पोर्ट्स स्टेडियम की बड़ी मांग है। यहां से कई अंतराष्टÑीय स्तर के खिलाड़ी निकले हैं, लेकिन सुविधाओं के आभाव में आज भी खिलाड़ी अपने जीवन को जोखिम में डालते हुए यहां प्रैक्टिस कर रहे हैं।

राज्यमंत्री सीएम से कर चुके हैं सिंथेटिक ट्रैक की मांग

यूपी सरकार में राज्यमंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर ने भी गत पांच सिंतबर को लखनऊ में सीएम योगी से मिलकर मेरठ के स्टेडियम में सिंथेटिक टैÑक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही कई बार खिलाड़ियों ने शासन स्तर पर भी अपनी मांग को उठाया है, लेकिन आज तक उनकी मांग पर कोई निर्णय नहीं हो सका है।

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