साढ़े छह फीट हाइट के सचिन यादव बनना चाहते थे तेज गेंदबाज
लॉक डाउन के दौरान खेतों में बना लिया था मैदान
पड़ोसी हैड कांस्टेबल ने भाला फेंक की दिखाई राह
अमित पंवारl
बागपत: साढ़े छह फीट हाइट, शरीर में बेहद मजबूत, हाथ में भाला और सामने देश के भविष्य की थ्रो। यह उस भविष्य के सितारे का परिचय है, जो आज समूचे देश का आकर्षण बन गया है। पदक भले ही न जीता हो, लेकिन हर किसी की नजरें उस पर टिक गई है। हर कोई भविष्य का जैवलिन थ्रोअर मान बैठा है। जी हां, यह परिचय है खेकड़ा की पगडंडियों से टोक्यो में विश्व एथलीट चैंपियनशिप में चौथा स्थान प्राप्त करने वाले सचिन यादव का। यूपी पुलिस के इस जवान ने एक तेज गेंदबाज बनने का सपना संजोया था, लेकिन पड़ोसी यूपी पुलिस में हैडकांस्टेबल ने उसे भाला फेंकने की सलाह दी। जिसके बाद सचिन ने अपना खेल बदला और संसाधनों कमी, सीमित आय के बीच खेल को निखारने में जुट गया। परिणाम पूरे देश के सामने है।
खेकड़ा निवासी किसान नरेश यादव के पुत्र सचिन यादव से आज पूरा देश परिचित हो गया है। टोक्यो की सरजमीं पर हर किसी की नजर देश के स्टार खिलाड़ी नीरज चौपड़ा पर थी, लेकिन जैसे ही सचिन यादव का नाम पुकारा तो हर किसी की नजर उस पर टिक गई। नीरज ने आठवां स्थान प्राप्त किया और सचिन ने चौथा स्थान प्राप्त कर टॉप छह में अपनी जगह बनाई। अगर बात सचिन के खेल और उसकी शुरुआत की करें तो उसने तमाम बाधाओं को पार किया। तमाम मुश्किलों का सामना किया, सीमित संसाधनों से खेल को निखारा।
सचिन जैवलिन थ्रो का भविष्य का सितारा बन गया है, लेकिन एक समय था जब वह क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाना चाहता था। साढ़े छह फीट हाइट का फायदा उठाते हुए वह तेज गेंदबाजी करता था। गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी भी वह शानदार करता था। दोनों अच्छी होने के कारण एक आॅलराउंडर उसमें देखा जाता था, लेकिन उसे लगा कि क्रिकेट में उससे अच्छे खिलाड़ी देश में है, तो उसने खेल बदलने का विचार किया। तभी उसके पड़ोसी एवं यूपी पुलिस में हेड कांस्टेबल संदीप यादव ने उसे भाला फेंकने की सलाह दी।
संदीप की सलाह पर वह भाला फेंकने की ओर चल पड़ा। बताया जाता है कि पहले बांस का भाला लिया और फिर संदीप ने ही जैवलिन थ्रो का भाला खरीदवाया। संदीप ही उसका पहला कोच बना। उसके बाद दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कोच नवल सिंह से मुलाकात की और प्रशिक्षण लेना शुरू किया। नवल सिंह और सचिन यादव ने सचिन जैसा सितारा तलाश किया और आज देश का भविष्य उसे बना दिया।
खूब आई कठिनाई, नहीं मानी हार
जब देश में लॉक डाउन लग गया था तो हर किसी के सामने एक संकट था, लेकिन सचिन यादव ने हार नहीं मानी और खेतों में ही भाला फेंकने का अभ्यास करता रहा। उसने अपने अभ्यास को रूकने नहीं दिया। बताया जाता है कि जब सचिन को चोट लगी थी तो उसके पिता ने कर्ज तक लिया था और उसका इलाज कराया था। वर्ष 2021 में प्रशिक्षण लेते समय उसकी कोहनी में दो बार फ्रैक्चर हो गया था। जिसके बाद सचिन के पिता ने किसान होते हुए उसे कमी नहीं होने दी और कर्ज लेकर उपचार कराया। बताया कि दिल्ली स्टेडियम में कार्य चलने के कारण वह प्रशिक्षण नहीं हो पा रहा था, जिसके चलते उसे फरीदाबाद जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ा। सचिन के पिता का कहना है कि वह प्रशिक्षण के साथ-साथ नौकरी का संतुलन भी बनाता है।

