Saturday, June 15, 2024
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चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय में गूंजी सत्य की गूंज

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चौधरी चरण सिंहविश्वविद्यालय में ऑनलाइन आयोजित कराए जा रहे व्यास समारोह दूसरे दिन अन्तर्महाविद्यालय वाद विवाद प्रतियोगिता एवं यौगिक बल का प्रदर्शन किया गया।

अन्तर्महाविद्यालय वाद विवाद प्रतियोगिता का विषय था हम महान सौभाग्य के लिए सत्य बोलें।जिस पर छात्र छात्राओं ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। पक्ष में रहने वाली दिव्या ने सत्य को ही सौभाग्य का मूल मानते हुए कहा है कि सत्य के द्वारा ही मानसिक व आत्मिक बल प्राप्त होता है। सत्यपालक सत्कर्मों को करता हुआ सुख प्राप्त करता है।

बाल्यकाल से ही सत्य का पालन करने के कारण युधिष्ठिर का रथ भूमि से दो हाथ ऊपर चलता था। ऐसी केवल सत्या की ही महिमा है। समेधा का मानना है कि सत्य का पालन करने से ही सौभाग्य की प्राप्ति हो सकती है अन्यथा नहीं।

वेद, उपनिषद आदि के उदाहरण द्वारा सत्य की महिमा का वर्णन किया। वही विपक्ष में ने वाली कीर्ति मिश्रा का मानना है। वर्तमान समाज में सत्य सभी का मूल है। ऐसा मानना केवल पुस्तकीय वार्ता है। भौतिक धरातल पर व्यवहार में सत्य कोई सहायता नहीं करता। सत्य के द्वारा सामान्य जीवन व्यापन सम्भव ही नहीं है।

क्योंकि सत्यं अत्यधिक कटु होता है और सत्यवादी किसी का भी प्रिय नहीं होता। वन्दना का मानना है कि सत्य का पालन करने के कारण राजा हरिशचन्द्र को अपना सर्वस्व त्यागना पड़ा और राजा युधिष्ठिर का सम्पूर्ण जीवन कष्ट में व्यतीत हुआ।

अपने-अपने मत की पुष्टि में उन्होंने महाभारत, चार्वाक दर्शन, रामायण, वेद जैसे ग्रन्थों के एवं महात्मा गांधी, नेता, अभिनेता आदिलौकिक उदाहरण भी प्रस्तुत किए। द्वितीय सत्र में यौगिक बल प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जो डा. राजवीर आर्य के निर्देशन में हुआ।

जिसमें मस्तक पर दीपक रखकर वज्रासन, गरुडासन, त्रिकोणासन आदि जैसे अनेको आसनों को दिखाया गया तथा उन आसनों से होने वाले लाभ के विषय में भी बताया गया। योग हमारे जीवन में स्वास्थ्य संवर्धक है योग ही सभी बीमारियों को नष्ट करने वाली औषधि है।

हातों ने मस्तक, गर्दन से लोहे के सरिये को मोड़ कर यौगिक बल प्रदर्शित दर्शकों को आश्चर्यचकित एवं रोमांचित कर दिया। जैसे चलती बाइक पर शीर्षासन करना और वेग से चलती बाइक को एक हाथ से रोकना आदि दिखाया गया।

निर्णायक के रूप में गोरखपुर के डा. चन्द्रशेखर, सरिता रस्तोगी, डा. गीता शुक्ला मौजूद रहे। समारोह में डा. पूनम लखनपाल, डा. संतोष कुमारी, डा. राजवीर आर्य, डा. नरेन्द्र कुमार आदि मौजूद रहे।

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