Tuesday, March 24, 2026
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Govardhan Puja 2025: श्रीकृष्ण चालीसा पाठ से मिलेगा सुख-समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: दिवाली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा इस बार भी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होता है, जिसमें भक्त गोवर्धन पर्वत की पूजा कर श्रीकृष्ण द्वारा इंद्रदेव के अभिमान को तोड़ने और गोकुलवासियों की रक्षा करने की लीला को याद करते हैं।

गोवर्धन पूजा और श्रीकृष्ण चालीसा का महत्व

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें भक्त 56 भोग यानी छप्पन व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करते हैं। इस दिन श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। चालीसा की 40 चौपाइयों में श्रीकृष्ण के बालरूप, गोकुल की लीलाओं और अर्जुन को दिए गए गीता ज्ञान का उल्लेख होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गोवर्धन पूजा के दिन श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ करने से—

जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

संकट, भय और मानसिक तनाव दूर होते हैं।

भक्त को आत्मिक बल और स्थिरता की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

पूजा स्थल को फूलों, दीपों और तुलसी दल से सजाएं।

श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं।

मक्खन, मिश्री और अन्नकूट का भोग लगाएं।

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

फिर श्रद्धा से श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ करें।

अंत में आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।

श्रद्धा और भक्ति से जुड़ा पर्व

गोवर्धन पूजा न केवल पौराणिक कथा से जुड़ी है, बल्कि यह प्रकृति, अन्न और जीवन के रक्षक भगवान कृष्ण के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि संकट की घड़ी में ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं।

श्री कृष्ण चालिसा

दोहा :
श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
हे नाथ नारायण वासुदेवा।।

चौपाइयां :

जय वसुदेव देवकी नंदन।
जय यशोदा जीवन आनन्दन।।

नंद भवन आनंद बढ़ायो।
जब से तू गोकुल में आयो।।

माखन मिश्री लसत मुकुट सिर।
कन्हैया लला सबके मनहर।।

बंसी बजावत बन विहार।
गोपिन संग रचावत प्यार।।

कालिया नाग दमन कर डारो।
गिरधर रूप धरो भय हारो।।

गाय चरावत बृज में धावो।
राधा रानी मन भा जावो।।

गोवर्धन जब ऊपर धारो।
इन्द्र गरज को तुम संहारो।।

सुदर्शन चक्र तुम्हारे पासा।
दैत्यों का तुम मिटावो त्रासा।।

अर्जुन को गीता ज्ञान दिया।
धर्म रथ का तू ही सारथी बना।।

कौरव पांडव का जब रण हो।
तब तू ही बनकर रणधीर हो।।

भीष्म पितामह के शर सैया।
तू ही दर्शन दियो प्रभु भैया।।

शिशुपाल और कंस संघारी।
दुष्टन को तू तारनहारी।।

मीराबाई प्रेम दीवानी।
नाम जपै दिन-रैन सयानी।।

विदुर गृह भोजन को आयो।
सुदामा का दुःख हर लायो।।

रसखान तुलसी सूरदास।
गावे गुण तेरे प्रभु खास।।

जो कोई चालीसा पढ़े।
श्रीकृष्ण कृपा सदा उस पर चढ़े।।

दोहा :
श्रीकृष्ण चालीसा जो नित करे विचार।
सदा बसे राधे संग उसके घर बार।।

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